पटना में RJD का बड़ा शक्ति प्रदर्शन: 11 अप्रैल को तेजस्वी यादव के स्वागत समारोह की तैयारी तेज

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Ajit Kumar

बिहार
पटना में RJD प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अली अशरफ फातमी और अन्य नेता तेजस्वी यादव के 11 अप्रैल कार्यक्रम की जानकारी देते हुए

11 अप्रैल के कार्यक्रम से पहले RJD का बड़ा राजनीतिक संदेश: अल्पसंख्यकों को साधने की कोशिश

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 8 अप्रैल 2026: बिहार की सियासत एक बार फिर गरमाती नजर आ रही है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कई बड़े राजनीतिक बयान सामने आए है.पूर्व केंद्रीय मंत्रीअली अशरफ फातमी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि भाजपा और आरएसएस के विचारों को आधार देने की वजह से ही आज नीतीश कुमार को सत्ता से बेदखल होना पड़ रहा है.

इसी के साथ यह भी घोषणा की गई कि 11 अप्रैल 2026 को पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में तेजस्वी प्रसाद यादव का भव्य इस्तकबालिया (अभिनंदन) समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसे लेकर राज्यभर में तैयारियां जोरों पर हैं.

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अल्पसंख्यक राजनीति के केंद्र में RJD

अली अशरफ फातमी ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय जनता दल हमेशा से अल्पसंख्यकों के हक और अधिकारों के लिए संघर्ष करती रही है. उन्होंने यह भी दोहराया कि लालू प्रसाद यादव के सिद्धांतों और विचारधारा पर पार्टी आज भी मजबूती से कायम है, और यही कारण है कि बिहार का अल्पसंख्यक समाज RJD के साथ खड़ा है.

फातमी ने कहा कि लालू यादव ने अपने राजनीतिक जीवन में कभी भी भाजपा या सांप्रदायिक ताकतों से समझौता नहीं किया है. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए तेजस्वी यादव भी अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध हैं.

नीतीश कुमार और भाजपा पर गंभीर आरोप

संवाददाता सम्मेलन के दौरान फातमी ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी सत्ता बचाने के लिए भाजपा और आरएसएस को मजबूत किया, जिसका सीधा असर बिहार के अल्पसंख्यकों पर पड़ा है.

उन्होंने दावा किया कि,

लालू यादव के शासनकाल में मुसलमानों की सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी करीब 8% तक थी.
जबकि नीतीश कुमार के कार्यकाल में यह घटकर 6% रह गई.

फातमी ने यह भी कहा कि NDA सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों के अधिकार कमजोर हुए हैं और सामाजिक असुरक्षा का माहौल बढ़ा है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब बिहार में अपने नेतृत्व में सरकार बनाने की तैयारी कर रही है, जो राज्य और अल्पसंख्यक समाज के हित में नहीं है.

11 अप्रैल का कार्यक्रम क्यों है खास?

RJD के नेताओं के मुताबिक 11 अप्रैल को होने वाला यह अभिनंदन समारोह सिर्फ एक स्वागत कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी होगा.

राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव ने कहा कि इस कार्यक्रम में अल्पसंख्यक समाज की बड़ी भागीदारी होगी, जो यह साबित करेगी कि RJD ही उनके विश्वास पर खरी उतरती है.

वहीं, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनवर आलम ने बताया कि,

राज्य के सभी जिलों में बैठकें की जा रही हैं.
गांव-गांव से लोगों को जोड़ने का अभियान चल रहा है.
बड़ी संख्या में अल्पसंख्यकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है.

तेजस्वी यादव की बढ़ती लोकप्रियता

RJD नेताओं का दावा है कि तेजस्वी यादव के 17 महीने के कार्यकाल में किए गए कामों ने अल्पसंख्यक समाज का भरोसा और मजबूत किया है.

फातमी ने कहा कि उन्होंने खुद राज्य के कई जिलों का दौरा किया और पाया कि,

मुसलमानों में तेजस्वी यादव के प्रति आकर्षण बढ़ा है.
युवाओं के बीच उनकी छवि एक मजबूत नेता के रूप में उभर रही है.
सामाजिक न्याय और समान अधिकारों की उम्मीद उनसे जुड़ी है.

RJD की रणनीति का होगा ऐलान

इस कार्यक्रम में सिर्फ स्वागत ही नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीतिक रणनीति का भी ऐलान किया जाएगा. खासकर अल्पसंख्यकों के अधिकार, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा को लेकर पार्टी अपनी योजना सामने रख सकती है.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कार्यक्रम आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए RJD की ग्राउंड मोबिलाइजेशन स्ट्रेटजी का हिस्सा है.

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बिहार की राजनीति में नया मोड़?

बिहार की राजनीति में इस समय कई तरह के समीकरण बनते-बिगड़ते नजर आ रहा हैं. एक ओर जहां NDA अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है, वहीं RJD अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्गों को साधने में जुटी है.

11 अप्रैल का यह कार्यक्रम आने वाले दिनों में राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

निष्कर्ष

पटना में आयोजित यह संवाददाता सम्मेलन साफ संकेत देता है कि RJD अब पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुकी है. अल्पसंख्यकों के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए पार्टी न सिर्फ अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, बल्कि भाजपा और NDA के खिलाफ एक मजबूत नैरेटिव भी तैयार कर रही है.

अब सबकी नजरें 11 अप्रैल के कार्यक्रम पर टिकी हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी यादव किस तरह अपनी राजनीतिक रणनीति को आगे बढ़ाते हैं और बिहार की जनता को क्या संदेश देते हैं.

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