पंकज मोदी नियुक्ति पर कांग्रेस का बड़ा हमला
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,9 जनवरी — भारतीय राजनीति में जब भी पारदर्शिता, योग्यता और नैतिकता की बात आती है, तब सत्ता से जुड़े नियुक्ति मामलों पर सवाल उठना स्वाभाविक हो जाता है. हाल ही में कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल @INCIndia के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई पंकज मोदी से जुड़ा एक गंभीर मामला उठाया है. कांग्रेस का आरोप है कि पंकज मोदी को नियमों और अनुभव को दरकिनार करते हुए सरकारी सुविधाये और पद दिया गया है, जो,नेपोटिज़्म यानी भाई-भतीजावाद की ओर इशारा करता है.
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस द्वारा साझा किया गया जानकारी के अनुसार, पंकज मोदी को Tableau फाइनल करने के लिए नियुक्त किया गया था. इस नियुक्ति से जुड़ा एक सर्कुलर भी जारी हुआ, जिसमें उन्हें मिलने वाली तमाम सरकारी सुविधाओं का उल्लेख था. कांग्रेस का कहना है कि यदि प्रधानमंत्री के परिवार से आने वाला कोई व्यक्ति वास्तव में उस क्षेत्र का विशेषज्ञ है, तो उस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिये. लेकिन इस मामले में सवाल उनकी योग्यता और अनुभव को लेकर है.
नौकरी की शुरुआत और प्रमोशन पर सवाल
कांग्रेस के मुताबिक, पंकज मोदी ने 1981 में Information Department में क्लास-3 की पोस्ट पर नौकरी ज्वाइन किया था. सामान्यतः इस कैडर से क्लास-1 अधिकारी बनना बेहद कठिन माना जाता है. पार्टी का दावा है कि पंकज मोदी के साथ काम करने वाले कई अधिकारी, जिनमें वरिष्ठ और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से आने वाले अधिकारी भी शामिल थे, वे क्लास-1 अधिकारी नहीं बन सके.
इसके बावजूद पंकज मोदी को क्लास-2 से सीधे क्लास-1 में प्रमोशन दे दिया गया है . कांग्रेस का आरोप है कि यह प्रमोशन अनुभव के बिना किया गया, जो नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.
रिटायरमेंट के बाद भी सरकारी संरक्षण?
विवाद यहीं खत्म नहीं होता है. कांग्रेस के अनुसार, पंकज मोदी के रिटायरमेंट के बाद उन्हें कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड री-अपॉइंटमेंट दिया गया. यह पद वर्षों तक भरा ही नहीं गया, और जब इस पर विरोध बढ़ा तथा अधिकारी हाईकोर्ट जाने की बात करने लगा, तब जाकर पंकज मोदी ने वह पद छोड़ा.
लेकिन इसके तुरंत बाद, कांग्रेस का आरोप है कि भारत सरकार ने उन्हें Tableau Expert बना दिया, और अब उन्हें तमाम सुविधाये दिया जा रहा है.। यही वह बिंदु है, जहां विपक्ष सरकार की मंशा पर सबसे बड़ा सवाल उठा रहा है.
ये भी पढ़े :भ्रष्टाचार की डबल इंजन सरकार: विकास नहीं, तबाही की रफ्तार
ये भी पढ़े :ED बनाम ममता: जांच एजेंसी की छापेमारी और सत्ता की खुली टकराहट
ये भी पढ़े :VB-G RAM योजना पर टीका राम जुल्ली ने उठाए गंभीर सवाल
कांग्रेस का सीधा आरोप: नेपोटिज़्म
कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने इस मामले को सार्वजनिक करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक नियुक्ति का सवाल नहीं है, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग और भाई-भतीजावाद का उदाहरण है.कांग्रेस का तर्क है कि जब देश में लाखों युवा योग्य होने के बावजूद नौकरी के लिए संघर्ष कर रहा हैं, तब सत्ता से जुड़े लोगों को विशेष सुविधाये और पद देना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है.
भाजपा की चुप्पी और राजनीतिक असर
अब तक इस पूरे मामले पर भारतीय जनता पार्टी या केंद्र सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे आरोप सरकार की, पारदर्शिता और सुशासन की छवि को नुकसान पहुंचा सकता हैं, खासकर तब जब भाजपा अक्सर विपक्ष पर नेपोटिज़्म के आरोप लगाती रही है.
लोकतंत्र और जवाबदेही का सवाल
यह मामला केवल पंकज मोदी तक सीमित नहीं है.यह सवाल उठाता है कि क्या भारत की नौकरशाही और नियुक्ति प्रक्रिया वास्तव में निष्पक्ष है? क्या सत्ता में बैठे लोगों के रिश्तेदारों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है? और यदि ऐसा है, तो इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?
लोकतंत्र में सवाल पूछना और सत्ता से जवाब मांगना विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है. कांग्रेस का कहना है कि वह इस मुद्दे को इसलिये उठा रहा है ताकि योग्यता, अनुभव और नियमों का सम्मान सुनिश्चित हो सके.
निष्कर्ष
पंकज मोदी से जुड़ा यह विवाद भारतीय राजनीति में नेपोटिज़्म और सत्ता के दुरुपयोग पर एक नई बहस छेड़ता है. जब सरकार, सबका साथ, सबका विकास की बात करता है, तब ऐसे आरोप उसकी विश्वसनीयता की परीक्षा लेता हैं.अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर क्या स्पष्टीकरण देती है और क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है या नहीं.
न्यूज़ स्रोत: Congress @INCIndia के X (Twitter) पोस्ट के आधार पर आधारित है

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.



















