किया प्रिंसिपल ऑफिस का घेराव, 15 दिनों का अल्टीमेटम जारी
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 6 दिसंबर 2025 — पटना विश्वविद्यालय का प्रतिष्ठित पटना कॉलेज एक बार फिर बुनियादी सुविधाओं के संकट को लेकर चर्चा में है. छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के बैनर तले सैकड़ों छात्रों ने आज कॉलेज परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया है. पाँच सूत्री मांगों को लेकर छात्रों ने भाषा भवन से प्रिंसिपल ऑफिस तक मार्च निकाला और उसके बाद प्राचार्य कार्यालय का घेराव किया.छात्रों का कहना है कि पिछले कई महीनों से लगातार ज्ञापन देने के बावजूद कॉलेज प्रशासन ने उनकी समस्याओं पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है.

AISA का पाँच सूत्री मांग-पत्र: कॉलेज की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी मांगें
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने जो माँगें सामने रखीं, वे सीधे-सीधे कॉलेज की मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी हैं.इन पाँच प्रमुख मुद्दों को लेकर छात्रों में काफी आक्रोश देखा गया.
बॉयज कॉमन रूम को तुरंत खोला जाए.
लंबे समय से बंद पड़े इस कॉमन रूम को खोलने की मांग छात्र बार-बार उठा रहे थे.
गर्ल्स कॉमन रूम की साफ-सफाई और नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए,
छात्राओं ने कहा कि कॉमन रूम की स्थिति बेहद खराब है, जिसकी मरम्मत और सफाई अत्यंत जरूरी है.
पत्रकारिता विभाग की लाइब्रेरी और कंप्यूटर सेक्शन को ठीक किया जाए.
पत्रकारिता के छात्रों ने बताया कि विभाग की अवसंरचना जर्जर अवस्था में है और लाइब्रेरी में संसाधनों की भारी कमी है.
कॉलेज ग्राउंड की सफाई और नियमित देखभाल हो.
कॉलेज का खेल मैदान खस्ताहाल है, जिससे शैक्षणिक एवं खेल-संबंधी गतिविधियाँ प्रभावित हो रही हैं.
अन्य बुनियादी सुविधाएँ—पेयजल, साफ शौचालय, पर्याप्त पुस्तकें— तुरंत उपलब्ध कराई जाएं.
छात्रों ने कहा कि ये मांगें कॉलेज की शिक्षा व्यवस्था को सुचारू करने के लिए अनिवार्य हैं और इन पर कार्रवाई में देरी किसी भी रूप में स्वीकार नहीं होगी.

प्राचार्य से मुलाकात, ज्ञापन सौंपा—फिर भी छात्रों में गहरी नाराजगी
प्रदर्शन कर रहे छात्रों से पटना कॉलेज के प्राचार्य ने मुलाकात किया और उनका ज्ञापन स्वीकार किया. लेकिन छात्रों का साफ कहना है कि प्रशासन को पहले भी कई बार ज्ञापन दिया गया था, फिर भी समस्याओं में कोई सुधार नहीं हुआ.
AISA नेत्री अदिति सिंह और छात्रसंघ काउंसलर सबा ने कहा है कि,
हम महीनों से प्रशासन को अपनी समस्याएँ बता रहे हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिलता रहा है. पेयजल की व्यवस्था खराब है, विभागों में किताबों की कमी है और कंप्यूटर सेक्शन बंद पड़े हैं. यह हालत बिहार के सबसे पुराने कॉलेजों में से एक के लिए शर्मनाक है.
पत्रकारिता विभाग के छात्र आदर्श गुप्ता ने कहा कि लाइब्रेरी में किताबें बेहद कम हैं. कई महत्वपूर्ण किताबें कॉलेज में उपलब्ध ही नहीं हैं, जिससे पढ़ाई में दिक्कत होती है. लेकिन कॉलेज प्रशासन ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया.
AISA का 15 दिनों का अल्टीमेटम—नहीं सुधरी व्यवस्था तो होगा बड़ा आंदोलन
AISA राज्य सह सचिव कुमार दिव्यम और युवा नेता आशीष राज ने कहा कि कॉलेज प्रशासन को उनकी पाँच सूत्री मांगों को लागू करने के लिए 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है.
दिव्यम ने कहा है कि,
अगर 15 दिनों के भीतर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो AISA कॉलेज बंदी और बड़े आंदोलन की ओर बढ़ेगा। इस बार छात्र चुप नहीं बैठेंगे.
छात्रों का कहना है कि पटना विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का अभाव लगातार बढ़ता जा रहा है. पेयजल, टॉयलेट, साफ-सफाई, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, लगभग हर विभाग में संसाधन कम हैं.
आज के घेराव में कई छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रीति पासवान, ऋषि कुमार, सोनाक्षी कुमारी, मोनू कुमार, इरफान, आदित्य, मुस्कान सहित कई छात्र मौजूद थे.
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पटना कॉलेज की सच्चाई—इतिहास महान, वर्तमान उपेक्षा का शिकार
पटना कॉलेज भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कॉलेज की अवसंरचना और सुविधाओं में गिरावट छात्रों की नाराजगी का कारण बन रही है.
कॉमन रूम लंबे समय से बंद
शौचालय और पेयजल व्यवस्था खराब
लाइब्रेरी में आधुनिक किताबों की कमी
खेल मैदान की उपेक्षा
पत्रकारिता विभाग में तकनीकी संसाधनों की अनुपलब्धता
इन समस्याओं ने छात्रों को मजबूर कर दिया है कि वे आंदोलन का रास्ता चुनें.
निष्कर्ष: क्या पटना कॉलेज प्रशासन करेगा त्वरित कार्रवाई?
AISA के इस आक्रामक घेराव ने कॉलेज प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है. 15 दिनों के अल्टीमेटम के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि प्राचार्य और पटना विश्वविद्यालय की ओर से कितनी जल्दी और कितनी गंभीरता से कार्रवाई की जाती है.
यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में पटना कॉलेज परिसर में और बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है. छात्रों का कहना है कि वे बुनियादी अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं और इस बार पीछे हटने वाले नहीं हैं.

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