160 दिन जेल में रहकर चलाई सरकार, अब क्यों डूब रही दिल्ली?
तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली, 25 अगस्त 2025 —दिल्ली के पूर्ब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को एक्स (पहले ट्विटर) पर एक भावुक लेकिन तीखा संदेश साझा करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली की मौजूदा हालात पर गंभीर सवाल उठाया है. केजरीवाल ने लिखा कि जब उन्हें एक,राजनीतिक साज़िश के तहत जेल भेजा गया था. तब भी उन्होंने 160 दिनों तक जेल से सरकार चलाई थी.और उस दौरान दिल्ली की बुनियादी सुविधाएं सुचारु रूप से चलती रहीं.
केजरीवाल का यह बयान उस समय आया है जब दिल्लीवासी मानसून की पहली ही बारिश में जलभराव, ट्रैफिक जाम और बिजली कटौती जैसी समस्याओं से जूझ रहा हैं.
उन्होंने कहा कि,आज लोग जेल वाली सरकार को याद कर रहे हैं.क्योंकि तब दिल्ली में न बिजली जाती थी, न पानी रुकता था. मोहल्ला क्लिनिक में मुफ्त इलाज और दवाइयाँ मिलती थीं.
बीजेपी की सरकार ने किया दिल्ली का बंटाधार
केजरीवाल ने बिना नाम लिए भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बीते सात महीनों में दिल्ली को जिस तरह चलाया गया है.उससे जनता परेशान हो गई है. उन्होंने सवाल उठाया है कि जब जेल में रहकर भी एक मुख्यमंत्री बुनियादी सेवाएं बहाल रख सकता है. तो आज प्रशासन क्यों फेल हो रहा है?
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जनता की नाराजगी भी आई सामने
सोशल मीडिया पर भी दिल्लीवासियों ने हालात पर नाराज़गी जताया है.कई लोगों ने कहा कि कम से कम जेल में रहते हुए केजरीवाल ने तो दिल्ली संभाल लिया था.अब बाहर रहकर क्या हो रहा है?
राजनीति गरमाई, चुनावी माहौल में हलचल
केजरीवाल के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है. विपक्ष भी इन मुद्दों को लेकर हमलावर हो सकता है, वहीं आम आदमी पार्टी इसे अपने पक्ष में भुनाने की रणनीति पर काम कर रही है.
निष्कर्ष
अरविंद केजरीवाल का यह बयान न सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी है. बल्कि यह दिल्ली की मौजूदा हालत पर जनता की बढ़ती नाराज़गी को भी उजागर करता है.जब जेल में रहकर भी प्रशासन सुचारु रूप से चल सकता है.तो आज सिस्टम क्यों चरमराया हुआ है — यह सवाल अब आम दिल्लीवासी भी पूछ रहे हैं.
बारिश, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी ज़रूरतों पर ध्यान न देने वाली मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ लोगों का भरोसा डगमगाता दिख रहा है. ऐसे में केजरीवाल की जेल वाली सरकार की तुलना मौजूदा शासन से एक बड़ी राजनीतिक बहस की शुरुआत कर सकता है.जो आने वाले चुनावी माहौल को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है.
मेरा नाम रंजीत कुमार है और मैं समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर (एम.ए.) हूँ. मैं महत्वपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर गहन एवं विचारोत्तेजक लेखन में रुचि रखता हूँ। समाज में व्याप्त जटिल विषयों को सरल, शोध-आधारित तथा पठनीय शैली में प्रस्तुत करना मेरा मुख्य उद्देश्य है.
लेखन के अलावा, मूझे अकादमिक शोध पढ़ने, सामुदायिक संवाद में भाग लेने तथा समसामयिक सामाजिक-राजनीतिक घटनाक्रमों पर चर्चा करने में गहरी दिलचस्पी है.



















