शहीद वीर बुधु भगत जयंती: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आमंत्रण

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Ajit Kumar

झारखण्ड
शहीद वीर बुधु भगत जयंती समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आमंत्रण

17 फरवरी को सिलागाई में होगा शहीद वीर बुधु भगत स्मरण समारोह

तीसरा पक्ष ब्यूरो रांची, 6 फरवरी 2026 झारखंड की धरती ने स्वतंत्रता संग्राम को अनेक ऐसे नायक दिये है,जिनका योगदान इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है. इन्हीं अमर क्रांतिकारियों में एक नाम है शहीद वीर बुधु भगत, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी.झारखंड के गौरवशाली इतिहास और आदिवासी चेतना के प्रतीक शहीद वीर बुधु भगत की जयंती को लेकर इस वर्ष भी विशेष आयोजन की तैयारी किया जा रहा हैं.

इसी क्रम में शहीद वीर बुधु भगत स्मारक समिति के सदस्यों ने झारखंड मंत्रालय में राज्य के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी से शिष्टाचार मुलाकात किया और उन्हें 17 फरवरी को सिलागाई में आयोजित जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया.

मुख्यमंत्री से मुलाकात का उद्देश्य

X (Twitter) पर झारखंड सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की (@ShilpiNehaTirki) द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह मुलाकात केवल एक औपचारिक भेंट नहीं थी, बल्कि इसके पीछे शहीद वीर बुधु भगत की स्मृति को सम्मान देने और उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का उद्देश्य निहित था.स्मारक समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को जयंती समारोह की रूपरेखा से अवगत कराया और आयोजन को भव्य व ऐतिहासिक बनाने पर चर्चा किया.

17 फरवरी को सिलागाई में होगा भव्य आयोजन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आगामी 17 फरवरी को सिलागाई में शहीद वीर बुधु भगत की जयंती पर एक विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा. इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों, आदिवासी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता अपेक्षित है. यदि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होते हैं, तो यह आयोजन न केवल ऐतिहासिक होगा, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक और क्रांतिकारी विरासत को नई पहचान भी देगा.

कौन थे शहीद वीर बुधु भगत

शहीद वीर बुधु भगत झारखंड के उन महान क्रांतिकारियों में से थे, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के अन्याय और शोषण के खिलाफ आदिवासी समाज को संगठित किया. वे केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के प्रतीक भी थे. उन्होंने अपने जीवन में स्वतंत्रता, स्वाभिमान और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया.

ब्रिटिश शासन के दौरान जब आदिवासी समाज पर अत्याचार बढ़े, तब बुधु भगत ने विद्रोह का बिगुल फूंका.उनका संघर्ष आज भी झारखंड के युवाओं और सामाजिक आंदोलनों को प्रेरणा देता है.

झारखंड के इतिहास में शहीद बुधु भगत का महत्व

झारखंड का इतिहास केवल प्राकृतिक संसाधनों का नहीं, बल्कि संघर्ष, बलिदान और आत्मसम्मान का भी इतिहास है. शहीद वीर बुधु भगत इस इतिहास के ऐसे नायक हैं, जिनके बिना स्वतंत्रता संग्राम की कहानी अधूरी है. उनका जीवन यह संदेश देता है कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना ही सच्ची देशभक्ति है.

यही कारण है कि राज्य सरकार और सामाजिक संगठन मिलकर उनकी जयंती को केवल स्मरण दिवस नहीं, बल्कि जनचेतना दिवस के रूप में मनाने का प्रयास कर रहा हैं

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भूमिका

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं और झारखंड की अस्मिता, इतिहास व संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में लगातार पहल करते रहे हैं. ऐसे में शहीद वीर बुधु भगत जयंती समारोह में उनकी उपस्थिति इस संदेश को और मजबूत करेगी कि राज्य सरकार अपने महापुरुषों के सम्मान और विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है.

शिल्पी नेहा तिर्की का संदेश

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की द्वारा साझा किया गया यह पोस्ट यह दर्शाता है कि सरकार और जनप्रतिनिधि मिलकर शहीदों की स्मृति को जीवित रखने के लिए सक्रिय हैं. उनका यह प्रयास न केवल आयोजन की सूचना देता है, बल्कि समाज को अपने इतिहास से जुड़ने का आह्वान भी करता है.

निष्कर्ष

शहीद वीर बुधु भगत केवल अतीत की एक ऐतिहासिक हस्ती नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा हैं. 17 फरवरी को सिलागाई में आयोजित होने वाला जयंती समारोह झारखंड के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा.मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाना इस आयोजन की गरिमा को और बढ़ाता है.

ऐसे आयोजन यह याद दिलाते हैं कि आज़ादी यूँ ही नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे अनगिनत बलिदान और संघर्ष छिपे हैं. शहीद वीर बुधु भगत का जीवन और संघर्ष हमेशा झारखंड की आत्मा में जीवित रहेगा.

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