बिहार में 13-14 अगस्त को खेग्रामस का 24 घंटे सत्याग्रह

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Ajit Kumar

बिहार
बिहार में खेग्रामस के 13-14 अगस्त सत्याग्रह की घोषणा करते नेता

बासगीत पर्चा, 5 डिसमिल जमीन, राशन और 700 रुपये मजदूरी समेत कई मांगों पर आंदोलन

तीसरा पक्ष ब्यूरो:पटना में 12 अगस्त 2026 को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) ने बिहार के ग्रामीण गरीबों, भूमिहीनों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की है.संगठन के अनुसार स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले 13 और 14 अगस्त को बिहार के विभिन्न अंचलों और प्रखंडों में 24 घंटे का अनशन एवं सत्याग्रह आयोजित किया जाएगा. संगठन ने इसे गांव के गरीबों और मजदूरों के अधिकारों से जुड़े सवालों पर व्यापक आंदोलन की शुरुआत बताया है.

खेग्रामस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक आंदोलन का प्रमुख केंद्र भूमिहीन और आवासहीन परिवारों के अधिकार, राशन, रोजगार, न्यूनतम मजदूरी, पेयजल और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे होंगे। संगठन का आरोप है कि विकास के दावों के बावजूद बिहार में बड़ी संख्या में ग्रामीण गरीब आज भी जमीन और आवास के अधिकार से वंचित हैं.

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बासगीत पर्चा और भूमिहीनों को जमीन देने की मांग

खेग्रामस ने मांग की है कि जहां गरीब परिवार लंबे समय से बसे हुए हैं, उन्हें PPH Act 1947 के तहत बासगीत पर्चा दिया जाए. इसके साथ ही सभी भूमिहीन परिवारों को 5 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई है.

संगठन का कहना है कि राज्य के कई दलित और महादलित समुदायों की बस्तियां लंबे समय से नियमितीकरण और जमीन के कागजात की समस्या से जूझ रही हैं. प्रेस विज्ञप्ति में मुजफ्फर, मांझी, ऋषभदेव, डोम, हलखोर, मोहर और बांतर जैसी बस्तियों का उल्लेख करते हुए दावा किया गया कि इन समुदायों के आवासीय अधिकार का सवाल अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुआ है.

खेग्रामस ने सरकार की आवासीय और भूमि संबंधी योजनाओं पर भी सवाल उठाया है. संगठन के अनुसार पहले भूमिहीनों के लिए आवासीय कॉलोनियां बनाने की पहल हुई थी, लेकिन बाद में ऐसी व्यवस्थाएं कमजोर पड़ गईं. संगठन ने ऑपरेशन बसेरा को भी पर्याप्त प्रभावी नहीं बताया और इसे बड़े पैमाने पर भूमिहीन परिवारों की जरूरतों के मुकाबले अपर्याप्त करार दिया है.

बुलडोजर कार्रवाई पर संगठन ने उठाए सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में खेग्रामस ने गरीबों के घरों को हटाए जाने की कार्रवाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है.संगठन ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था दिए बिना विस्थापित किया जा रहा है.

हालांकि, ये आरोप खेग्रामस द्वारा संवाददाता सम्मेलन में लगाए गए हैं और संबंधित सरकारी विभागों या प्रशासन का पक्ष इस प्रेस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है.ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति समझने के लिए प्रशासनिक आदेश, भूमि रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों का पक्ष देखना आवश्यक होगा.

राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा ने विशेष रूप से पटना के कंगन घाट का मुद्दा उठाया है.उन्होंने दावा किया कि वहां गरीब परिवारों को हटाया जा रहा है और सरकार से इस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है.उन्होंने कहा कि भाकपा माले की टीम पहले कंगन घाट का दौरा कर चुकी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर आंदोलन तेज किया जाएगा.

राशन सूची से नाम हटाने का विरोध

खेग्रामस ने गरीब परिवारों के राशन से जुड़े मुद्दे को भी आंदोलन के प्रमुख एजेंडे में रखा है. संगठन की मांग है कि राशन सूची में गरीबों के नाम काटने की प्रक्रिया रोकी जाए और सभी जरूरतमंद गरीब परिवारों को राशन उपलब्ध कराया जाए.

संगठन ने राशन कार्ड के लिए आधार को आधारभूत पात्रता मानने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया है. उसका कहना है कि ऐसे लोगों को भी खाद्य सुरक्षा का लाभ मिलना चाहिए जो वास्तव में जरूरतमंद हैं, लेकिन किसी दस्तावेजी या तकनीकी वजह से सूची से बाहर हो जाते हैं.

यह मुद्दा ग्रामीण गरीबों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि राशन व्यवस्था में नाम जुड़ने या हटने का सीधा प्रभाव परिवारों की खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है.

700 रुपये दैनिक मजदूरी और रोजगार की मांग

ग्रामीण मजदूरों के आर्थिक अधिकारों को लेकर खेग्रामस ने 700 रुपये दैनिक न्यूनतम मजदूरी घोषित करने और इसके सख्ती से पालन की मांग की है.संगठन ने ग्रामीण रोजगार के तहत काम उपलब्ध कराने तथा काम के बदले उचित मजदूरी देने की मांग भी रखी है.

इसके अलावा संगठन ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, सम्मान और रोजगार की गारंटी के लिए कानून बनाने की मांग की. बिहार से बड़ी संख्या में श्रमिक रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर जाते हैं. ऐसे में प्रवासी मजदूरों के रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का प्रश्न ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ा हुआ है.

खेग्रामस ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था बंद करने और गांव के मजदूर-किसानों से टैक्स वसूली रोकने की मांग भी की है.

पेयजल और सामाजिक सुरक्षा भी आंदोलन के एजेंडे में

आंदोलन केवल जमीन और रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा. संगठन ने गंडक, बागमती और कमला नदी के इलाकों में पेयजल की समस्या को भी उठाया है.प्रेस विज्ञप्ति में इन क्षेत्रों में पेयजल को लेकर पैदा हो रही कठिनाइयों के समाधान की मांग की गई है.

इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग भी रखी गई है. संगठन का तर्क है कि ग्रामीण गरीब, बुजुर्ग और कमजोर तबके महंगाई के दौर में मौजूदा सामाजिक सुरक्षा सहायता पर निर्भर रहते हैं, इसलिए पेंशन राशि में वृद्धि जरूरी है.

सरकारी स्कूलों की स्थिति का मुद्दा भी उठेगा

खेग्रामस ने ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को भी अपने आंदोलन के एजेंडे में शामिल किया है.संगठन के मुताबिक सरकारी विद्यालयों को नवोदय विद्यालय के स्तर पर विकसित करने, आवश्यक कक्षा-कक्षों का निर्माण कराने और शिक्षकों की भर्ती करने की मांग उठाई जाएगी.

इससे आंदोलन का दायरा केवल मजदूरी और भूमि अधिकार तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं जैसे व्यापक सवालों तक पहुंचता है.

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राष्ट्रपति को भेजा जाएगा ज्ञापन

खेग्रामस के अनुसार इन मांगों को लेकर एक ज्ञापन राष्ट्रपति को भेजा जाएगा. संगठन ने कहा है कि बिहार में शुरू होने वाला यह आंदोलन व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा होगा. प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने छात्र-युवा आंदोलनों के बाद गांव के गरीबों के साझा आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही.

संवाददाता सम्मेलन को खेग्रामस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक सत्यदेव राम, राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा, बिहार सचिव शत्रुघ्न सहनी और पूर्व विधायक वीरेंद्र गुप्ता ने संबोधित किया.

धीरेंद्र झा ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस से पहले शुरू हो रहा यह आंदोलन आने वाले समय में निर्णायक रूप ले सकता है.उनका आरोप था कि सरकार के विकास के नक्शे में गांव, गरीबी और पलायन जैसे बुनियादी सवाल पर्याप्त जगह नहीं पा रहे हैं.

13-14 अगस्त का आंदोलन क्यों महत्वपूर्ण है?

खेग्रामस का प्रस्तावित 24 घंटे का सत्याग्रह ऐसे समय में हो रहा है जब ग्रामीण बिहार में जमीन, आवास, रोजगार, राशन और मजदूरी जैसे मुद्दे राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं. 13-14 अगस्त के आंदोलन के दौरान यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितने अंचलों और प्रखंडों में प्रदर्शन होता है, प्रशासन की प्रतिक्रिया क्या रहती है और सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है.

फिलहाल खेग्रामस ने साफ कर दिया है कि वह भूमिहीनों को जमीन और बासगीत पर्चा, गरीबों को राशन, 700 रुपये दैनिक मजदूरी, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, पेयजल और ग्रामीण शिक्षा जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाएगा.

स्वतंत्रता दिवस के पूर्व होने वाला यह सत्याग्रह बिहार के ग्रामीण गरीबों की समस्याओं को राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है. अब असली सवाल यह है कि 13 और 14 अगस्त को होने वाले आंदोलन के बाद सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या ग्रामीण गरीबों से जुड़े इन लंबे समय से उठते आ रहे सवालों का कोई ठोस समाधान सामने आता है.

निष्कर्ष

13-14 अगस्त को प्रस्तावित खेग्रामस का 24 घंटे का अनशन और सत्याग्रह बिहार के ग्रामीण गरीबों, भूमिहीनों और मजदूरों से जुड़े कई बुनियादी सवालों को सामने ला रहा है. बासगीत पर्चा और 5 डिसमिल जमीन से लेकर राशन, रोजगार, 700 रुपये दैनिक मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, पेयजल और सरकारी शिक्षा तक की मांगें सीधे ग्रामीण जीवन की समस्याओं से जुड़ी हैं. अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन मांगों और आंदोलन पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या गरीब परिवारों के भूमि, आवास तथा रोजगार से जुड़े सवालों पर कोई ठोस पहल होती है.

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