RJD ने उठाए प्रतिनिधित्व, परिवारवाद और महिला भागीदारी पर सवाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 7 मई 2026: बिहार की नई राजनीतिक हलचलों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सम्राट मंत्रिमंडल के शपथग्रहण समारोह को लेकर भारतीय जनता पार्टी और NDA पर तीखा हमला बोला है. राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने दावा किया कि यह समारोह एनडीए का नहीं बल्कि पूरी तरह भाजपा सरकार का आयोजन नजर आया. उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे कार्यक्रम में सहयोगी दलों की उपस्थिति लगभग गायब रही और भाजपा ने इसे अपने राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया.
शपथग्रहण में NDA कहीं दिखाई नहीं पड़ा
राजद प्रवक्ता ने कहा कि पटना शहर से लेकर गांधी मैदान तक केवल भाजपा के झंडे और बैनर दिखाई दे रहे थे. कार्यक्रम स्थल पर लगे पोस्टरों में भी केवल प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की तस्वीरें थीं, जबकि सहयोगी दलों के नेताओं या प्रतीकों को जगह नहीं मिली.
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के रोड शो में भी सहयोगी दलों का कोई प्रमुख नेता साथ नहीं दिखा, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि गठबंधन राजनीति केवल नाम भर की रह गई है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में भाजपा अब गठबंधन की बजाय अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को अधिक मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है.
परिवारवाद पर भाजपा को घेरने की कोशिश
RJD प्रवक्ता ने परिवारवाद के मुद्दे पर भाजपा और उसके सहयोगियों को निशाने पर लिया.उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने वर्षों तक परिवारवाद के खिलाफ भाषण दिए, उनके ही परिवार के सदस्य अब सत्ता में जगह पा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि,
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत का नाम चर्चा में रहा.
उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश को मंत्री पद मिला.
जबकि जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष कुमार सुमन पहले से मंत्री पद पर हैं.
राजद ने तंज कसते हुए कहा कि “परिवारवाद विरोधी राजनीति अब पितृ धर्म निभाने तक सीमित हो गई है.
महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भाजपा पर सवाल
राजद ने सम्राट मंत्रिमंडल में महिलाओं की कम भागीदारी को भी बड़ा मुद्दा बनाया. प्रवक्ता ने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण के प्रति गंभीर होती, तो मंत्रिमंडल में महिलाओं की संख्या अधिक होती.
उनके अनुसार,
मंत्रिमंडल में केवल पांच महिलाओं को जगह दी गई,
जबकि 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व के हिसाब से कम से कम 14 महिलाओं को मंत्री बनाया जाना चाहिए था.
उन्होंने इसे भाजपा की कथनी और करनी में अंतर बताया.
जातीय संतुलन पर भी उठे सवाल
राजद प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक माने जाने वाले कई वर्गों को मंत्रिमंडल में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला.
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि,
कायस्थ समाज को एक भी स्थान नहीं दिया गया,
ब्राह्मण समाज, जिसकी भाजपा को वोट हिस्सेदारी अधिक मानी जाती है, उसे केवल दो मंत्री पद मिले.
राजद ने दावा किया कि जातीय समीकरणों को लेकर भाजपा के भीतर असंतोष बढ़ सकता है.
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नीतीश कुमार अभी भी कुर्सी नहीं छोड़ पाए
RJD ने मुख्यमंत्री पद को लेकर भी बड़ा राजनीतिक बयान दिया.चित्तरंजन गगन ने कहा कि शपथग्रहण समारोह के दौरान यह साफ दिखा कि Nitish Kumar अभी भी मुख्यमंत्री की कुर्सी से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि मंच पर बार-बार उनकी गतिविधियों से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वे अब भी खुद को मुख्यमंत्री की भूमिका में महसूस कर रहे हैं. राजद ने इसे कुर्सी मोह करार दिया.
बिहार की राजनीति में बढ़ेगी बयानबाज़ी
सम्राट मंत्रिमंडल के गठन के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाज़ी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.विपक्ष लगातार प्रतिनिधित्व, गठबंधन संतुलन और परिवारवाद जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि भाजपा इसे विकास और स्थिर सरकार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है.
आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है.

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