क्या कहती है कांग्रेस की सोशल मीडिया रणनीति?
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,29 नवंबर 2025 कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक X (Twitter) हैंडल @INCIndia के माध्यम से यह गंभीर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आर्थिक असमानता खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है.पार्टी का कहना है कि पिछले एक दशक में अमीर और गरीब के बीच की खाई इतनी गहरी हो चुकी है कि आम लोगों के जीवन पर इसका सीधा प्रभाव देखा जा सकता है.
यह मुद्दा सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना के भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है.
Economic Inequality in India: मुद्दा क्यों उठ रहा है?
कांग्रेस के अनुसार देश में आर्थिक असमानता की स्थिति लगातार बिगड़ी है.
कुछ बड़े कॉरपोरेट समूहों की संपत्ति में तेज़ी से इज़ाफ़ा हुआ
वहीं मध्यम वर्ग, मजदूर, किसान और छोटे व्यापारियों की आय स्थिर रही या घटी
नौकरी के अवसर सीमित हुए
महंगाई और टैक्स का बोझ आम लोगों पर बढ़ा
विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि आय का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा कंपनियों और उद्योगपतियों के हाथों में सिमटता जाता है तो देश का आर्थिक संतुलन बिगड़ जाता है.कांग्रेस का यही दावा है कि मोदी सरकार की नीतियों ने इस असंतुलन को और तेज़ किया है.
कांग्रेस के मुख्य आरोप: किन नीतियों से बढ़ी खाई?
कॉरपोरेट–फ़्रेंडली आर्थिक फैसले
कांग्रेस का कहना है कि केंद्र सरकार ने अपनी नीतियों और टैक्स स्ट्रक्चर में ऐसे बदलाव किए हैं जो मुख्य रूप से बड़े कॉरपोरेट्स को लाभ पहुंचाते हैं.
कॉरपोरेट टैक्स की बड़ी कटौती
रणनीतिक क्षेत्रों के निजीकरण की गति
सरकारी संपत्तियों का विनिवेश
ये सभी फैसले सामान्य वर्ग की तुलना में उद्योगपतियों को अधिक फायदे देते हैं.
रोजगार सृजन में गिरावट
जहां GDP वृद्धि के सरकारी आंकड़े बताए जाते हैं, वहीं कांग्रेस का दावा है कि ग्राउंड लेवल पर रोजगार के अवसर घटे हैं.
स्वरोज़गार कमज़ोर
स्किल्ड और अनस्किल्ड नौकरियों में गिरावट
youth unemployment दर में बढ़ोतरी
जब रोजगार नहीं बढ़ता, तो गरीब वर्ग अपनी आर्थिक स्थिति सुधार नहीं पाता.
महंगाई और टैक्स का बढ़ता बोझ
खाद्य पदार्थों, ईंधन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है.
कांग्रेस का कहना है कि GST और अन्य अप्रत्यक्ष करों की मार भी आम जनता पर ज्यादा पड़ती है, जबकि बड़े कॉरपोरेट्स पर इसका प्रभाव न्यूनतम होता है.
किसान और छोटे व्यापारियों की स्थिति
MSP को कानूनी गारंटी नहीं
खेती की लागत बढ़ती जा रही है
छोटे दुकानदार और व्यापारी ऑनलाइन बड़े प्लेयर्स की वजह से नुकसान में
कांग्रेस के अनुसार, इन स्थितियों ने ग्रामीण और छोटे व्यापारिक समुदायों की आर्थिक स्थिरता को कमजोर किया.
क्या कहती है कांग्रेस की सोशल मीडिया रणनीति?
@INCIndia का यह पोस्ट राजनीतिक गलियारे में चर्चा का विषय बना, क्योंकि इसने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने देश में अमीरों और गरीबों के बीच की खाई बढ़ा दी.
पार्टी की यह सोशल मीडिया रणनीति दो मकसद साधती दिखती है.
आर्थिक असमानता को एक राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाना
सरकार पर दबाव बनाना कि वह आम जनता की ओर झुके हुए फैसले करे
कांग्रेस की यह कोशिश आर्थिक मुद्दों को राजनीतिक विमर्श में फिर से मजबूती से स्थापित करने का संकेत देती है.
आर्थिक असमानता: समाज पर क्या प्रभाव?
- सामाजिक तनाव में वृद्धि
जब आय असमानता बहुत ज़्यादा होती है, तो समाज में असुरक्षा और असंतोष बढ़ता है.
- उपभोग क्षमता में गिरावट
गरीब वर्ग की क्रय शक्ति घटती है, जिससे बाजार में मांग कम होती है और आर्थिक गतिविधि धीमी पड़ती है.
- लोकतांत्रिक मूल्यों पर असर
यदि आर्थिक संसाधन कुछ ही हाथों में केंद्रित हों, तो राजनीतिक निर्णय भी उसी दिशा में प्रभावित होने का खतरा बढ़ता है.
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क्या समाधान सुझाती है कांग्रेस?
हालांकि कांग्रेस का पोस्ट मुख्यतः आरोपों पर केंद्रित था, लेकिन पार्टी कई बार अपने बयानों में समाधान भी रख चुकी है.
गरीब और मध्यम वर्ग को केंद्र में रखकर बजट बनाना
बेरोजगारी कम करने के लिए सरकारी भर्ती बढ़ाना
छोटे व्यवसायों के लिए आसान लोन और कम ब्याज
किसान नीतियों में सुधार
सामाजिक कल्याण योजनाओं का विस्तार
कांग्रेस का कहना है कि इन कदमों के ज़रिए आर्थिक असमानता को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
निष्कर्ष
कांग्रेस का यह आरोप कि नरेंद्र मोदी ने अमीरों और गरीबों के बीच की खाई बढ़ा दी भारतीय राजनीति में एक अहम विमर्श को जीवित करता है.आर्थिक असमानता सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता से भी जुड़ा हुआ विषय है.
क्या सरकार इस आरोपों का जवाब देती है या अपनी नीतियों में बदलाव करती है — यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी.लेकिन इतना साफ़ है कि देश में आर्थिक असमानता पर बहस अब और तेज़ होगी, और आम जनता इस बहस के केंद्र में रहेगी.

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