क्या भारत में वैचारिक राजनीति की वापसी कर रही है कांग्रेस?
तीसरा पक्ष ब्यूरो दिल्ली,28 दिसंबर — भारतीय राजनीति में अक्सर यह दावा किया जाता रहा है कि, कांग्रेस खत्म हो गई है, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस धारणा को सिरे से खारिज करते हुए एक सशक्त वैचारिक संदेश दिया है.इंदिरा भवन, दिल्ली में दिए गए अपने बयान में उन्होंने स्पष्ट कहा है कि कांग्रेस भले ही आज सत्ता में न हो, लेकिन उसकी रीढ़ आज भी सीधी है और उसकी विचारधारा अडिग है.
खड़गे का यह बयान केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि मौजूदा दौर की राजनीति पर एक गहरा वैचारिक हस्तक्षेप है.
हमने कभी समझौता नहीं किया – कांग्रेस का दावा
कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ शब्दों में कहा है कि कांग्रेस ने कभी संविधान से समझौता नहीं किया, न ही धर्मनिरपेक्षता से और न ही गरीबों, वंचितों व अल्पसंख्यकों के अधिकारों से. उन्होंने दो टूक कहा कि,
हम सत्ता में न हों, लेकिन सौदेबाजी नहीं करेंगे.
यह बयान उस राजनीति के विरुद्ध है, जहां सत्ता पाने के लिए मूल सिद्धांतों से समझौता कर लिया जाता है. कांग्रेस खुद को एक ऐसी पार्टी के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जो सत्ता से ज्यादा संविधान और मूल्यों को प्राथमिकता देती है.
धर्म बनाम राजनीति: कांग्रेस और BJP की वैचारिक रेखा
खड़गे ने BJP पर आरोप लगाते हुए कहा है कि,
कांग्रेस ने कभी धर्म के नाम पर वोट नहीं मांगा.
कांग्रेस ने मंदिर-मस्जिद पर नफरत नहीं फैलाई.
कांग्रेस ने धर्म को आस्था तक सीमित रखा.
उनका कहना था कि कुछ राजनीतिक ताकतों ने धर्म को आस्था से निकालकर राजनीति का हथियार बना दिया है.यही आज की राजनीति का सबसे बड़ा संकट है.
कांग्रेस जोड़ती है, BJP तोड़ती है
खड़गे का यह कथन मौजूदा राजनीतिक विमर्श में एक स्ट्रॉन्ग टैगलाइन के रूप में उभरता है. उनका आरोप है कि BJP की राजनीति समाज को बांटने पर आधारित है,
धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर.
वहीं कांग्रेस खुद को एक ऐसी ताकत के रूप में पेश कर रही है जो,
सामाजिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता
लोकतांत्रिक मूल्यों, को जोड़ने का काम करती है.
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आंकड़े, जनगणना और संविधान: BJP पर गंभीर आरोप है.
आंकड़े क्यों छिपाए जाते हैं?
जनगणना क्यों रोकी जा रही है?
संविधान बदलने की बातें क्यों की जा रही हैं?
खड़गे के अनुसार, जब सत्ता के पास सच्चाई नहीं होती है तो , तब तथ्यों को छिपाया जाता है और संस्थाओं को कमजोर किया जाता है. यह बयान सीधे तौर पर लोकतंत्र और पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है.
इतिहास और विरासत पर तंज
अपने भाषण में खड़गे ने BJP नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि,
जो आज इतिहास पर भाषण दे रहे हैं, उनके पूर्वज इतिहास से भाग रहे थे.
यह टिप्पणी कांग्रेस की स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी विरासत और BJP की ऐतिहासिक भूमिका को लेकर लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक विवाद को फिर से सामने लाती है.
कांग्रेस एक पार्टी नहीं, विचारधारा है
खड़गे के पूरे वक्तव्य का सबसे मजबूत पक्ष यही रहा कि उन्होंने कांग्रेस को केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक विचारधारा के रूप में परिभाषित किया है. उनके शब्दों में,
कांग्रेस विचारधारा है और विचारधारा कभी मरती नहीं है.
यह कथन उन आलोचनाओं का जवाब है, जो कांग्रेस को कमजोर, अप्रासंगिक या समाप्त मानती हैं.
निष्कर्ष: वैचारिक राजनीति की वापसी?
मल्लिकार्जुन खड़गे का यह बयान संकेत देता है कि कांग्रेस आने वाले समय में खुद को वैचारिक राजनीति के केंद्र में स्थापित करना चाहती है.
जहां मुद्दे होंगे,
संविधान, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय, लोकतंत्र की रक्षा.
यह बयान केवल BJP पर हमला नहीं, बल्कि कांग्रेस के समर्थकों को दिया गया एक आत्मविश्वास से भरा संदेश भी है.

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