मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन विवाद पर दी सफाई, बोलीं- फॉर्म 26 में कोई जानकारी नहीं छिपाई गई

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Ajit Kumar

भारत
राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद पर अपनी सफाई देते हुए कह रही हैं कि फॉर्म 26 में कोई जानकारी नहीं छिपाई गई और सभी आवश्यक विवरण चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार दिए गए हैं.

राज्यसभा नामांकन को लेकर उठे सवालों पर कांग्रेस प्रत्याशी का जवाब

तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली: मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को लेकर उठे विवाद पर अब स्वयं उन्होंने विस्तार से अपनी बात रखी है. कांग्रेस के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर साझा किए गए बयान में मीनाक्षी नटराजन ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने अपने नामांकन फॉर्म 26 में कोई भी जानकारी नहीं छिपाई है और उन पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं.

राज्यसभा नामांकन प्रक्रिया के दौरान उनके खिलाफ यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने फॉर्म 26 में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाईं. हालांकि मीनाक्षी नटराजन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि फॉर्म 26 में वही सूचनाएं मांगी जाती हैं, जिन्हें उन्होंने पूरी पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराया है.

क्या होता है फॉर्म 26?

मीनाक्षी नटराजन के अनुसार, फॉर्म 26 चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जिसमें उम्मीदवारों से विभिन्न प्रकार की व्यक्तिगत और कानूनी जानकारियां मांगी जाती हैं. उन्होंने बताया है कि इस फॉर्म में मुख्य रूप से निम्नलिखित जानकारियां शामिल होती हैं.

राजनीतिक दल की जानकारी.
मतदाता सूची में उम्मीदवार का क्रमांक.
फोन नंबर और ई-मेल जैसी व्यक्तिगत जानकारियां.
पैन कार्ड और आयकर रिटर्न का विवरण.
संपत्ति और देनदारियों की जानकारी.

इसके अतिरिक्त उम्मीदवारों से यह भी पूछा जाता है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित है या नहीं तथा क्या उन्हें किसी दंडनीय अपराध में दोषी ठहराया गया है.

विवाद की जड़ क्या है?

मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि पूरा विवाद एक लीगल नोटिस को लेकर खड़ा किया गया है. उनके मुताबिक, जिस मामले का हवाला देकर आरोप लगाए जा रहे हैं, वह केवल एक निजी शिकायत (Private Complaint) और लीगल नोटिस से संबंधित है, जिसे किसी अदालत ने अभी तक संज्ञान में भी नहीं लिया है.

उन्होंने कहा कि फॉर्म 26 में ऐसा कोई कॉलम नहीं है, जिसमें निजी शिकायत या केवल लीगल नोटिस की जानकारी देने का प्रावधान हो.इसलिए उन्होंने वही जानकारी दी, जो चुनाव आयोग के निर्धारित प्रारूप में मांगी गई थी.

उनका कहना है कि यदि फॉर्म में ऐसा कोई प्रावधान होता, तो वे निश्चित रूप से उसकी जानकारी भी दर्ज करतीं.

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न कोई जानकारी छिपाई, न कोई तथ्य दबाया

कांग्रेस नेता ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने फॉर्म 26 के सभी नियमों का पालन किया है और किसी भी प्रकार की जानकारी छिपाने का सवाल ही नहीं उठता है .

उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ न तो कोई ऐसा आपराधिक मामला लंबित है, जिसका विवरण फॉर्म में देना अनिवार्य हो, और न ही उन्हें किसी अपराध में दोषी ठहराया गया है। ऐसे में उन पर लगाए जा रहे आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं.

मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि नामांकन पत्र में वही जानकारी दी गई है, जो चुनाव आयोग के नियमों के तहत अपेक्षित थी.इसलिए यह कहना कि उन्होंने कोई सूचना छिपाई है, पूरी तरह भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोप है.

कांग्रेस ने भी किया बचाव

कांग्रेस पार्टी ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से मीनाक्षी नटराजन का पक्ष सामने रखा है. पार्टी का कहना है कि नामांकन प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है और नियमों की गलत व्याख्या करके भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है.

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि नामांकन फॉर्म में किसी प्रकार की कोई त्रुटि नहीं है.

चुनावी राजनीति में बढ़ा विवाद

राज्यसभा चुनावों के दौरान उम्मीदवारों के नामांकन पत्र अक्सर राजनीतिक बहस का विषय बन जाता हैं. कई बार तकनीकी आधारों पर आपत्तियां दर्ज कराई जाती हैं और फिर उनका परीक्षण चुनावी अधिकारियों द्वारा किया जाता है.

मीनाक्षी नटराजन का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनके नामांकन को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. हालांकि उनका दावा है कि उन्होंने चुनाव आयोग के सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया है और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों में कोई तथ्य नहीं है.

निष्कर्ष

मीनाक्षी नटराजन ने साफ शब्दों में कहा है कि फॉर्म 26 में कोई जानकारी नहीं छिपाई गई और जो भी विवरण चुनाव आयोग द्वारा मांगा गया था, उसे पूरी तरह उपलब्ध कराया गया. उनका कहना है कि केवल एक लीगल नोटिस या निजी शिकायत को आधार बनाकर नामांकन पर सवाल उठाना उचित नहीं है, खासकर तब जब अदालत ने उस मामले में संज्ञान तक नहीं लिया हो.

अब यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से चर्चा का विषय बना हुआ है. आने वाले दिनों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस विवाद पर संबंधित अधिकारियों का रुख और निर्णय महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.

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