पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ बिहारभर में छात्र-युवा अभियान चलेगा
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 9 अगस्त 2026 : बिहार में शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और रोजगार के सवालों को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) बिहार ने Gen Z Rising अभियान शुरू करने की घोषणा की है.संगठन के अनुसार, अभियान के तहत बिहार के विभिन्न जिलों और विश्वविद्यालयों में छात्र-युवा संसद, छात्र सम्मेलन और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इसका मुख्य फोकस शिक्षा व्यवस्था की स्थिति, पेपर लीक, बेरोजगारी, शिक्षा के बाजारीकरण और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों पर रहेगा .
पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में AISA बिहार के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड धनंजय, राज्य सचिव कॉमरेड दीपांकर, RYA के राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड अजीत कुशवाहा, AISA बिहार की राज्य उपाध्यक्ष कॉमरेड सबा आफरीन और कॉमरेड मनीषा तथा AISA पटना विश्वविद्यालय के कार्यकर्ता कॉमरेड विवेक आनंद सुंदर मौजूद रहे.
शिक्षा व्यवस्था और रोजगार संकट को लेकर AISA का हमला
AISA बिहार के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड धनंजय ने आरोप लगाया कि बिहार में सरकारी शिक्षण संस्थानों को मजबूत करने के बजाय निजीकरण, फीस वृद्धि और आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है.उन्होंने कहा कि इसके समानांतर युवाओं के सामने रोजगार का संकट भी गंभीर बना हुआ है.
संगठन का कहना है कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों को केवल चुनावी मुद्दे के रूप में नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़े बुनियादी सवाल के रूप में उठाने की जरूरत है. इसी उद्देश्य से Gen Z Rising अभियान के माध्यम से विश्वविद्यालयों और जिलों में छात्रों के बीच संवाद बढ़ाने की योजना बनाई गई है.
शिक्षा के भगवाकरण का लगाया आरोप
RYA के राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड अजीत कुशवाहा ने बिहार के स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते भगवाकरण को लेकर चिंता जताई. उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था को वैज्ञानिक, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर आधारित रखने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि शिक्षा को सांप्रदायिक विचारधारा के अनुरूप ढालने की कोशिशों का छात्र-युवा विरोध करेंगे. यह बयान संगठन की ओर से शिक्षा के स्वरूप और पाठ्यक्रम को लेकर व्यक्त की गई राजनीतिक चिंता के तौर पर सामने आया है.
पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल
AISA बिहार की राज्य उपाध्यक्ष कॉमरेड सबा आफरीन ने परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने संगठन के अनुसार पिछले नौ वर्षों में छह बड़े पेपर लीक, लगभग 500 अधिकारियों की गिरफ्तारी और बाद में जमानत तथा 50 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के परीक्षा एवं पुनर्परीक्षा के चक्र में फंसने का दावा किया.
AISA का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं का सबसे ज्यादा असर उन छात्रों पर पड़ता है जो लंबे समय तक तैयारी करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं. संगठन ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को अभियान के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है.
विश्वविद्यालयों तक पहुंचेगा Gen Z Rising अभियान
AISA बिहार के राज्य सचिव कॉमरेड दीपांकर ने कहा कि Gen Z Rising अभियान को बिहार के प्रमुख जिलों और विश्वविद्यालयों तक ले जाया जाएगा. इसके तहत छात्र-युवा संसद और छात्र सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जहां शिक्षा, परीक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर युवाओं की भागीदारी के साथ चर्चा की जाएगी.
संगठन के मुताबिक, अभियान का उद्देश्य अलग-अलग विश्वविद्यालयों और जिलों के छात्रों को एक साझा मंच देना तथा उनके मुद्दों को सामूहिक रूप से उठाना है.
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बिहार में इन तारीखों पर होंगे कार्यक्रम
AISA बिहार ने अभियान के तहत प्रस्तावित कार्यक्रमों की तारीख और स्थान भी घोषित किए हैं:
11 अगस्त: सिवान
13 अगस्त: VKSU, आरा
18 अगस्त: बेतिया
19 अगस्त: JPU, छपरा एवं छात्र-युवा संवाद, मोतिहारी
20 अगस्त: LNMU, दरभंगा
22 अगस्त: BNMU, मधेपुरा
25 अगस्त: TMBU, भागलपुर
29 अगस्त: MU, गया
31 अगस्त: PU, पूर्णिया
2 सितंबर: BRABU, मुजफ्फरपुर
3 सितंबर: मुंगेर विश्वविद्यालय, मुंगेर
7 सितंबर: पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय एवं पटना विश्वविद्यालय, पटना
इन कार्यक्रमों के जरिए संगठन छात्र-युवाओं के बीच शिक्षा, परीक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने की तैयारी कर रहा है.
शिक्षा बचाने और रोजगार के अधिकार की लड़ाई का आह्वान
AISA ने बिहार के छात्र-युवाओं से Gen Z Rising अभियान में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है. संगठन ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और सम्मानजनक रोजगार के अधिकार से जुड़े सवालों को अभियान का केंद्रीय मुद्दा बनाया है.
बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं की बड़ी संख्या और उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के बीच शिक्षा एवं रोजगार लगातार महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं. ऐसे में AISA का यह अभियान छात्र राजनीति के साथ-साथ शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों को सार्वजनिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है.
हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में AISA की ओर से बताए गए पेपर लीक, गिरफ्तारियों और अभ्यर्थियों से जुड़े आंकड़े संगठन के दावे हैं. इन आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं है.

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