हवा और पानी में ज़हर: देश किस दिशा में जा रहा है?
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,8 जनवरी देश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लंबे शासन को सरकार द्वारा अमृतकाल कहा जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इस दावे से उलट तस्वीर पेश कर रहा है. कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर BJP सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस के आधिकारिक X (Twitter) हैंडल और AICC मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा के बयान के अनुसार, आज देश में हवा, पानी, दवा, कफ सिरप और खाद्य पदार्थ तक सुरक्षित नहीं रह गया हैं.सवाल यह है कि अगर जीवन की मूलभूत जरूरतों में ही ज़हर घुला हो, तो इसे अमृतकाल कैसे कहा जा सकता है?
हवा और पानी: जीवनदायिनी नहीं, बीमारी की वजह
पवन खेड़ा द्वारा साझा किया गया जानकारी के अनुसार, International Centre for Sustainability की रिपोर्ट बताती है कि भारत का लगभग 70% पानी दूषित हो चुका है. यह आंकड़ा अपने आप में भयावह है. स्वच्छ पानी हर नागरिक का मूल अधिकार है, लेकिन नदियों, तालाबों और भूजल में बढ़ते प्रदूषण ने इस अधिकार को छीन लिया है.
हवा की स्थिति भी इससे अलग नहीं है. बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है.बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है. इसके बावजूद सरकार गंभीर नीतिगत सुधारों के बजाय आंकड़ों और प्रचार में उलझा हुआ नजर आती है.
दवा और कफ सिरप में ज़हर: बच्चों की जान पर खतरा
पिछले कुछ वर्षों में दवाओं, खासकर कफ सिरप को लेकर कई चौंकाने वाले मामले सामने आया हैं. घटिया गुणवत्ता और जहरीले तत्वों के कारण बच्चों की मौत तक की खबरें आईं. कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी लापरवाही और कमजोर निगरानी तंत्र इसकी सबसे बड़ी वजह है.
जब जीवन रक्षक दवाएं ही जानलेवा बन जाये , तो यह सीधे-सीधे शासन की विफलता को दर्शाता है. सवाल यह है कि क्या मुनाफाखोरी और लापरवाह नियमन की कीमत देश के मासूम बच्चों को चुकानी पड़ेगी?
खाद्य पदार्थों में मिलावट: थाली में ज़हर
आज आम नागरिक जो भोजन कर रहा है, उसमें मिलावट की आशंका लगातार बढ़ रही है. दूध, सब्ज़ी, मसाले और पैकेज्ड फूड तक सुरक्षित नहीं हैं.मिलावट से कैंसर, पेट और लीवर से जुड़ी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं. कांग्रेस का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता आम जनता की सेहत नहीं, बल्कि कॉरपोरेट हित और राजनीतिक प्रचार बनकर रह गई है.
सवाल पूछने पर गाली? लोकतंत्र पर हमला
लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं, बल्कि अधिकार है.लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि जब पत्रकार सरकार से जवाबदेही मांगते हैं, तो BJP नेताओं की ओर से गाली-गलौज और असंवेदनशील बयान सामने आती हैं.
पवन खेड़ा के अनुसार, यह दर्शाता है कि मौजूदा सरकार को सवालों की आदत ही नहीं है. स्वस्थ लोकतंत्र में आलोचना को सुना जाता है, लेकिन यहां उसे दबाने की कोशिश की जा रही है.
ये भी पढ़े :VB-G RAM योजना पर टीका राम जुल्ली ने उठाए गंभीर सवाल
ये भी पढ़े :अपना–पराया का खेल: देश को कौन बाँट रहा है और क्यों?
मध्य प्रदेश का उदाहरण: जवाबदेही से बचाव
मध्य प्रदेश, जहां पिछले कई वर्षों से BJP की सरकार है, वहां हालात और भी चिंताजनक बताया जा रहा है.कांग्रेस के आरोपों के मुताबिक,
कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेता गाली देकर विवाद खड़ा करते हैं.
मुख्यमंत्री मोहन यादव गंभीर मुद्दों पर गाना गाते नजर आते हैं.
इन सबके बीच प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा आम जनता, खासकर बच्चे, भुगत रहे हैं. स्वास्थ्य, पोषण और पर्यावरण जैसे मुद्दे हाशिए पर चला गया है.
असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति
कांग्रेस का आरोप है कि BJP सरकार जनता को भावनात्मक और फिजूल के मुद्दों में उलझाए रखती है, ताकि हवा-पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और महंगाई जैसे असली सवालों पर चर्चा न हो सके.अमृतकाल का नारा तभी सार्थक हो सकता है, जब नागरिक सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जी सकें.
निष्कर्ष
पवन खेड़ा के X पोस्ट के हवाले से कांग्रेस ने जो सवाल उठाया हैं, वे सिर्फ राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा हैं. अगर हवा, पानी, दवा और भोजन तक सुरक्षित नहीं हैं, तो किसी भी सरकार को आत्ममंथन करना चाहिये .
सच्चा अमृतकाल वही होगा, जहां, नागरिकों को शुद्ध हवा और पानी मिले, बच्चों को सुरक्षित दवाएं मिलें, भोजन में ज़हर नहीं, पोषण हो और सवाल पूछने वालों को गाली नहीं, जवाब मिले.
अब फैसला जनता को करना है कि वह प्रचार के अमृत को चुनेगी या सच्चाई के कड़वे सवालों को.

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.



















