इटकी में शिल्पी नेहा तिर्की ने युवाओं को शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का दिया संदेश

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Ajit Kumar

झारखण्ड
इटकी में DCYM के 72वें वार्षिक शिविर में युवाओं को शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देतीं शिल्पी नेहा तिर्की

DCYM के 72वें वार्षिक शिविर में युवाओं से संवाद, महिला सम्मान, सांस्कृतिक पहचान और शिक्षा पर दिया जोर

तीसरा पक्ष ब्यूरो:इटकी में आयोजित DCYM के 72वें वार्षिक शिविर में शिल्पी नेहा तिर्की ने युवाओं के साथ शिक्षा, चरित्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक पहचान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए. उन्होंने युवाओं की भूमिका को देश और समाज के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि केवल बड़ी युवा आबादी होना किसी देश की प्रगति की गारंटी नहीं है.वास्तविक बदलाव के लिए युवाओं का शिक्षित, जागरूक और जिम्मेदार होना आवश्यक है.

शिल्पी नेहा तिर्की ने इस कार्यक्रम से जुड़े अपने विचार सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर साझा किए. उन्होंने युवाओं से समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने, सही और गलत के बीच अंतर करने तथा अपने भीतर संवेदनशीलता और विवेक विकसित करने का आग्रह किया.

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शिक्षा और चरित्र निर्माण से तय होगी युवाओं की भूमिका

शिल्पी नेहा तिर्की के अनुसार, युवाओं की ताकत केवल उनकी संख्या में नहीं, बल्कि उनकी सोच, शिक्षा और व्यवहार में दिखाई देनी चाहिए. एक जागरूक युवा न केवल अपने जीवन को बेहतर बना सकता है, बल्कि अपने परिवार, गांव और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

उन्होंने शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण को भी जरूरी बताया.उनके संदेश का मुख्य भाव यह था कि ज्ञान तभी सार्थक बनता है, जब उसका उपयोग समाज के हित में किया जाए.युवाओं में सही-गलत की पहचान, दूसरों के प्रति संवेदनशीलता और अपने कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होना जरूरी है.

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महिलाओं के पहनावे से चरित्र आंकने की सोच पर उठाए सवाल

अपने संदेश में शिल्पी नेहा तिर्की ने महिलाओं के पहनावे के आधार पर उनके चरित्र का आकलन करने की मानसिकता पर भी सवाल उठाए.उन्होंने ऐसी सोच को संकीर्ण और मनुवादी मानसिकता का परिचायक बताया.

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके कपड़ों से नहीं, बल्कि उसके विचारों, व्यवहार और कर्मों से होनी चाहिए.यह विचार महिलाओं के सम्मान और व्यक्ति के मूल्यांकन में समानता की आवश्यकता को रेखांकित करता है.

उनके इस संदेश का व्यापक सामाजिक संदर्भ भी है। महिलाओं की स्वतंत्रता, सम्मान और समान अधिकारों को लेकर समाज में होने वाली चर्चाओं के बीच यह सवाल महत्वपूर्ण बना रहता है कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन बाहरी रूप-रंग के आधार पर किया जाना चाहिए या उसके आचरण के आधार पर.

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आधुनिक शिक्षा के साथ सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की अपील

DCYM के वार्षिक शिविर में साझा किए गए विचारों में सांस्कृतिक पहचान भी एक महत्वपूर्ण विषय रहा. शिल्पी नेहा तिर्की ने भाषा, रीति-रिवाज, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को समाज की विशिष्ट पहचान बताया.

उन्होंने युवाओं को आधुनिक शिक्षा और नए विचारों को अपनाने के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया. उनके विचारों के अनुसार, आधुनिकता और सांस्कृतिक विरासत के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना जरूरी है.

आज के बदलते सामाजिक परिवेश में युवाओं के सामने नई तकनीक, शिक्षा और रोजगार के अवसरों के साथ अपनी भाषा और परंपराओं को सहेजने की चुनौती भी है. ऐसे में सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए नए ज्ञान और विचारों के लिए खुले रहना समाज के विकास में सहायक हो सकता है.

गांव लौटकर पांच बच्चों को शिक्षित करने का आह्वान

शिल्पी नेहा तिर्की के संदेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू शिक्षा को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाना रहा.उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने गांव लौटकर कम-से-कम पांच बच्चों को शिक्षित करने और उनके बेहतर भविष्य के निर्माण में योगदान देने का संकल्प .

यह अपील शिक्षा को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित रखने के बजाय सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में देखने की प्रेरणा देती है.यदि शिक्षित युवा अपने आसपास के बच्चों को पढ़ाई में सहयोग दें, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें और शिक्षा के महत्व को समझाएं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समुदाय पर पड़ सकता है.

विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक कठिनाइयों, संसाधनों की कमी और शैक्षिक मार्गदर्शन के अभाव जैसी चुनौतियों के बीच स्थानीय स्तर पर मिलने वाला सहयोग बच्चों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है.

सामाजिक बदलाव में युवाओं की भागीदारी क्यों जरूरी?

किसी भी समाज का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी की सोच और सक्रिय भागीदारी से जुड़ा होता है.शिक्षा, महिला सम्मान, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मुद्दे केवल भाषणों तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन में भी अपनाया जाए, तभी उनका वास्तविक महत्व सामने आएगा.

शिल्पी नेहा तिर्की ने DCYM के 72वें वार्षिक शिविर में युवाओं के साथ संवाद के माध्यम से इन्हीं विषयों पर जोर दिया.उनके संदेश में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन की ताकत, चरित्र निर्माण को जिम्मेदार नागरिकता का आधार और सांस्कृतिक पहचान को समाज की विशिष्टता के रूप में प्रस्तुत किया गया.

गांव के पांच बच्चों को शिक्षित करने की उनकी अपील युवाओं को अपने स्तर पर बदलाव की शुरुआत करने के लिए प्रेरित करती है.अब इस विचार की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने युवा इसे अपने जीवन में अपनाकर शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के क्षेत्र में ठोस योगदान देते हैं.

स्रोत: शिल्पी नेहा तिर्की (@ShilpiNehaTirki) की एक्स (X) पोस्ट के आधार पर आधारित.

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