वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ पटना में विरोध प्रदर्शन

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Ajit Kumar

बिहारदुनियाभारत
वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ पटना में विरोध प्रदर्शन

पटना विश्वविद्यालय गेट पर ट्रम्प का पुतला दहन

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,8 जनवरी 2026 को पटना विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर उस समय तीव्र विरोध देखने को मिला, जब अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का पुतला दहन किया गया. यह विरोध प्रदर्शन वेनेजुएला पर कथित अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के अपहरण के विरोध में आयोजित किया गया.प्रदर्शनकारियों ने इसे न केवल वेनेजुएला की संप्रभुता पर हमला बताया, बल्कि विश्व लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा करार दिया है .

अमेरिकी साम्राज्यवाद पर गंभीर आरोप

अमेरिकी साम्राज्यवाद पर गंभीर आरोप

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अमेरिका लंबे समय से विश्व के विभिन्न देशों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप करता रहा है.वेनेजुएला का मामला उसी नीति का ताजा उदाहरण बताया जा रहा है. आरोप है कि अमेरिका ने सैन्य बल का प्रयोग कर एक लोकतांत्रिक देश के निर्वाचित राष्ट्रपति को बंदी बनाया, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों और लोकतांत्रिक मूल्यों का खुला उल्लंघन है.

प्रदर्शन के दौरान,अमेरिकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद और वेनेजुएला पर हमला बंद करो जैसे नारे लगाए गए. वक्ताओं ने कहा कि अमेरिका खुद को लोकतंत्र का रक्षक बताता है, लेकिन उसके कदम अक्सर इसके ठीक विपरीत नजर आते हैं.

युद्ध और शांति पर दोहरा रवैया

युद्ध और शांति पर दोहरा रवैया

प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयानों पर भी सवाल उठाया .उनका कहना था कि ट्रम्प एक ओर इजराइल-फिलिस्तीन, यूक्रेन जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों में शांति की दुहाई देते हैं, वहीं दूसरी ओर वेनेजुएला जैसे लोकतांत्रिक देश में सैन्य दखल देते हैं. यह दोहरा रवैया वैश्विक राजनीति में अमेरिका की कथनी और करनी के अंतर को उजागर करता है.

लोकतंत्र, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय शांति की बातें करने वाले राष्ट्र द्वारा इस तरह की कार्रवाई विश्व समुदाय के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है.

ड्रग तस्करी के आरोप और असली कारण

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, अमेरिका ने वेनेजुएला पर ड्रग तस्करी का आरोप लगाकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल करने की कोशिश की है. उनका कहना है कि यह आरोप राजनीतिक साजिश का हिस्सा है, ताकि वेनेजुएला सरकार पर दबाव बनाया जा सके.

आरोप लगाया गया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे असली कारण वेनेजुएला का विशाल कच्चा तेल भंडार है. वेनेजुएला सरकार द्वारा तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किए जाने के बाद अमेरिका और उसकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित प्रभावित हुआ.इसी कारण संसाधनों की लूट के उद्देश्य से यह हस्तक्षेप किया गया.

संसाधनों की लूट की राजनीति

वक्ताओं ने कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट से जुड़ा हुआ है. वेनेजुएला के तेल भंडार लंबे समय से वैश्विक शक्तियों की नजर में रहा हैं. जब किसी देश की सरकार अपने संसाधनों को राष्ट्रीय हित में इस्तेमाल करने की कोशिश करती है, तो उसे दबाव, प्रतिबंध और सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ता है.

प्रदर्शनकारियों ने इसे रिसोर्स वॉर करार देते हुए कहा कि यह लड़ाई लोकतंत्र बनाम साम्राज्यवाद की है.

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भारत सरकार से की गई अपील

इस विरोध प्रदर्शन में भारत सरकार से भी स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की गई. वक्ताओं ने कहा कि भारत, जो स्वयं औपनिवेशिक शोषण का शिकार रहा है, उसे किसी भी देश के खिलाफ साम्राज्यवादी रवैये का विरोध करना चाहिये.

भारत सरकार से अपील किया गया है कि वह वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एकजुटता दिखाए और अमेरिका के कथित साम्राज्यवादी कदमों की निंदा करे. यह न केवल वेनेजुएला के लिए, बल्कि विश्व लोकतंत्र की रक्षा के लिए भी आवश्यक बताया गया.

वैश्विक लोकतंत्र के लिए चेतावनी

प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यदि इस तरह की कार्रवाइयों को रोका नहीं गया, तो भविष्य में कोई भी लोकतांत्रिक देश सुरक्षित नहीं रहेगा. एक निर्वाचित राष्ट्रपति को सैन्य बल के जरिए हटाना या बंदी बनाना अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करता है.

उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि दुनिया के सभी लोकतांत्रिक देश एकजुट होकर ऐसे हस्तक्षेपों का विरोध करें और संप्रभुता, आत्मनिर्णय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की रक्षा करें.

निष्कर्ष

पटना विश्वविद्यालय में हुआ यह विरोध प्रदर्शन केवल एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में उठ रहे गंभीर सवालों की अभिव्यक्ति है. वेनेजुएला पर कथित अमेरिकी हस्तक्षेप, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की रिहाई की मांग और संसाधनों की लूट के खिलाफ उठी आवाजें यह दर्शाती हैं कि जनता अब वैश्विक शक्तियों की नीतियों को चुपचाप स्वीकार करने को तैयार नहीं है.

यह विरोध अमेरिका के साम्राज्यवादी रवैये के खिलाफ चेतावनी है और साथ ही भारत सहित विश्व के सभी लोकतांत्रिक देशों से न्याय, शांति और संप्रभुता के पक्ष में खड़े होने की अपील भी.

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