बिहार में गरीबों के वास-आवास का मुद्दा, 2 अक्टूबर को महाजुटान

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Ajit Kumar

बिहार
बिहार में गरीबों के वास-आवास और 5 डिसमिल जमीन की मांग को लेकर खेग्रामस का आंदोलन

खेग्रामस ने भूमिहीन परिवारों को 5 डिसमिल जमीन, बसे गरीबों को पर्चा और रोजगार की मांग उठाई है

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 22 सितंबर 2026: अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) ने बिहार में गरीबों के वास-आवास और भूमिहीन परिवारों को जमीन देने के सवाल को लेकर अपना गरीब बसाओ आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है. संगठन का कहना है कि इस अभियान के जरिए गांवों और पंचायतों के गरीब परिवार अपने जमीन, आवास और रोजगार से जुड़े अधिकारों को लेकर संगठित हो रहे हैं.

खेग्रामस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यदेव राम, राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा और राज्य सचिव शत्रुघ्न सहनी ने 22 सितंबर को संयुक्त बयान जारी कर सरकार की आवास और जमीन संबंधी नीतियों पर सवाल उठाए. नेताओं ने कहा कि सरकार ऑपरेशन बसेरा के नाम पर ठोस नीतिगत निर्णय लेने से बच रही है.

भूमिहीन परिवारों के लिए 5 डिसमिल जमीन की मांग

खेग्रामस ने सरकार से मांग की है कि भूमिहीन परिवारों के लिए प्रत्येक पंचायत में अलग से कॉलोनी विकसित की जाए और हर भूमिहीन परिवार को 5 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने का स्पष्ट निर्णय लिया जाए.

संगठन के नेताओं के मुताबिक, जो गरीब परिवार पहले से सरकारी या अन्य जमीन पर बसे हुए हैं, उन्हें पीपी एक्ट की धारा 47 के तहत वहीं पर्चा दिया जाना चाहिए. संगठन का तर्क है कि इससे वर्षों से बसे परिवारों को अपने आवास को लेकर स्थायी अधिकार मिल सकेगा.

छोटे भूखंड को लेकर सरकार पर सवाल

खेग्रामस नेताओं ने दावा किया कि अलग-अलग स्थानों पर गरीब परिवारों को आधा डिसमिल, एक डिसमिल या डेढ़-दो डिसमिल जमीन देने की बात सामने आ रही है.संगठन ने सवाल उठाया कि इतने छोटे भूखंड पर गरीब परिवार अपना घर बनाने के साथ-साथ मवेशियों के लिए जगह कैसे निकाल पाएंगे.

संगठन का कहना है कि जमीन उपलब्ध कराने की नीति बनाते समय केवल आवास निर्माण नहीं, बल्कि परिवार की वास्तविक जरूरतों और जीवन-यापन की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.

2 अक्टूबर को पंचायत भवनों पर गरीबों का महाजुटान

खेग्रामस ने घोषणा की है कि 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के अवसर पर बिहार की पंचायतों में गरीबों का महाजुटान आयोजित किया जाएगा.इस दौरान गरीब परिवार जमीन के अधिकार और ग्रामजी कानून के तहत रोजगार की मांग को लेकर आवेदन देंगे.

संगठन के अनुसार, आवेदन देने के साथ आवेदकों को उसकी पावती रसीद भी प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा.खेग्रामस इसे पंचायत स्तर से गरीब परिवारों की मांगों को प्रशासन और राज्य सरकार तक पहुंचाने का माध्यम बता रहा है.

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पंचायत भवनों पर कर्मचारियों की मौजूदगी की मांग

खेग्रामस ने राज्य सरकार से यह भी मांग की है कि 2 अक्टूबर को सभी पंचायत भवनों पर संबंधित कर्मचारी, पंचायत सेवक और रोजगार सेवक मौजूद रहें.

संगठन का कहना है कि अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों की मौजूदगी रहने से गरीब परिवारों के आवेदन विधिवत स्वीकार किए जा सकेंगे और उन्हें पावती रसीद मिल सकेगी.

जमीन के साथ रोजगार का भी मुद्दा

खेग्रामस के आंदोलन में केवल आवास या जमीन का सवाल ही नहीं है. संगठन ने ग्रामजी कानून के तहत रोजगार उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है. उसके अनुसार, गरीब परिवारों के लिए स्थायी आवास के साथ जीवन-यापन के साधन और रोजगार का सवाल भी महत्वपूर्ण है.

संगठन ने सरकार से भूमिहीनों के लिए 5 डिसमिल जमीन, पहले से बसे गरीब परिवारों को पर्चा और ग्रामजी कानून के तहत रोजगार उपलब्ध कराने की ठोस कार्ययोजना लागू करने की मांग की है.

क्या है इस अभियान का अगला चरण?

22 सितंबर को जारी बयान के मुताबिक, अभियान का अगला प्रमुख चरण 2 अक्टूबर को पंचायत स्तर पर आवेदन और महाजुटान होगा. इससे जमीन और रोजगार से जुड़ी मांगों को स्थानीय प्रशासन के सामने औपचारिक रूप से रखने की कोशिश की जाएगी.

फिलहाल खेग्रामस की ओर से उठाई गई मांगें संगठन का पक्ष हैं.सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है, यह आगे स्पष्ट होगा। खास तौर पर 5 डिसमिल जमीन, बसे परिवारों को पर्चा और पंचायत भवनों पर आवेदन स्वीकार करने की व्यवस्था को लेकर सरकारी कार्रवाई इस अभियान के अगले चरण को प्रभावित कर सकती है.

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