यूपी वोटर लिस्ट पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, 13,150 EPIC नंबरों में नाम बदले?

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Ajit Kumar

भारत
पीलीभीत मतदाता सूची में EPIC नंबर और नाम बदलने के कांग्रेस के आरोप

कांग्रेस ने पीलीभीत विधानसभा में मतदाता पहचान संख्या के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया, चुनाव आयोग से पारदर्शिता पर सवाल पूछे

तीसरा पक्ष ब्यूरो :उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं. कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट @INCIndia पर साझा किए गए दावे के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद भी मतदाता सूची में जुलाई से सितंबर 2026 के बीच बड़े पैमाने पर नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया हुई. पार्टी ने आरोप लगाया कि पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के EPIC नंबर समान रखते हुए उनके नाम बदल दिए गए.

कांग्रेस ने इस मामले को मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर सवाल बताया है. पार्टी की ओर से कुछ उदाहरण भी साझा किए गए हैं, जिनमें एक ही मतदाता पहचान संख्या से अलग-अलग नाम और पिता के नाम दर्ज होने का दावा किया गया है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच के बिना इन्हें प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता.

कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए?

कांग्रेस के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 10 अप्रैल 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद SIR की प्रक्रिया बंद कर दी गई थी.पार्टी का दावा है कि इसके बावजूद जुलाई से सितंबर के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में कई नाम जोड़े और हटाए.

कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि इस अवधि में नाम जोड़ने और हटाने की सामान्य प्रक्रिया के लिए फॉर्म-6 और फॉर्म-7 का इस्तेमाल नहीं हो रहा था, तो ये बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किए गए. इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित अवधि के आवेदन, संशोधन रिकॉर्ड और निर्वाचन अधिकारियों के स्पष्टीकरण की जरूरत होगी.

पार्टी ने यह भी दावा किया कि अंतिम मतदाता सूची में लगभग 2 करोड़ 4 लाख नाम हटाए गए थे. इस संख्या और इसके आधार की पुष्टि के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक सूची तथा निर्वाचन आयोग के संबंधित आंकड़ों का मिलान आवश्यक है.

पीलीभीत विधानसभा में 13,150 EPIC नंबरों का मामला

कांग्रेस ने अपने आरोपों में पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र को विशेष रूप से रेखांकित किया है.पार्टी के अनुसार, यहां 13,150 लोगों के EPIC नंबर समान रखते हुए नाम बदल दिए गए.EPIC यानी Electors Photo Identity Card, मतदाता पहचान पत्र से जुड़ी विशिष्ट पहचान संख्या है.

कांग्रेस ने इस दावे को समझाने के लिए एक उदाहरण भी दिया है.पार्टी की पोस्ट के अनुसार, एक रिकॉर्ड में मतदाता का नाम मोहम्मद युसुफ, पिता का नाम रसीतल, उम्र 33 वर्ष और लिंग पुरुष दर्ज बताया गया. वहीं, उसी EPIC नंबर से खोज करने पर दूसरा रिकॉर्ड हसरत, पिता रमजान अली, उम्र 33 वर्ष और लिंग पुरुष के नाम से मिलने का दावा किया गया.

यदि आधिकारिक रिकॉर्ड में वास्तव में एक ही EPIC नंबर के साथ अलग-अलग व्यक्तियों के नाम और पिता के नाम दर्ज पाए जाते हैं, तो यह गंभीर प्रशासनिक सवाल होगा. हालांकि, केवल सोशल मीडिया पर साझा किए गए उदाहरण से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी 13,150 मामलों में ऐसा हुआ है या इसके पीछे जानबूझकर की गई धांधली है.

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SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है.इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं से संबंधित रिकॉर्ड को अद्यतन करना और गलत प्रविष्टियों को ठीक करना होता है.लेकिन इस प्रक्रिया में पारदर्शिता, निर्धारित नियमों का पालन और मतदाताओं को आपत्ति दर्ज करने का अवसर मिलना भी जरूरी है.

कांग्रेस के आरोपों के बाद कुछ प्रमुख सवाल सामने आते हैं:

क्या जुलाई से सितंबर 2026 के बीच पीलीभीत विधानसभा की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर संशोधन हुए?

क्या 13,150 EPIC नंबरों के संबंध में नाम बदलने की शिकायतों का आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद है?

इन बदलावों के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई और क्या संबंधित आवेदन उपलब्ध हैं?

क्या निर्वाचन अधिकारियों ने शिकायतों की जांच की है?

यदि रिकॉर्ड में त्रुटियां मिली हैं, तो उन्हें सुधारने और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाए गए?

इन सवालों का जवाब दस्तावेजों, आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के स्पष्टीकरण से ही मिल सकता है.

चुनाव आयोग की जवाबदेही और मतदाताओं का भरोसा

भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए सटीक मतदाता सूची बेहद जरूरी है. किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटने या रिकॉर्ड में गलत पहचान दर्ज होने से उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है.इसलिए मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया स्पष्ट और जांच योग्य होनी चाहिए.

कांग्रेस के आरोपों की निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि मामला तकनीकी त्रुटियों, प्रशासनिक चूक, रिकॉर्ड के मिलान में समस्या या किसी अन्य कारण से जुड़ा है.यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो नियमानुसार सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए.

फिलहाल, कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों और आधिकारिक रूप से प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है. चुनाव आयोग या उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का संबंधित आरोपों पर आधिकारिक पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने पर मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी.

निष्कर्ष

पीलीभीत विधानसभा में 13,150 EPIC नंबरों के संबंध में कांग्रेस का दावा गंभीर जांच की मांग करता है. अब महत्वपूर्ण यह है कि संबंधित रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच हो, चुनाव आयोग तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करे और मतदाताओं के सामने पारदर्शी जानकारी रखी जाए.

स्रोत: कांग्रेस के आधिकारिक X अकाउंट @INCIndia की पोस्ट के आधार पर

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