खेग्रामस का ऐलान: मनरेगा व बुलडोजर मुद्दे पर पटना में कंवेंशन
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 10 जनवरी 2026 — बिहार में मनरेगा को कमजोर किए जाने और दलित-गरीब बस्तियों पर जारी बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ आंदोलन तेज होने जा रहा है. अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) और मनरेगा मजदूर सभा ने इन मुद्दों पर 2 फरवरी 2026 को पटना में राज्य स्तरीय कंवेंशन आयोजित करने का ऐलान किया है. यह निर्णय शनिवार को पटना में आयोजित दोनों संगठनों के शीर्ष नेताओं की बैठक में लिया गया. बैठक में राज्य भर में चल रहे आंदोलनों की समीक्षा के साथ आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई.
दलित-गरीब बस्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई पर नाराज़गी
बैठक में नेताओं ने कहा कि बिहार के विभिन्न जिलों में दलित, महादलित और गरीब परिवारों की बस्तियों पर प्रशासनिक बुलडोजर कार्रवाई लगातार बढ़ रही है. इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ बताते हुए खेग्रामस नेताओं ने आरोप लगाया कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के घर तोड़े जा रहे हैं, जिससे हजारों परिवार बेघर होने के कगार पर हैं. नेताओं का कहना था कि यह कार्रवाई गरीबों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है.
5-6 जनवरी के प्रदर्शनों की समीक्षा
बैठक में बताया गया कि 5 और 6 जनवरी को राज्य के कई अंचलों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया था . इन प्रदर्शनों के जरिए बुलडोजर कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने और दलित-गरीब परिवारों को पर्चा/पट्टा देने की मांग उठाई गई थी.नेताओं के अनुसार, इन आंदोलनों को व्यापक जनसमर्थन मिला है और आने वाले दिनों में इसे और तेज किया जाएगा.
मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा मांगपत्र
खेग्रामस और मनरेगा मजदूर सभा की ओर से मुख्यमंत्री को एक विस्तृत पत्र सौंपने का निर्णय भी बैठक में लिया गया. पत्र में मांग की जाएगी कि राज्य में दलित एवं वंचित जातियों की आवासीय भूमिहीनता को दूर करने के लिए ठोस नीति बनाया जाये इसके साथ ही सभी अनधिकृत बसावटों का समग्र सर्वे कर उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की जाएगी.
मनरेगा को लगभग समाप्त करने का आरोप
बैठक में नेताओं ने मनरेगा को लेकर गंभीर चिंता जताई है .उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार गारंटी योजना को कमजोर करने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी और अब इसे लगभग समाप्त कर दिया गया है. नेताओं का कहना था कि मजदूरों को समय पर काम और मजदूरी नहीं मिल रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है.
ग्रामजी कानून पर सवाल
बैठक में तथाकथित, ग्रामजी कानून को लेकर भी सवाल उठाया गया. नेताओं ने इसे एक,झुंझुना करार देते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए संवैधानिक रोजगार गारंटी को कमजोर किया गया है. उनका कहना था कि इससे पहले से जर्जर राज्य की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और ग्रामीण मजदूरों की स्थिति और खराब होगी.
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राज्य स्तरीय कंवेंशन और आंदोलन की रूपरेखा
इन सभी मुद्दों पर आंदोलन तेज करने का फैसला लेते हुए संगठनों ने 2 फरवरी 2026 को पटना में दलितों, गरीबों, मजदूरों और महिलाओं का राज्य स्तरीय कंवेंशन आयोजित करने की घोषणा की. नेताओं ने कहा कि यह कंवेंशन सरकार की नीतियों के खिलाफ एक मजबूत लोकतांत्रिक आवाज बनेगा.
रैदास स्मृति सप्ताह मनाने का निर्णय
बैठक में सामाजिक सुधारक संत रैदास की स्मृति में,रैदास स्मृति सप्ताह मनाने का भी निर्णय लिया गया. नेताओं का कहना था कि यह कार्यक्रम सामाजिक समानता और श्रम की गरिमा के संदेश को मजबूत करेगा.
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर निंदा
बैठक में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की वापसी की कड़ी निंदा की गई. नेताओं ने आरोप लगाया कि इस योजना के बंद होने से लाखों ग्रामीण महिलाओं की आजीविका प्रभावित हुई है.निर्णय लिया गया कि इन सभी मुद्दों को मुख्यमंत्री की आगामी यात्रा के दौरान जोरदार तरीके से उठाया जाएगा.
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद
बैठक में खेग्रामस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक सत्यदेव राम, राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महबूब आलम, राष्ट्रीय सचिव सह पूर्व विधायक गोपाल रविदास, मदन चंद्रवंशी, उपेंद्र पासवान, सत्यनारायण प्रसाद, सुभाष पटेल, मुखिया प्रदीप कुमार, जितेंद्र कुमार, प्रदीप कुशवाहा, चंद्रदेव वर्मा सहित कई अन्य नेता उपस्थित थे. बैठक की अध्यक्षता खेग्रामस के राज्य सचिव शत्रुघ्न सहनी ने की.
सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया: इस मामले में खबर लिखे जाने तक राज्य सरकार या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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