मजदूरी मांगना पड़ा भारी! बक्सर में दलित मजदूर की हत्या, एक्सीडेंट बताकर बचाए जा रहे आरोपी?

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Ajit Kumar

भारतबिहार
मजदूरी मांगना पड़ा भारी! बक्सर में दलित मजदूर की हत्या, एक्सीडेंट बताकर बचाए जा रहे आरोपी?

बिहार में दलित मजदूर की हत्या: बक्सर के गोविंदापुर कांड ने उठाए कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,29 दिसंबर — बिहार में दलितों और गरीब तबकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गई है. बक्सर जिले के गोविंदापुर गांव में 28 वर्षीय दलित मजदूर अभिषेक राम की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में गहरा आक्रोश है. इस मामले को लेकर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के राज्यसभा सांसद Er. रामजी गौतम ने X (पूर्व में ट्विटर) पर एक कड़ा बयान जारी करते हुए इसे सीधी हत्या करार दिया है और पुलिस-प्रशासन पर सच्चाई छिपाने का गंभीर आरोप लगाया है.

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, बक्सर के गोविंदापुर निवासी अभिषेक राम, पिता हरिगोविंद राम, एक पेट्रोल पंप पर मजदूरी करता था. वह अपने मेहनताने की मांग कर रहा था. आरोप है कि मजदूरी मांगने की सजा उसे अपनी जान देकर चुकाना पड़ा.

Er. रामजी गौतम के अनुसार,

हत्या से पहले पेट्रोल पंप मालिक के बेटे रोमी ने अभिषेक राम को घर से बुलाया,इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई.

हत्या को एक्सीडेंट का रूप देने की कोशिश किया गया.

पुलिस-प्रशासन द्वारा पेट्रोल पंप मालिक को बचाने का प्रयास किया जा रहा है.

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की मौत का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जो गरीब और दलित मजदूरों को न्याय दिलाने में बार-बार विफल होती दिखाई देती है.

पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप

BSP सांसद ने अपने पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पुलिस इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रहा है. हत्या को दुर्घटना बताकर प्रभावशाली आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है. यह आरोप बिहार की कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.

यदि शुरुआती जांच ही पक्षपातपूर्ण हो, तो पीड़ित परिवार को न्याय कैसे मिलेगा.यह सवाल अब आम जनता भी पूछ रही है.

मुख्यमंत्री से सीधी मांग

Er. रामजी गौतम ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लेने की मांग किया है. उन्होंने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं,

हत्यारे को फांसी की सजा दी जाये.

पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाये.

परिवार को पूर्ण सुरक्षा उपलब्ध कराई जाये .

इन मांगों के पीछे तर्क साफ है,दलित और गरीब परिवारों को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस न्याय चाहिये.

BPCL और पेट्रोल पंप लाइसेंस पर सवाल

सांसद रामजी गौतम ने BPCL (भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) से भी हस्तक्षेप की मांग की है.उन्होंने कहा कि,

बक्सर स्थित बाबा विश्वनाथ सर्विस सेंटर (पेट्रोल पंप) का लाइसेंस निरस्त किया जाये.

पेट्रोल पंप प्रबंधन द्वारा पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दी जाये.

यह मांग कॉरपोरेट जवाबदेही से जुड़ा एक अहम मुद्दा भी उठाती है,क्या किसी मजदूर की मौत के बाद कंपनी और फ्रेंचाइज़ी अपनी जिम्मेदारी से बच सकती है?

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BSP कार्यकर्ताओं की मौजूदगी और FIR

घटना के बाद BSP की जिला इकाई और वरिष्ठ कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे. पीड़ित परिवार को कानूनी सहायता देने के लिए FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है.पार्टी का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा.

जय भीम, के नारे के साथ BSP ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे बहुजन समाज के सम्मान और अधिकारों की है.

बिहार में दलित सुरक्षा पर बड़ा सवाल

यह घटना कोई अपवाद नहीं है.पिछले कुछ वर्षों में बिहार में दलितों और गरीब मजदूरों के खिलाफ हिंसा, शोषण और अन्याय के कई मामले सामने आया हैं. अक्सर देखा गया है कि,

प्रभावशाली लोग बच निकलते हैं.

पीड़ित परिवार वर्षों तक न्याय के लिए भटकता है.

मामले ठंडे बस्ते में चले जाते हैं.

बक्सर का यह कांड एक बार फिर बताता है कि सामाजिक न्याय के दावे और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई मौजूद है.

निष्कर्ष

बक्सर के गोविंदापुर में अभिषेक राम की मौत सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी है. यदि समय रहते निष्पक्ष जांच, कड़ी सजा और पीड़ित परिवार को सुरक्षा व मुआवज़ा नहीं मिला, तो यह विश्वास और टूटेगा कि कानून सबके लिए बराबर है.

अब निगाहें बिहार सरकार, पुलिस-प्रशासन और BPCL पर टिकी हैं,क्या वे न्याय के साथ खड़े होंगे या एक और दलित मजदूर की मौत फाइलों में दबकर रह जाएगी?

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