चंद्रेश्वर चौधरी के परिवार को मुआवजा, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और सामंती दबाव के खिलाफ आंदोलन तेज करने की घोषणा
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 17 अगस्त 2026: रोहतास जिले के दिनारा क्षेत्र के मिल्की मनिहारी गांव में मजदूरी मांगने गए चंद्रेश्वर चौधरी की गोली मारकर हत्या के मामले को लेकर भाकपा माले ने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं. पार्टी के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने सोमवार को घटनास्थल का दौरा किया और मृतक के परिजनों से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने राजपुर में सभा को संबोधित किया और बिक्रमगंज स्थित पुष्पा उत्सव हॉल में प्रेस वार्ता किया .
दीपंकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि चंद्रेश्वर चौधरी की हत्या का मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे मजदूरी और श्रम अधिकारों से जुड़ा गंभीर विवाद भी सामने आता है. उन्होंने कहा कि मजदूर से कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी करवाना, उसके विरोध पर हत्या करना और फिर शव को गायब करना गंभीर अपराधों की श्रृंखला है.

चंद्रेश्वर चौधरी के परिवार के लिए मुआवजे की मांग
भाकपा माले महासचिव ने सरकार से चंद्रेश्वर चौधरी के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है. साथ ही उन्होंने हत्या के मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही.
उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए.माले का कहना है कि घटना के बाद पुलिस कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जिससे पीड़ित परिवार और गवाहों में भरोसा पैदा हो, न कि उनके बीच भय का माहौल बने.
पुलिस कार्रवाई को लेकर माले ने उठाए सवाल
दीपंकर भट्टाचार्य ने दावा किया कि घटना के बाद पीड़ित पक्ष और उनके समर्थन में खड़े लोगों के खिलाफ दो एफआईआर में गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है.उन्होंने इसे लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाया.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरे इलाके में पुलिस की भारी मौजूदगी के बीच उनकी सभा को अनुमति नहीं दी गई. माले महासचिव के अनुसार, इससे यह सवाल उठता है कि प्रशासन पीड़ितों की आवाज को किस तरह देख रहा है.
हालांकि, इन आरोपों और पुलिस की कार्रवाई से संबंधित दावों पर प्रशासन या पुलिस का आधिकारिक पक्ष इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं है.इसलिए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है.
शराब और अवैध हथियार बरामदगी का भी आरोप
प्रेस वार्ता में दीपंकर भट्टाचार्य ने दावा किया कि अजीत तिवारी के घर से बड़ी संख्या में शराब की खाली और भरी बोतलें तथा अवैध हथियार बरामद हुए, लेकिन उनके खिलाफ इस संबंध में मामला दर्ज नहीं किया गया.
उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब और कमजोर वर्गों के मामलों में पुलिस का रवैया अलग दिखाई देता है. अपने आरोप को व्यापक कानून-व्यवस्था के सवाल से जोड़ते हुए उन्होंने अरवल में अनिल कुशवाहा और बिलौटी में भरत तिवारी की मौत का भी उल्लेख किया है.
इन सभी मामलों में संबंधित आरोपों और पुलिस रिकॉर्ड की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है.किसी व्यक्ति पर अपराध का आरोप लगना और अदालत द्वारा दोष सिद्ध होना अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं.

सामंती दबाव के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का ऐलान
दीपंकर भट्टाचार्य ने बिहार में कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय को लेकर सरकार पर राजनीतिक हमला भी किया. उन्होंने महाजंगलराज, बुलडोजर राज और एनकाउंटर राज जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में पुरानी सामंती दबदबे की राजनीति को फिर से मजबूत करने की कोशिश हो रही है.
उन्होंने कहा कि भाकपा माले ऐसे किसी भी प्रयास का विरोध करेगी और चंद्रेश्वर चौधरी के परिवार को न्याय दिलाने के सवाल पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा.
माले की ओर से रखी गई मुख्य मांगें हैं—पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा, हत्या के दोषियों को कड़ी सजा और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई.
युवाओं और Gen-Z के सवालों को लेकर भी सरकार पर निशाना
प्रेस वार्ता के दूसरे हिस्से में दीपंकर भट्टाचार्य ने युवाओं और Gen-Z से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि देश के नौजवान शिक्षा, रोजगार, अधिकार और अपने भविष्य को लेकर सवाल उठा रहे हैं. उनके अनुसार, लोकतंत्र में सवाल पूछने वाली नई पीढ़ी को दबाने के बजाय उसकी भागीदारी को मजबूत किया जाना चाहिए.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि आजादी के दिन उन्हें देश के नौजवानों से माफी मांगनी चाहिए थी. इसके बजाय सवाल पूछने वाले युवाओं को ‘दिमागी नक्सली’ कहा जा रहा है. दीपंकर भट्टाचार्य ने इसे युवाओं की आवाज को नियंत्रित करने की कोशिश बताया.
हालांकि, इस बयान से संबंधित प्रधानमंत्री या केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया इस प्रेस विज्ञप्ति में शामिल नहीं . इसलिए इसे भाकपा माले महासचिव के राजनीतिक आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए.
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मतदान की उम्र 16 वर्ष करने पर बहस की मांग
दीपंकर भट्टाचार्य ने युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर एक महत्वपूर्ण सुझाव भी रखा.उन्होंने कहा कि भारत में मतदान की उम्र पहले 21 वर्ष थी, जिसे बाद में 18 वर्ष किया गया.अब युवाओं की लोकतांत्रिक भागीदारी को और व्यापक बनाने के लिए मतदान की उम्र 16 वर्ष करने पर देश में गंभीर बहस होनी चाहिए.
यह सुझाव भारत की चुनावी व्यवस्था में बड़े बदलाव से जुड़ा विषय है. इसे लागू करने के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ युवाओं की राजनीतिक समझ, मतदाता अधिकार और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों पर व्यापक सार्वजनिक बहस की आवश्यकता होगी.
रोहतास की घटना से कानून-व्यवस्था और श्रमिक अधिकारों तक सवाल
मिल्की मनिहारी की घटना को लेकर भाकपा माले ने जिस तरह मजदूरी, कथित बंधुआ श्रम, हत्या, शव गायब किए जाने के आरोप और पुलिस कार्रवाई को एक साथ उठाया है, उससे मामला केवल एक स्थानीय आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहता.यह ग्रामीण बिहार में मजदूरों के अधिकार, सामाजिक शक्ति-संतुलन और कानून के समान अनुपालन जैसे व्यापक सवाल भी सामने लाता है.
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि किस स्तर पर होती है और पीड़ित परिवार को न्याय एवं मुआवजा कब मिलता है. साथ ही, पुलिस-प्रशासन पर लगाए गए आरोपों का आधिकारिक जवाब सामने आना भी जरूरी है, ताकि पूरे मामले की तस्वीर तथ्यों के आधार पर स्पष्ट हो सके.
भाकपा माले ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले को लेकर आंदोलन को और तेज करेगी.ऐसे में आने वाले दिनों में रोहतास की यह घटना बिहार की राजनीति में कानून-व्यवस्था, मजदूर अधिकार और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकती है.
निष्कर्ष
रोहतास के मिल्की मनिहारी गांव में चंद्रेश्वर चौधरी की हत्या का मामला मजदूरों की सुरक्षा, सामाजिक न्याय और कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल सामने लाता है.भाकपा माले ने पीड़ित परिवार को मुआवजा और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग के साथ पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. अब निष्पक्ष जांच, सभी आरोपों की तथ्यात्मक पुष्टि और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई ही यह तय करेगी कि पीड़ित परिवार को न्याय कब और कैसे मिलता है. साथ ही, घटना से जुड़े सभी पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना भी जरूरी है, ताकि राजनीतिक आरोपों से अलग तथ्य स्पष्ट हो सकें.

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