बिहार में मतदाता सूची से गरीबों को बाहर करने की साजिश !
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 5 जुलाई:बिहार में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान के खिलाफ भाकपा-माले ने शनिवार को राज्यभर में विरोध दिवस मनाया.पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया की आड़ में गरीबों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और अल्पसंख्यक समुदायों को मतदाता सूची से हटाने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है.
राज्य के सौ से अधिक प्रखंड मुख्यालयों पर हुए इन विरोध प्रदर्शनों में हजारों लोगों ने भाग लिया. पटना समेत सासाराम, समस्तीपुर, वैशाली, भोजपुर, नवादा, सिवान, नालंदा, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, पूर्णिया, बेगूसराय, गया और फुलवारीशरीफ सहित कई जिलों में बड़े स्तर पर धरना, प्रदर्शन और प्रतिवाद मार्च आयोजित हुए.
पटना में जोरदार प्रदर्शन और जनसभा
राजधानी पटना में जीपीओ गोलंबर से बुद्ध स्मृति पार्क तक निकाले गए प्रतिवाद मार्च ने जनाक्रोश को केंद्र में ला दिया. इसके बाद आयोजित जनसभा को माले पोलित ब्यूरो सदस्य का. मीना तिवारी, विधान पार्षद शशि यादव, विधायक महबूब आलम, फुलवारी विधायक गोपाल रविदास, वरिष्ठ नेता सरोज चौबे, एआईपीएफ संयोजक कमलेश शर्मा और अन्य नेताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन रणविजय कुमार ने किया.
नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया “गरीबों की वोटबंदी” है. जिन दस्तावेजों की मांग की जा रही है, वे राज्य के गरीब तबके, खासकर प्रवासी मजदूरों के पास उपलब्ध नहीं हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तो यह कार्य और भी कठिन हो गया है. चुनाव आयोग द्वारा घोषित 11 दस्तावेजों में से तीन दस्तावेज बिहार में मान्य ही नहीं हैं.
यह भी पढ़े :मतदाता सूची पुनरीक्षण पर माले ने उठाया बड़ा सवाल
यह भी पढ़े :भाकपा-माले का विरोध: लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर प्रहार!
आधार कार्ड की वैधता पर सवाल
प्रदर्शनकारियों ने इस बात को भी उजागर किया कि पहले आधार को मतदाता पहचान के लिए अनिवार्य बताया गया था, लेकिन अब उसे ही अमान्य करार दिया जा रहा है. इसके अलावा मनरेगा जॉब कार्ड, मस्टर रोल, जाति प्रमाण पत्र जैसे स्थानीय और प्रामाणिक दस्तावेजों को भी स्वीकार नहीं किया जा रहा, जिससे ग्रामीण और गरीब जनता वोटिंग अधिकार से वंचित हो सकती है.
एनडीए पर तीखा हमला
माले नेताओं ने एनडीए सरकार और उसके घटक दलों पर भी सीधा हमला बोला.उन्होंने पूछा कि भाजपा और जदयू इस जनविरोधी प्रक्रिया का समर्थन क्यों कर रहे हैं? उन्होंने खास तौर पर दलित राजनीति के दावेदार नेताओं – जीतनराम मांझी और चिराग पासवान – की चुप्पी पर सवाल उठाया कि जब सबसे बड़ा हमला दलित और पिछड़े समुदायों के वोटिंग अधिकार पर हो रहा है, तब वे मौन क्यों हैं?
माले की प्रमुख मांगें
विशेष मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए.
आगामी विधानसभा चुनाव पूर्व की मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएं.
माले ने चुनाव आयोग को चेतावनी दी है कि अगर यह प्रक्रिया वापस नहीं ली गई, तो राज्यभर में व्यापक जनांदोलन शुरू किया जाएगा. आगामी 9 जुलाई को INDIA गठबंधन द्वारा बुलाए गए चक्का जाम में पार्टी पूरे दमखम से भाग लेगी.
यह भी पढ़े :लोकतंत्र की जंग अभी बाकी है! लालू यादव ने छेड़ा आंदोलन का बिगुल
बड़ी भागीदारी, गहरी नाराज़गी
इस आंदोलन में माले के वरिष्ठ नेता के.डी. यादव, अभ्युदय, जितेन्द्र कुमार, प्रकाश कुमार, पन्नालाल, उमेश सिंह, विनय यादव, विभा गुप्ता, मुर्तजा अली, तापेश्वर मांझी समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया.
माले का यह विरोध सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद – सर्वजन को मतदान का अधिकार – की रक्षा का आह्वान है. बिहार की सड़कों पर उमड़ा यह जनसैलाब इस बात की गवाही देता है कि मतदाता सूची से छेड़छाड़ की किसी भी कोशिश को जनता बर्दाश्त नहीं करेगी.

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.



















