पटना में राजद प्रतिनिधिमंडल की डीजीपी से मुलाकात: गायघाट हत्याकांड में न्याय की मांग तेज

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Ajit Kumar

बिहार
पटना में राजद नेताओं का प्रतिनिधिमंडल DGP से मुलाकात करते हुए

गायघाट हत्याकांड: राजद ने डीजीपी से मिलकर उठाई न्याय की मांग

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 16 अप्रैल 2026: बिहार की सियासत में एक बार फिर कानून-व्यवस्था का मुद्दा गरमा गया है.मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनियां गांव में कथित तौर पर थानेदार द्वारा जगतवीर राय की हत्या के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में गंभीर चिंता पैदा कर दी है. इस घटना को लेकर बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पुलिस महानिदेशक (DGP) से मिला और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाई.

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प्रतिनिधिमंडल ने उठाई न्याय की मांग

राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल के नेतृत्व में छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार से मुलाकात किया .इस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे, जिनमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, राष्ट्रीय महासचिव अलख निरंजन उर्फ बीनू यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. तनवीर हसन, प्रदेश प्रधान महासचिव रणविजय साहू, पूर्व विधायक निरंजन राय और जिलाध्यक्ष रमेश गुप्ता शामिल रहे।

मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी डीजीपी को दी और इस मामले में निष्पक्ष जांच एवं दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है. नेताओं ने कहा कि यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है.

तेजस्वी यादव के पत्र का भी किया गया उल्लेख

प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव द्वारा 25 मार्च 2026 को घटना स्थल के दौरे के बाद पुलिस महानिदेशक को लिखे गए पत्र का भी हवाला दिया. इस पत्र में घटना से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा की गई थीं, जिन्हें प्रतिनिधिमंडल ने दोहराते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है.

राजद नेताओं का कहना था कि पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है और ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे.

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डीजीपी ने दिया न्याय का भरोसा

पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है.उन्होंने पुष्टि की कि नेता प्रतिपक्ष का पत्र उन्हें प्राप्त हुआ है और उस पर कार्रवाई भी की जा रही है.

डीजीपी ने बताया कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने संबंधित थानेदार के हथियार की जांच की है और आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जा चुका है.उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.

जांच प्रक्रिया पर बनी निगाह

डीजीपी ने स्पष्ट किया कि इस मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और पुलिस की प्राथमिकता पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है. उन्होंने यह भी कहा कि अनुसंधान जारी है और जैसे ही सभी साक्ष्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है.इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की भूमिका और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है.

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राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

गायघाट हत्याकांड का असर अब केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है. राजद समेत विपक्षी दल इसे सरकार की विफलता के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह इस मामले में त्वरित और ठोस कार्रवाई क.

स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिस पर ही ऐसे आरोप लगेंगे, तो आम जनता किस पर भरोसा करेगी.

निष्कर्ष: न्याय की उम्मीद और प्रशासन की परीक्षा

गायघाट के चोरनियां गांव में हुई इस दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं. यह मामला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की लड़ाई है, बल्कि यह राज्य की कानून-व्यवस्था और शासन की विश्वसनीयता की भी परीक्षा है.

आने वाले दिनों में जांच की दिशा और प्रशासनिक कदम यह तय करेंगे कि पीड़ित परिवार को कितनी जल्दी और कितना न्याय मिल पाता है.फिलहाल, राजद और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह सक्रिय हैं और सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं.

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