मधुबनी मॉब लिंचिंग मामले में सरकार पर फिर उठे सवाल
तीसरा पक्ष ब्यूरो सुपौल, 10 जनवरी 2026— बिहार में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर एक बार फिर सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा हो गया हैं. मधुबनी जिले में हुई मॉब लिंचिंग की घटना में गंभीर रूप से घायल नूरसेद आलम से शुक्रवार को भाकपा (माले) की राज्यस्तरीय टीम ने मुलाकात किया.यह टीम भाकपा माले की केंद्रीय कमिटी सदस्य और माले विधायक दल के पूर्व नेता कॉमरेड महबूब आलम के नेतृत्व में सुपौल जिले के बसंतपुर प्रखंड अंतर्गत परमानंदपुर पंचायत के शंकरपुर गांव (वार्ड संख्या–14) पहुंची.
टीम ने पीड़ित नूरसेद आलम और उनके परिजनों से बातचीत कर घटना की पूरी जानकारी ली तथा उनकी वर्तमान स्थिति का जायजा लिया. इस दौरान भाकपा माले नेताओं ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए बिहार सरकार से तत्काल न्याय और मुआवजे की मांग किया है .
दस दिन बाद भी गंभीर हालत में नूरसेद आलम
भाकपा माले नेताओं ने बताया कि घटना को दस दिन बीत जाने के बावजूद नूरसेद आलम की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है.वे अब तक बोलने की स्थिति में नहीं हैं और उनका इलाज जारी है.यह स्थिति न केवल मानवता को झकझोरने वाली है, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है.
कॉमरेड महबूब आलम ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब तक न तो राज्य सरकार और न ही जिला प्रशासन का कोई प्रतिनिधि पीड़ित से मिलने पहुंचा है. इसके अलावा, पीड़ित परिवार को किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता या मुआवजा अब तक नहीं दिया गया है, जबकि घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल राहत मिलनी चाहिये थी.
20 लाख रुपये मुआवजा और सख्त कार्रवाई की मांग
मीडिया से बातचीत में कॉमरेड महबूब आलम ने बिहार सरकार से मांग किया है कि मॉब लिंचिंग पीड़ित नूरसेद आलम के परिवार को अविलंब 20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए. उन्होंने कहा कि दोषी अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए और उन्हें कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएं लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों पर सीधा हमला हैं.यदि सरकार समय रहते सख्त कदम नहीं उठाती है, तो ऐसे अपराधियों का मनोबल और बढ़ेगा.
सरकार की चुप्पी पर सवाल
भाकपा माले नेताओं ने सरकार की चुप्पी और प्रशासनिक उदासीनता पर कड़ा सवाल उठाया है.उन्होंने कहा कि बिहार में लगातार मॉब लिंचिंग की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार केवल बयानबाजी तक सीमित है. जमीनी स्तर पर न तो पीड़ितों को न्याय मिल रहा है और न ही अपराधियों में कानून का डर दिखाई देता है.
कॉमरेड महबूब आलम ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कार्रवाई नहीं किया, तो भाकपा माले राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगी.यह आंदोलन पीड़ित को न्याय दिलाने और मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए होगा.
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जांच टीम में कई संगठनों के नेता शामिल
इस राज्यस्तरीय जांच टीम में भाकपा माले के सुपौल जिला सचिव कॉमरेड जयनारायण यादव, अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष कॉमरेड अच्छेलाल मेहता, खेग्रामस के जिला सचिव कॉमरेड जन्मजय राय, इंसाफ मंच के कॉमरेड साबिर साहब, पिपरा विधानसभा क्षेत्र से भाकपा माले प्रत्याशी कॉमरेड अनिल कुमार तथा भाकपा माले नेता सह ऐक्टू जिला सचिव कॉमरेड अरविंद कुमार शर्मा शामिल थे.
टीम ने संयुक्त रूप से कहा कि यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर और अल्पसंख्यक वर्ग को डराने की साजिश है. इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
मॉब लिंचिंग पर सख्त कानून की जरूरत
भाकपा माले नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि मॉब लिंचिंग के खिलाफ सख्त और प्रभावी कानून बनाया जाए.उन्होंने कहा कि जब तक ऐसे अपराधों पर कठोर सजा का प्रावधान नहीं होगा, तब तक समाज में भय और अराजकता बनी रहेगी.
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को पीड़ित परिवारों के पुनर्वास, इलाज और सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, ताकि वे भयमुक्त होकर जीवन जी सकें.
निष्कर्ष
मधुबनी मॉब लिंचिंग मामला बिहार की कानून-व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आया है. भाकपा माले की राज्यस्तरीय टीम की यह पहल पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में एक अहम कदम है.अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इस पर कितनी तेजी और गंभीरता से कार्रवाई करती है.

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