विजय सिन्हा के भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ पर राजद का तीखा हमला
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,5 जनवरी — बिहार में भूमि सुधार और राजस्व प्रशासन हमेशा से ही आम जनता के लिए एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय रहा है. जमीन से जुड़े विवाद, दाखिल-खारिज, म्यूटेशन, सीमांकन और अतिक्रमण जैसे मामलों में पारदर्शिता की कमी को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहा हैं.इसी पृष्ठभूमि में उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा द्वारा आयोजित भूमि सुधार जन कल्याण संवाद को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सरकार पर तीखा हमला बोला है. राजद का आरोप है कि यह पूरा अभियान भूमि सुधार से अधिक उगाही और संरक्षण की राजनीति का हिस्सा बनता जा रहा है.
राजद का आरोप: व्यवस्था भ्रष्ट तंत्र के चंगुल में
राजद के प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार यादव ने पटना में जारी बयान में कहा कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग पूरी तरह से भ्रष्ट अधिकारियों, भूमाफियाओं और बिचौलियों के कब्जे में है.उनके अनुसार, यह स्थिति अचानक नहीं बनी, बल्कि नीतीश-भाजपा सरकार के दो दशकों के शासन में ऐसे तत्वों को संरक्षण मिला है, जिसके कारण वे आज भी बेखौफ होकर काम कर रहा हैं.
राजद प्रवक्ता का कहना है कि विभाग में भ्रष्टाचार किसी एक अधिकारी या कर्मचारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संस्थागत समस्या बन चुकी है, जहां छोटे कर्मचारी बलि का बकरा बनते हैं और बड़े अधिकारी व भूमाफिया सुरक्षित रहता हैं.
भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ पर सवाल
अरुण कुमार यादव ने आरोप लगाया कि तथाकथित भूमि सुधार जन कल्याण संवाद वास्तव में जनता की समस्याओं का समाधान करने का मंच नहीं, बल्कि दबाव और संदेश देने का जरिया बन गया है.उनके अनुसार, ऐसे कार्यक्रमों में छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई का डर दिखाकर बड़े भूमाफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों को,लेन-देन का संकेत दिया जाता है.
राजद का दावा है कि यदि सरकार वास्तव में भूमि सुधार को लेकर गंभीर होती, तो अब तक किसी बड़े भूमाफिया या संगठित गिरोह पर ठोस कार्रवाई दिखाई देती। लेकिन हकीकत इसके उलट है.
45 दिन में भी बड़े माफियाओं पर कार्रवाई क्यों नहीं?
राजद ने नई सरकार के गठन के 45 दिन पूरे होने के बावजूद किसी भी बड़े भूमाफिया, शराब माफिया या बालू माफिया पर कार्रवाई न होने को सरकार की मंशा पर सवाल बताया है.प्रवक्ता के अनुसार, सरकार का तथाकथित,एक्शन मोड सिर्फ गरीबों और कमजोर तबकों तक सीमित है.
उन्होंने कहा कि एक ओर बड़े अपराधी और माफिया खुलेआम सक्रिय हैं, वहीं दूसरी ओर गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है. जिन लोगों को बसाने और संरक्षण देने की जिम्मेदारी सरकार की है, उन्हें अतिक्रमण के नाम पर उजाड़ा जा रहा है.
गरीब बनाम सत्ता: दोहरा रवैया?
राजद का आरोप है कि मौजूदा सरकार का रवैया दोहरा है.एक तरफ सत्ता-समर्थित प्रभावशाली लोग कानून से ऊपर दिखाई देता हैं, वहीं दूसरी ओर गरीब, दलित, पिछड़े और कमजोर वर्गों को प्रशासनिक कार्रवाई का सबसे पहला निशाना बनाया जाता है.
अरुण कुमार यादव ने कहा कि भूमि सुधार का मतलब सिर्फ जमीन खाली कराना नहीं होता, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी होता है कि भूमिहीनों को जमीन मिले, रिकॉर्ड पारदर्शी हों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगे.
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उपमुख्यमंत्रियों पर बयानबाजी का आरोप
राजद प्रवक्ता ने दोनों उपमुख्यमंत्रियों ,सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पदभार संभालने के बाद से वे लगातार नए-नए बयान और घोषणाएं कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर उसका असर दिखाई नहीं देता है.
उनका कहना है कि सरकार मीडिया और मंचों पर सक्रिय जरूर है, लेकिन वास्तविक सुधार की दिशा में ठोस और निर्णायक कदमों की भारी कमी है.
राजनीतिक आरोप या जमीनी सच्चाई?
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो राजद के आरोप सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा करता हैं. भूमि सुधार जैसे विषय पर यदि पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं दिखाई देती, तो जनता के बीच अविश्वास गहराना स्वाभाविक है. सवाल यह भी है कि क्या सरकार इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएगी या इन्हें राजनीतिक बयानबाजी बताकर नजरअंदाज करेगी.
निष्कर्ष
बिहार में भूमि सुधार सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता से जुड़ा सवाल है.यदि आरोप सही हैं, तो यह राज्य के शासन-प्रशासन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है.वहीं, यदि सरकार के पास इन आरोपों का ठोस जवाब और कार्रवाई का रोडमैप है, तो उसे सार्वजनिक रूप से सामने आना चाहिये .
फिलहाल, भूमि सुधार बनाम उगाही की यह बहस बिहार की राजनीति में तेज होती जा रही है और आने वाले समय में यह मुद्दा जनता के बीच एक बड़े राजनीतिक विमर्श का रूप ले सकता है.

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