राघोपुर हॉस्टल में छात्रा की संदिग्ध मौत, जांच की मांग तेज
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना / औरंगाबाद 14 अप्रैल 2026 : घटना का पूरा मामला क्या है? बिहार के औरंगाबाद जिले के ओबरा प्रखंड के मलवा (डीहुरी) गांव की एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है. मृतका राघोपुर (बिहटा) स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंजीनियरिंग कॉलेज की तृतीय वर्ष की छात्रा थी और एक निजी हॉस्टल (किराये के कमरे) में रहकर पढ़ाई कर रही थी.
यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है.
कैसे सामने आया मामला?
परिजनों के अनुसार, 12 अप्रैल की रात छात्रा की मां ने कई बार फोन किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका. अगले दिन 13 अप्रैल को जब परिजनों ने रिश्तेदार को मौके पर भेजा, तो कमरे के बाहर ताला बंद मिला. स्थानीय लोगों ने भी बताया कि सुबह से ही कमरा बंद था.पुलिस को सूचना देने के बाद ताला तोड़ा गया, जहां छात्रा का शव अंदर पाया गया.
हत्या की आशंका क्यों?
मृतका के शरीर पर गर्दन, हाथ और पैर में कटे के निशान पाए गए हैं. इन परिस्थितियों को देखते हुए यह मामला आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आपराधिक घटना प्रतीत हो रहा है.घटना के बाद इलाके में आक्रोश और डर का माहौल है.
पुलिस की भूमिका पर सवाल
सबसे गंभीर आरोप पुलिस की कार्यप्रणाली पर लगा हैं.बताया जा रहा है कि पुलिस ने बिना परिजनों के आवेदन के ही जल्दबाजी में शव को पोस्टमार्टम के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) भेज दिया. परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई, जिससे संदेह और गहरा हो गया है.
जांच टीम का दौरा
माले के पूर्व विधायक रामबली सिंह यादव के नेतृत्व में एक जांच टीम ने घटनास्थल का दौरा किया.14 अप्रैल को पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान उनके दर्द और आक्रोश साफ झलक रहा था . परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है.
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मुख्य मांगें
पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठनों ने सरकार से निम्नलिखित मांगें रखी हैं,
इस घटना की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए.
दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए.
अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए.
पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सुरक्षा मिले.
छात्राओं की सुरक्षा के लिए राज्य स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं.
पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो.
बिहार में सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह घटना बिहार में बढ़ते अपराध और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता को उजागर करती है. खासकर छात्राओं के लिए सुरक्षित आवास और निगरानी व्यवस्था की कमी एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आई है.
निष्कर्ष
ओबरा की छात्रा की संदिग्ध मौत केवल एक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की कई खामियों को उजागर करने वाला मामला है. जब तक इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक न्याय अधूरा रहेगा. सरकार और प्रशासन के लिए यह एक परीक्षा की घड़ी है,जहां त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई ही जनता का भरोसा कायम रख सकती है.

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