क्या ग्रामीण रोजगार और पंचायती राज व्यवस्था खतरे में है?
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना,8 जनवरी — भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है.केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई नई VB-G RAM (विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) योजना को लेकर विपक्ष ने गंभीर सवाल खड़ा किया है. राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीका राम जुल्ली ने इस योजना को, ग्रामीण अधिकारों के खिलाफ बताते हुए तीखी आलोचना की है.
जुल्ली का आरोप है कि यह योजना न केवल मनरेगा जैसे अधिकार-आधारित कानून को कमजोर करती है, बल्कि पंचायती राज व्यवस्था की आत्मा पर भी चोट करता है. उनके बयान के बाद यह मुद्दा केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर में ग्रामीण रोजगार, संघीय ढांचे और स्थानीय स्वशासन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
VB-G RAM योजना क्या है? पूरी जानकारी सरल शब्दों में
VB-G RAM योजना को सरकार ने मनरेगा के स्थान पर लागू किए गए नए ग्रामीण रोजगार कानून के रूप में पेश किया है.इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ-साथ स्थायी आजीविका और बुनियादी ढांचे का निर्माण बताया जा रहा है.
योजना की प्रमुख विशेषताएं
ग्रामीण परिवारों को सालाना 125 दिन का रोजगार (पहले 100 दिन)
कृषि मौसम में 60 दिनों तक काम पर रोक, ताकि खेती में श्रमिकों की उपलब्धता बनी रहे.
फंडिंग पैटर्न में बदलाव
सामान्य राज्यों के लिए: केंद्र 60% – राज्य 40%
विशेष राज्यों के लिए: केंद्र 90% – राज्य 10%
जल संरक्षण, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका सृजन और जलवायु अनुकूल कार्यों पर विशेष फोकस.
निगरानी के लिए जियो-टैगिंग, डिजिटल रिकॉर्ड और AI आधारित सिस्टम.
सरकार का दावा है कि यह योजना ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मजबूत आधार देगी.
टीका राम जुल्ली की मुख्य आपत्तियां: विपक्ष क्यों नाराज़ है?
टीका राम जुल्ली ने VB-G RAM योजना को,जनविरोधी बताते हुए कई गंभीर सवाल उठाये हैं.
पंचायती राज व्यवस्था कमजोर होने का आरोप
जुल्ली का कहना है कि राजस्थान की पहचान पंचायती राज से जुड़ी रही है.
मनरेगा में ग्राम सभा और पंचायतों को योजना बनाने और काम तय करने का अधिकार था, लेकिन VB-G RAM में केंद्र का नियंत्रण बढ़ा दिया गया है, जिससे स्थानीय स्वशासन कमजोर हो सकता है.
अधिकार-आधारित रोजगार की समाप्ति
मनरेगा एक कानूनी अधिकार था,काम मांगने पर काम देना सरकार की जिम्मेदारी थी.
नई योजना में फंड नॉर्मेटिव एलोकेशन पर आधारित है, यानी रोजगार अब बजट और केंद्र की अनुमति पर निर्भर करेगा.
राज्यों पर बढ़ता आर्थिक बोझ
नई फंडिंग व्यवस्था के तहत राजस्थान जैसे राज्यों को 40% खर्च खुद उठाना होगा.
जहां पहले से ही ग्रामीण बेरोजगारी अधिक है, वहां यह बोझ राज्य की वित्तीय स्थिति को कमजोर कर सकता है.
मुख्यमंत्री की भूमिका पर सवाल
टीका राम जुल्ली ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को ,दिल्ली का संदेशवाहक बताते हुए कहा कि उन्हें राजस्थान के गांवों की आवाज बननी चाहिए, न कि केंद्र के फैसलों का प्रचार करना चाहिये.
सरकार का पक्ष: VB-G RAM क्यों ज़रूरी है?
सरकार और उसके समर्थकों का तर्क है कि मनरेगा में समय के साथ कई समस्याएं सामने आईं.
फर्जी जॉब कार्ड और भ्रष्टाचार,
स्थायी संपत्तियों का अभाव,
तकनीकी पारदर्शिता की कमी,
VB-G RAM योजना को इन कमियों को दूर करने वाला कदम बताया जा रहा है. सरकार का कहना है कि नई तकनीक और बेहतर निगरानी से काम की गुणवत्ता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी.
राजस्थान के लिए यह मुद्दा क्यों अहम है?
राजस्थान देश के उन राज्यों में शामिल है जहां मनरेगा की मांग सबसे अधिक रही है.
लाखों ग्रामीण परिवारों की आय इस योजना पर निर्भर रही है.
फंडिंग बोझ बढ़ने से राज्य बजट पर दबाव, अन्य सामाजिक योजनाओं पर असर, ग्रामीण मजदूरों में अनिश्चितता और चिंता
ग्रामीण भारत पर संभावित प्रभाव, संभावित लाभ,ल रोजगार के दिन बढ़ने से आय में वृद्धि, जल संरक्षण और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत
संभावित नुकसान, कृषि मौसम में काम बंद होने से मजदूरी प्रभावित, पंचायतों की भूमिका सीमित
संघीय ढांचे पर सवाल, विशेषज्ञ मानते हैं कि योजना का वास्तविक असर इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा.
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निष्कर्ष: विकास या अधिकार—कौन होगा मजबूत?
VB-G RAM योजना ने एक बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है,
क्या विकास के नाम पर अधिकारों में कटौती स्वीकार्य है?
टीका राम जुल्ली की आलोचना ने इस बहस को और तेज कर दिया है.
राजस्थान जैसे राज्यों में, जहां ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजदूरी पर टिकी है, ऐसे बदलावों का असर लंबे समय तक महसूस किया जाएगा.
अब यह देखना अहम होगा कि VB-G RAM योजना ग्रामीण भारत को सशक्त बनाती है या अधिकारों को सीमित करती है। जवाब आने वाले समय और जमीन पर इसके असर से मिलेगा.
स्रोत: टीका राम जुल्ली का आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट और राजस्थान कांग्रेस प्रेस रिलीज़

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