क्या भारत की विदेश नीति ट्रंप के दबाव में है?

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Ajit Kumar

भारतदुनिया
क्या भारत की विदेश नीति ट्रंप के दबाव में है?

रूस से तेल, अमेरिकी टैरिफ और मोदी सरकार पर उठते गंभीर सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,5 जनवरी — भारत की विदेश नीति को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक X (Twitter) हैंडल @INCIndia पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर गंभीर आरोप लगाया हैं.

ट्रंप के अनुसार, भारत ने रूस से तेल खरीदना इसलिए कम किया क्योंकि मोदी उन्हें,खुश करना चाहते थे और अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने की धमकी से भारत पर दबाव बनाया गया. इस बयान के बाद कांग्रेस ने सीधे-सीधे सवाल उठाया है कि,क्या भारत की विदेश नीति अब अमेरिका के इशारों पर चल रही है?

ट्रंप का दावा क्या है?

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा है कि,

भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया क्योंकि मोदी मुझे खुश करना चाहता है. अगर मेरी बात नहीं मानी गई तो मैं टैरिफ बढ़ा दूंगा, जिससे भारत को नुकसान होगा.

यह बयान केवल एक कूटनीतिक टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह भारत की संप्रभु विदेश नीति पर सीधा सवाल खड़ा करता है. ट्रंप के शब्दों से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका भारत पर आर्थिक दबाव बनाकर उसके ऊर्जा फैसलों को प्रभावित कर सकता है.

कांग्रेस का आरोप: विदेश नीति वॉशिंगटन तय कर रहा है?

कांग्रेस पार्टी ने इस बयान को आधार बनाकर मोदी सरकार से कई तीखे सवाल पूछा हैं,

क्या मोदी सरकार की विदेश नीति अमेरिका से तय हो रही है?

क्या रूस से तेल खरीदना इसलिए बंद किया गया क्योंकि ट्रंप को खुश करना था?

जब ट्रंप कभी सीजफायर की बात करता हैं और कभी रूस से तेल खरीदने पर रोक की धमकी देते हैं, तब मोदी चुप क्यों हैं?

मोदी की कथित कमजोरी का खामियाजा देश क्यों भुगत रहा है?

कांग्रेस का कहना है कि भारत जैसी संप्रभु शक्ति को किसी भी देश के दबाव में आकर अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करना चाहिये.

रूस से तेल: भारत के लिए क्यों अहम है?

यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर अपने नागरिकों को महंगाई से राहत देने की कोशिश किया थी. यह फैसला पूरी तरह राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जुड़ा था.

अगर ट्रंप का दावा सही है कि अमेरिका के दबाव में भारत ने यह खरीद कम की, तो यह सवाल उठना लाज़मी है कि,

क्या भारत अपने लोगों के हित से पहले अमेरिकी संतुष्टि को प्राथमिकता दे रहा है?

विश्वगुरु की छवि बनाम ज़मीनी हकीकत

प्रधानमंत्री मोदी अक्सर भारत को एक मज़बूत और आत्मनिर्भर विश्वगुरु के रूप में प्रस्तुत करता हैं. लेकिन विपक्ष का तर्क है कि,

अगर भारत सच में आत्मनिर्भर है,

अगर भारत की विदेश नीति स्वतंत्र है,तो फिर किसी विदेशी नेता की धमकी पर भारत अपने फैसले क्यों बदले?

कांग्रेस का कहना है कि विश्व मंच पर चुप्पी और दबाव में झुकना, मज़बूत नेतृत्व की पहचान नहीं हो सकता.

ट्रंप से डर या कूटनीतिक मजबूरी?

कांग्रेस ने सीधे सवाल उठाया है कि,मोदी ट्रंप से इतना डरते क्यों हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह डर नहीं बल्कि रणनीतिक असंतुलन का मामला हो सकता है. अमेरिका भारत का अहम व्यापारिक साझेदार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भारत अपने पुराने रणनीतिक सहयोगी रूस से रिश्ते कमजोर करे.

एक संतुलित विदेश नीति का अर्थ होता है कि,किसी एक ध्रुव पर निर्भर न होना.

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मोदी सरकार की चुप्पी क्यों?

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रधानमंत्री मोदी या विदेश मंत्रालय की ओर से कोई स्पष्ट जवाब क्यों नहीं आया?

चुप्पी ने आशंकाओं को और गहरा किया है. विपक्ष का कहना है कि,

अगर ट्रंप का बयान गलत है, तो उसका खंडन क्यों नहीं?

अगर सही है, तो देश को सच्चाई क्यों नहीं बताई जा रही?

निष्कर्ष: जवाब देश को चाहिए

रूस से तेल, अमेरिकी टैरिफ और ट्रंप के बयान केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि भारत के आम नागरिक, महंगाई और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़े सवाल हैं.

कांग्रेस का साफ कहना है कि,

भारत की विदेश नीति किसी एक व्यक्ति या देश को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के हित में होनी चाहिये.

अब यह प्रधानमंत्री मोदी पर निर्भर करता है कि वे इन सवालों का जवाब देकर देश को भरोसा दिलाते हैं या चुप्पी के जरिए संदेह को और गहरा होने देते हैं.

न्यूज़ स्रोत : कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक X (Twitter) हैंडल @INCIndia पर जारी पोस्ट के हवाले से.

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