चुनाव खत्म होते ही महंगाई और ईंधन संकट पर घिरी मोदी सरकार, कांग्रेस ने उठाए बड़े सवाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली 11 मई 2026: भारत की राजनीति में आर्थिक मुद्दों को लेकर बयानबाज़ी हमेशा चर्चा का केंद्र रहती है. हाल ही में कांग्रेस नेत्री Supriya Shrinate ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कई सवाल खड़ा किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया है कि चुनाव खत्म होने के बाद सरकार अब जनता को पेट्रोल-डीजल बचाने, सोना न खरीदने, विदेश यात्रा कम करने और खाने के तेल तक का इस्तेमाल घटाने की सलाह दे रही है.
सुप्रिया श्रीनेत ने इसे केवल सलाह नहीं बल्कि सरकार की आर्थिक और ऊर्जा नीति की विफलता बताया है. उनका कहना है कि यदि देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती और अर्थव्यवस्था स्थिर होती, तो सरकार को जनता से इस तरह की अपील करने की जरूरत नहीं पड़ती.
चुनाव के बाद बदला सरकार का संदेश
सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया है कि चुनावों के दौरान सरकार ने विकास और मजबूत अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश की, लेकिन चुनाव खत्म होते ही जनता को खर्च कम करने की सलाह दी जाने लगा है. उनके अनुसार सरकार का संदेश साफ है कि देश आर्थिक दबाव से गुजर रहा है.
उन्होंने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा है कि,
घर से काम करें.
मेट्रो का इस्तेमाल करें.
पेट्रोल-डीजल बचाएं.
सोना न खरीदें.
विदेश यात्रा कम करें.
विदेशी सामान से दूरी बनाएं.
खाने के तेल की खपत घटाएं.
खेती में खाद का कम इस्तेमाल करें.
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ये सलाहें आम लोगों की जिंदगी पर बढ़ते आर्थिक बोझ को दर्शाती हैं.
राहुल गांधी की चेतावनी का भी किया जिक्र
सुप्रिया श्रीनेत ने अपने पोस्ट में Rahul Gandhi का भी उल्लेख किया है. उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने मार्च महीने में ही ईंधन संकट और महंगाई को लेकर सरकार को आगाह किया था.
उनके अनुसार उस समय सरकार ने विपक्ष की बातों को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन अब हालात ऐसे बन गया हैं कि खुद सरकार को जनता से बचत करने की अपील करनी पड़ रही है.
कांग्रेस लगातार यह आरोप लगाती रही है कि केंद्र सरकार ने महंगाई, बेरोजगारी और ईंधन संकट जैसे मुद्दों पर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए. विपक्ष का कहना है कि इसका असर अब सीधे आम नागरिकों की जेब पर दिखाई दे रहा है.
ऊर्जा सुरक्षा पर उठे सवाल
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों में शामिल है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. सुप्रिया श्रीनेत का आरोप है कि सरकार लंबे समय से सत्ता में होने के बावजूद ऊर्जा सुरक्षा को लेकर मजबूत नीति नहीं बना सकी.
उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने समय रहते ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों और घरेलू उत्पादन पर पर्याप्त ध्यान दिया होता, तो आज देश को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता.
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय तनाव, तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर भारत जैसे देशों पर अधिक पड़ता है. हालांकि सरकार लगातार नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की बात करती रही है.
रोड शो और विदेश यात्रा पर तंज
सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री मोदी पर दोहरी राजनीति करने का भी आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि एक तरफ जनता को पेट्रोल-डीजल बचाने की सलाह दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ बड़े-बड़े रोड शो आयोजित किए जा रहे हैं.
उन्होंने प्रधानमंत्री की प्रस्तावित विदेश यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि जनता को विदेश यात्रा से बचने की सलाह देने वाले नेता खुद विदेश जा रहे हैं. कांग्रेस का दावा है कि सरकार जनता से त्याग की उम्मीद कर रही है जबकि सत्ता में बैठे लोग उसी तरह की जीवनशैली जारी रखे हुए हैं.
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अच्छे दिन पर विपक्ष का हमला
अपने बयान में सुप्रिया श्रीनेत ने अच्छे दिन के पुराने नारे को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि 12 साल सत्ता में रहने के बाद यदि सरकार को जनता को यह बताना पड़े कि क्या खरीदना चाहिए और क्या नहीं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है.
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा दबाव में है. पेट्रोल-डीजल की कीमतें, खाद्य तेल, गैस सिलेंडर और रोजमर्रा की चीजों के दाम आम लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं.
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
सुप्रिया श्रीनेत के इस पोस्ट के बाद सोशल media पर तीखी बहस शुरू हो गई. विपक्षी समर्थकों ने इसे सरकार की असफलता बताया, जबकि भाजपा समर्थकों ने कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया.
कुछ लोगों का कहना है कि संसाधनों की बचत करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है और सरकार की अपील को सकारात्मक रूप में देखा जाना चाहिए. वहीं विपक्ष का तर्क है कि यदि आर्थिक हालात मजबूत होते तो ऐसी अपीलों की जरूरत ही नहीं पड़ती.
निष्कर्ष
सुप्रिया श्रीनेत का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में महंगाई, ईंधन कीमतों और आर्थिक चुनौतियों को लेकर चर्चा तेज है. विपक्ष इसे सरकार की नीतिगत विफलता बता रहा है, जबकि सरकार आत्मनिर्भरता और संसाधनों के बेहतर उपयोग की बात कर रही है.
आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है. खासतौर पर तब, जब आम जनता सीधे महंगाई और बढ़ते खर्च का असर महसूस कर रही हो. अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों का किस तरह जवाब देती है और आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए कौन से कदम उठाती है.

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