मतदाता सूची पुनरीक्षण पर माले ने उठाया बड़ा सवाल

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Ajit Kumar

बिहार
मतदाता सूची पुनरीक्षण पर माले ने उठाया बड़ा सवाल चुनाव आयोग से मांगी पारदर्शिता और स्पष्टता

चुनाव आयोग से मांगी पारदर्शिता और स्पष्टता

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 5 जुलाई :बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भाकपा-माले ने एक बार फिर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई है.पार्टी के राज्य सचिव का. कुणाल ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, पटना को पत्र भेजकर इस पूरे मामले में फैली अव्यवस्था और भ्रम की स्थिति को दूर करने की मांग की है.

कॉ. कुणाल ने बताया कि भोजपुर और गोपालगंज सहित राज्य के कई जिलों से यह रिपोर्ट आ रही है कि बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) मतदाताओं से कह रहे हैं कि फॉर्म के साथ किसी प्रकार का दस्तावेज़ देने की आवश्यकता नहीं है. जबकि पहले इसके विपरीत निर्देश दिए गए थे.

निर्देशों में असंगति से बढ़ा भ्रम

माले नेता ने कहा कि ऐसे परस्पर विरोधी निर्देशों से मतदाता भ्रमित हो रहे हैं.उन्होंने आयोग से आग्रह किया कि सभी दिशा-निर्देशों को स्पष्ट रूप से अधिसूचित किया जाए और समाचार पत्रों तथा अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए.

7% पर अटका पुनरीक्षण, समय सीमा पर सवाल

कॉ. कुणाल ने निर्वाचन आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अब तक केवल 7 प्रतिशत मतदाताओं का ही फॉर्म भरवाया जा सका है, जबकि प्रक्रिया को शुरू हुए दस दिन से अधिक समय बीत चुका है.स गति से तो 25 जुलाई तक शत-प्रतिशत मतदाता कवरेज असंभव दिखता है.

पुरानी सूची पर चुनाव कराने की मांग

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए माले ने मांग की है कि मौजूदा पुनरीक्षण प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और आगामी चुनाव पूर्व की मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएं, जिससे लाखों-करोड़ों मतदाताओं का नाम वंचित न रह जाए.

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बीएलए फॉर्म अब तक हिंदी में नहीं

एक अन्य अहम मुद्दे की ओर इशारा करते हुए का. कुणाल ने बताया कि बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) का फॉर्म अब तक हिंदी में उपलब्ध नहीं है, जिससे ग्रामीण इलाकों में बीएलए नियुक्त करने में कठिनाइयां आ रही हैं. यह सवाल उठता है कि आयोग की मंशा क्या है – मतदाता प्रक्रिया को आसान बनाना या उलझाना?

प्रतिदिन अपडेट की भी मांग

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए माले ने यह भी मांग की है कि चुनाव आयोग प्रतिदिन यह जानकारी सार्वजनिक करे कि कितने मतदाताओं ने फॉर्म भरे हैं. इससे न केवल प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि जनता का भरोसा भी बहाल होगा.

इस बीच, चुनाव आयोग की ओर से इन मुद्दों पर अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.राज्य में मतदाता सूची की मौजूदा स्थिति पर राजनीतिक बहस तेज होती जा रही है.

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