कांग्रेस का हमला: RSS–BJP पर चुप्पी की राजनीति का आरोप
तीसरा पक्ष ब्यूरो दिल्ली,24 दिसंबर — भारतीय राजनीति में नैतिकता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों की चर्चा अक्सर चुनावी मौसम तक सीमित रह जाती है. लेकिन जब सत्ता में बैठे लोगों पर गंभीर आरोप लगते हैं, तब असली परीक्षा होती है. कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक X (Twitter) हैंडल @INCIndia के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा और गंभीर आरोप लगाया है. कांग्रेस का कहना है कि RSS ने BJP को एक ऐसा संस्कार दिया है, जिसमें कितने भी बड़े आरोप लग जाएं, लेकिन न तो जवाब देना है और न ही नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना है.
कांग्रेस का आरोप: मुंह पर ताला, सत्ता से चिपके रहना
कांग्रेस के अनुसार, BJP की राजनीति में जवाबदेही की जगह चुप्पी ने ले ली है. पार्टी का कहना है कि RSS–BJP की कार्यशैली में यह स्पष्ट रूप से दिखता है कि जब भी किसी मुख्यमंत्री या बड़े नेता पर आरोप लगता हैं, तो पार्टी का पहला कदम सफाई देना नहीं, बल्कि चुप्पी साध लेना होता है.
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह चुप्पी कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति है.
मध्य प्रदेश और राजस्थान का उदाहरण
कांग्रेस ने खास तौर पर मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों का जिक्र करते हुए कहा कि ये दोनों राज्य इस RSS संस्कार के ताजा उदाहरण हैं.
कांग्रेस का दावा है कि इन राज्यों में सत्ता से जुड़े मामलों, प्रशासनिक फैसलों और कथित घोटालों पर गंभीर सवाल उठा , लेकिन न तो मुख्यमंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी ली और न ही इस्तीफे पर विचार किया.
कांग्रेस के अनुसार, लोकतंत्र में मुख्यमंत्री केवल सत्ता का प्रतिनिधि नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेह पद होता है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब आरोप गंभीर हों, तो क्या नैतिक आधार पर पद छोड़ देना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा नहीं होना चाहिए?
नैतिकता बनाम सत्ता की राजनीति
कांग्रेस का कहना है कि भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी नैतिक परंपराएं रही हैं. इतिहास गवाह है कि पहले के दौर में नेता केवल आरोप लगने पर ही इस्तीफा दे देते थे, ताकि जांच निष्पक्ष हो सके.
लेकिन आज की BJP राजनीति में, कांग्रेस के अनुसार, नैतिकता को कमजोरी और सत्ता से चिपके रहना राजनीतिक ताकत समझा जाने लगा है.
RSS की भूमिका पर सवाल
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर RSS की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. पार्टी का कहना है कि RSS केवल एक सांस्कृतिक संगठन होने का दावा करता है, लेकिन व्यवहार में वह BJP की राजनीतिक दिशा तय करता है.
कांग्रेस के मुताबिक, RSS का यह संस्कार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, क्योंकि यह नेताओं को जवाबदेही से बचने की मानसिकता देता है.
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जनता के लिए खतरे की घंटी
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर सत्ता में बैठे लोग सवालों से भागते रहेंगे, तो इसका सीधा नुकसान जनता को होगा.
जब सरकारें जवाब नहीं देतीं, तब,
प्रशासनिक पारदर्शिता खत्म होती है.
भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है.
लोकतंत्र कमजोर होता है.
कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र का सवाल है.
कांग्रेस की मांग, कांग्रेस ने साफ कहा है कि,
आरोपों का सामना करना चाहिए
निष्पक्ष जांच में सहयोग करना चाहिए
और नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए
पार्टी का मानना है कि सत्ता में बने रहकर जांच को प्रभावित करने की आशंका हमेशा बनी रहती है, इसलिए नैतिक इस्तीफा लोकतंत्र की आत्मा है.
राजनीतिक बहस और आने वाला समय
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण अपने चरम पर है. कांग्रेस का यह हमला BJP और RSS की राजनीति पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है.आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि,
BJP इन आरोपों पर चुप्पी तोड़ेगी या नहीं, क्या मुख्यमंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेंगे, और क्या जनता इन सवालों को गंभीरता से लेगी
निष्कर्ष
कांग्रेस द्वारा उठाया गया यह मुद्दा केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं है, बल्कि लोकतंत्र, नैतिकता और जवाबदेही से जुड़ा एक बड़ा सवाल है.
अगर सत्ता में बैठे लोग सवालों से बचते रहेंगे, तो लोकतंत्र कमजोर होगा। और अगर जनता सवाल पूछती रहेगी, तभी लोकतंत्र मजबूत रहेगा.
कांग्रेस का यह बयान एक बार फिर याद दिलाता है कि लोकतंत्र में चुप्पी नहीं, जवाब जरूरी है.

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