ठेकेदारी वसूली के लिए हुई हत्या: बिहार में आम आदमी की सुरक्षा खतरे में
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 20 सितंबर 2025—बिहार में सुशासन के दावे केवल घोषणाओं और बैनरों तक सीमित रह गए हैं.वास्तविकता यह है कि ठेकेदार, रंगदार और स्थानीय अपराधी राज्य में आतंक का माहौल बना रहे हैं. और आम आदमी अपने जीवन और संपत्ति की सुरक्षा को लेकर लगातार डर में जी रहा है.बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एजाज अहमद ने जहानाबाद जिले के काको थाना क्षेत्र में मो मोहसिन आलम की हत्या को लेकर राज्य में बढ़ते अपराध और प्रशासनिक उदासीनता पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
मो मोहसिन की हत्या: ठेकेदारी वसूली के लिए बर्बर कत्लेआम
एजाज अहमद ने बताया कि काको बाजार में सब्जी विक्रेता मो मोहसिन आलम की हत्या केवल ₹5 कम देने के कारण की गई. यह घटना केवल एक वार का मामला नहीं है, बल्कि बिहार में ठेकेदार और रंगदारों के बढ़ते आतंक का प्रतीक है. एजाज ने सवाल उठाया कि सुशासन के दावे और ठेकेदारी वसूली का यह अराजक शासन कैसे चल रहा है, और राज्य सरकार इस पर गंभीर कदम क्यों नहीं उठा रही है.
दलित और अल्पसंख्यक समुदाय असुरक्षित
एजाज के अनुसार, बिहार में दलित, अतिपिछड़ा, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज के लोग सबसे अधिक खतरे में हैं. हाल के दिनों में ऐसे लोगों पर रंगदारों और अपराधियों का अत्याचार तेजी से बढ़ा है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकार की विफलता और प्रशासन की चुप्पी का परिणाम है.आम आदमी अब अपने ही राज्य में असुरक्षित महसूस कर रहा है.
पुलिसिया दमन और प्रशासन की उदासीनता
एजाज ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाया है.उन्होंने वैशाली के राजापाकर में नासिर शाह की पुलिस पिटाई से हुई मौत का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रशासन इस तरह के मामलों में पूरी तरह सुस्त है.दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में कोताही बरती जा रही है, जिससे आम जनता में न्याय और सुरक्षा को लेकर गहरी निराशा है.
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अपराधियों का बोलबाला, शासन-प्रशासन पस्त
एजाज ने चेतावनी दी कि बिहार में अपराधियों का मनोबल उच्च है, जबकि शासन-प्रशासन और सत्ता में बैठे नेता केवल अपनी मलाई काटने में व्यस्त हैं.आम और खास लोग दोनों ही अब असुरक्षित हैं. उनका कहना था कि इस तरह के कृत्य राज्य में सरकार की असली स्थिति को उजागर करते हैं—यह सरकार नाम की केवल छवि बनकर रह गई है.
जनता के लिए चेतावनी और सरकार के लिए चुनौती
राजद प्रवक्ता ने कहा कि राज्य में बढ़ते अपराध और रंगदारी की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार तुरंत ठोस कदम उठाए.उन्होंने जनता से भी अपील किया कि वे जागरूक रहें और अपनी सुरक्षा के लिए आवाज उठाएं। बिहार में सुशासन के ढोंग को उजागर करना अब समय की आवश्यकता है.यदि सरकार ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो अपराध और अराजकता का माहौल और गंभीर रूप ले सकता है.
निष्कर्ष
बिहार में सुशासन केवल नाम और बैनरों तक सीमित है.ठेकेदार और रंगदार अब राज्य के हर हिस्से में आतंक फैला रहे हैं.आम जनता असुरक्षित है, प्रशासन सुस्त है, और सत्ता में बैठे नेता केवल अपने फायदे में लगे हैं.मो मोहसिन की हत्या जैसे मामले सरकार की विफलता का प्रतीक हैं. यह ब्लॉग एक चेतावनी है कि बिहार में अपराध और रंगदारी की यह भयावह स्थिति अब केवल नजरअंदाज नहीं की जा सकती.

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