विकसित भारत-जी राम जी कानून पर सियासत तेज

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Ajit Kumar

बिहारभारत
विकसित भारत-जी राम जी कानून पर सियासत तेज

राम जी नाम से क्यों चिढ़ा विपक्ष? एनडीए का हमला

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,7 जनवरी — बिहार की राजनीति में इन दिनों ‘विकसित भारत-जी राम जी कानून’ को लेकर गहन चर्चा चल रही है.एनडीए की संयुक्त प्रेस वार्ता में भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो के नेताओं ने इस कानून को ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा सुधार बताया है.वहीं विपक्ष द्वारा किए जा रहे विरोध को एनडीए नेताओं ने भ्रामक, राजनीति से प्रेरित और तथ्यहीन करार दिया है.

महात्मा गांधी की भावना और राम राज्य की परिकल्पना

महात्मा गांधी की भावना और राम राज्य की परिकल्पना

बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकसित भारत-जी राम जी कानून पूरी तरह महात्मा गांधी की ग्राम स्वराज की अवधारणा और राम राज्य की भावना के अनुरूप है.उन्होंने कहा कि जब तक गाँव विकसित नहीं होंगे, तब तक देश और राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है.
एनडीए का लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है और यह कानून उसी दीर्घकालिक सोच का हिस्सा है.

रोजगार गारंटी में बड़ा सुधार

इस नए कानून के तहत रोजगार व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत किया गया है.जहाँ पहले मनरेगा में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 125 दिनों कर दिया गया है.इसके साथ ही, यदि किसी कारणवश रोजगार उपलब्ध नहीं हो पाता है, तो भत्ता देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है.
सबसे अहम बदलाव यह है कि अब मजदूरों को साप्ताहिक भुगतान सुनिश्चित किया गया है, जिससे महीनों तक मजदूरी के इंतजार की समस्या खत्म होगी.

पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर प्रहार

एनडीए नेताओं ने मनरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा. संजय सरावगी ने कहा कि मनरेगा लंबे समय तक भ्रष्टाचार का अड्डा बना रहा, जहाँ योजनाओं की राशि का दुरुपयोग हुआ है.
विकसित भारत-जी राम जी कानून में यह सुनिश्चित किया गया है कि योजना की राशि उपयोगी और पारदर्शी तरीके से खर्च हो.प्रशासनिक व्यय को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है, ताकि निगरानी और क्रियान्वयन ढांचा मजबूत हो सके.

पंचायतों को सशक्त बनाने की पहल

इस कानून का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पंचायतों को सशक्त बनाना है.अब ग्राम सभा अपने गाँव के विकास से जुड़े कार्य स्वयं तय करेगी और उन्हें लागू करेगी.
जल संरक्षण, बुनियादी ढाँचा, आजीविका, ग्रामीण सड़क, तालाब, सिंचाई और सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.इसका लक्ष्य है
गरीबी मुक्त, रोजगार युक्त, आत्मनिर्भर और स्वयं पूर्ण गाँव.।

विपक्ष के विरोध पर एनडीए का पलटवार

संजय सरावगी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें योजनाओं से नहीं, बल्कि भगवान श्री राम के नाम से ही परेशानी हो रही है.
जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने भी विपक्ष के दुष्प्रचार को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह कानून रोजगार बढ़ाने और मजदूरों को सम्मान देने के लिए लाया गया है. उन्होंने इसे महात्मा गांधी की सोच के अनुरूप बताया है.

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सहयोगी दलों का समर्थन

लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी ने कहा कि आज एनडीए सरकार के दौर में लाभ सीधे लाभुकों के खातों में पहुंच रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है.

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रधान महासचिव राजेश पांडेय ने कहा कि विपक्ष की आपत्ति योजना से नहीं, बल्कि उसमें राम जी’नाम जुड़ने से है.

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के महामंत्री सुभाष चंद्रवंशी ने कहा कि पारदर्शी योजनाओं से भ्रष्टाचार करने वालों को तकलीफ होना स्वाभाविक है.

2047 तक विकसित भारत की मजबूत नींव

एनडीए नेताओं का दावा है कि विकसित भारत-जी राम जी कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और गाँवों को आत्मनिर्भर बनाएगा.
यह कानून केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का रोडमैप है.

निष्कर्ष

विकसित भारत-जी राम जी कानून को लेकर उठ रहा राजनीतिक विवाद अपनी जगह है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि यह कानून ग्रामीण विकास, पारदर्शिता और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.
यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन हुआ, तो यह योजना निश्चित रूप से 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है.

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