जमुई छात्रा उत्पीड़न के खिलाफ ऐपवा का विरोध मार्च

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Ajit Kumar

बिहार
जमुई छात्रा उत्पीड़न के विरोध में पटना में ऐपवा का विरोध मार्च

ऐपवा ने पटना में मार्च निकालकर जमुई की घटना पर कार्रवाई, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग उठाई

तीसरा पक्ष ब्यूरो : पटना में अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ कथित यौन उत्पीड़न और छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट की घटना के विरोध में प्रदर्शन किया. संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 22 सितंबर 2026 को राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के तहत जीपीओ गोलंबर से स्टेशन तक विरोध मार्च निकाला गया.इसके बाद स्टेशन के समीप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन किया गया.

ऐपवा का कहना है कि जमुई की घटना ने बिहार में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. संगठन ने मांग की कि ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही तय हो तथा दोषियों के खिलाफ शीघ्र कानूनी कार्रवाई की जाए.

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जमुई की घटना को लेकर क्या कहा ऐपवा ने?

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सभा को संबोधित करते हुए ऐपवा नेताओं ने कहा कि नाबालिग लड़की के साथ सामने आई कथित बर्बरता चिंता का विषय है. संगठन ने दावा किया कि बिहार में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के साथ उत्पीड़न की घटनाएं सामने आ रही हैं और सरकार तथा पुलिस-प्रशासन को अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए.

हालांकि, इस मामले में पुलिस की ओर से भी कार्रवाई की खबर सामने आई है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जमुई में नाबालिग छात्र-छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई की.

मुख्यमंत्री के पुराने बयान का भी किया उल्लेख

ऐपवा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पहले दिए गए एक बयान का उल्लेख करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की.संगठन के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक कार्यक्रम में कहा था कि यदि रात में किसी महिला के साथ कोई घटना होती है तो वह इस्तीफा दे देंगे.

इस बयान को लेकर विपक्षी दलों और संगठनों की ओर से जमुई की घटना के बाद मुख्यमंत्री की जवाबदेही पर सवाल उठाए जा रहे हैं.मीडिया रिपोर्टों में भी मुख्यमंत्री के पुराने बयान को लेकर इस्तीफे की मांग का उल्लेख हुआ है.

ऐपवा ने अपने बयान में कहा कि जमुई की घटना शाम के समय हुई, इसलिए मुख्यमंत्री को अपने पुराने कथन के अनुरूप जवाबदेही स्वीकार करते हुए इस्तीफा देना चाहिए. यह मांग संगठन की राजनीतिक प्रतिक्रिया है.

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महिला और बच्चियों की सुरक्षा पर ऐपवा की मांग

ऐपवा ने महिला और बच्चियों के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए कई मांगें रखीं.संगठन के अनुसार, जिला और प्रखंड स्तर पर पुलिस-प्रशासन की जवाबदेही तय होनी चाहिए.

संगठन ने सार्वजनिक स्थानों और शैक्षणिक संस्थानों में लड़कियों तथा महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही, महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ उत्पीड़न के मामलों में तेज कानूनी प्रक्रिया और दोष सिद्ध होने पर शीघ्र सजा की मांग भी उठाई.

पटना में किन नेताओं ने संबोधित किया?

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विरोध मार्च के बाद हुई सभा को ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, भाकपा-माले की एमएलसी शशि यादव, ऐपवा की राज्य सचिव अनीता सिन्हा, नगर सचिव अनुराधा सिंह, आबदा खातून, विभा गुप्ता, राखी मेहता, रीना प्रसाद और छात्रा रिया पासवान ने संबोधित किया.

वक्ताओं ने जमुई की घटना को लेकर विरोध दर्ज कराने के साथ महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा तथा प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा उठाया.

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मामले में पुलिस कार्रवाई भी जारी

जमुई की घटना को लेकर सार्वजनिक स्तर पर विरोध के साथ पुलिस कार्रवाई की खबरें भी सामने आई हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था और अन्य आरोपियों की तलाश जारी थी.

22 सितंबर की रिपोर्टों में मुख्य आरोपी नंदन यादव के पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगने और उसके बाद अस्पताल ले जाए जाने की जानकारी भी सामने आई.

वहीं, नाबालिग पीड़िता की पहचान या घटना से जुड़े वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने को लेकर भी पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है.NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे सोशल मीडिया प्रोफाइलों के खिलाफ कार्रवाई की गई है.

निष्कर्ष

जमुई की घटना को लेकर बिहार में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया लगातार सामने आ रही है.ऐपवा ने पटना में विरोध मार्च और पुतला दहन के जरिए महिला सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और तेज न्यायिक प्रक्रिया की मांग उठाई है.दूसरी ओर, पुलिस मामले की जांच और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है.ऐसे मामलों में जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही आरोपों और जिम्मेदारी पर अंतिम निष्कर्ष निकलेगा.

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