महिला आरक्षण पर सियासी टकराव: Gaurav Gogoi का मोदी सरकार पर बड़ा हमला

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Ajit Kumar

भारत
महिला आरक्षण पर सियासी टकराव: Gaurav Gogoi का मोदी सरकार पर बड़ा हमला

परिसीमन और जनगणना से जोड़ने पर कांग्रेस का विरोध, सरकार की मंशा पर उठे सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो नई दिल्ली,16 अप्रैल 2026: लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गया है. कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि महिला आरक्षण बिल को जानबूझकर जटिल बनाया जा रहा है ताकि इसे लागू करने में देरी हो. कांग्रेस के नेता गौरव गोगोई ने लोकसभा में दिए अपने विस्तृत वक्तव्य में सरकार पर सीधा हमला बोला और कहा कि यह बिल महिलाओं के हित में नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन गया है.

महिला आरक्षण पर कांग्रेस का रुख

कांग्रेस पार्टी का कहना है कि वह शुरू से ही महिला आरक्षण के पक्ष में रही है.पार्टी का स्पष्ट मत है कि इस कानून को सरल तरीके से लागू किया जाना चाहिए ताकि इसके पारित होते ही यह प्रभावी हो जाए. कांग्रेस ने यह भी मांग रखी है कि महिला आरक्षण को लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों के आधार पर ही लागू किया जाए, न कि इसे जनगणना और परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं से जोड़ा जाए.

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi पहले भी इस मुद्दे पर अपनी राय स्पष्ट कर चुकी हैं. उन्होंने कहा था कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना अनावश्यक जटिलता पैदा करेगा और इससे इसके लागू होने में देरी होगी.

सरकार की नीति पर सवाल

गौरव गोगोई ने अपने भाषण में कहा कि केंद्र सरकार पहले यह कह रही थी कि महिला आरक्षण लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी है.लेकिन अब सरकार खुद यह स्वीकार कर रही है कि इन प्रक्रियाओं में काफी समय लग सकता है.ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर तीन वर्षों में ऐसा क्या बदल गया कि सरकार अपने ही रुख से पीछे हटती नजर आ रही है.

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण को लागू करने के बजाय उसे टालने की कोशिश कर रही है.पार्टी का कहना है कि अगर 2023 में ही इस बिल को बिना किसी शर्त के लागू किया गया होता, तो 2024 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को इसका सीधा लाभ मिल सकता था.

परिसीमन को लेकर विवाद

परिसीमन (Delimitation) इस पूरे विवाद का केंद्र बन गया है. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन को आगे बढ़ाना चाहती है.पार्टी का कहना है कि संविधान के अनुसार परिसीमन जनगणना के बाद होना चाहिए, लेकिन सरकार इस प्रक्रिया को अपने हिसाब से मोड़ने की कोशिश कर रही है.

Gaurav Gogoi ने यह भी सवाल उठाया है कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का आधार क्या है. क्या इसके लिए कोई संसदीय रिपोर्ट है या यह फैसला कहीं और से लिया जा रहा है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा है कि यह संख्या आसमान से नहीं आ सकती.

सरकार की मंशा पर गंभीर आरोप

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया है कि मोदी सरकार महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है. पार्टी का कहना है कि यह बिल वास्तव में महिला सशक्तिकरण के लिए नहीं बल्कि एक “बैकडोर” रणनीति है, जिसके जरिए परिसीमन को लागू किया जा सके.

कांग्रेस के अनुसार, सरकार ने पहले जातिगत जनगणना का विरोध किया और अब विपक्ष के दबाव में इस पर सहमति जताई है.पार्टी का दावा है कि Rahul Gandhi और INDIA गठबंधन के दबाव के कारण ही सरकार को अपना रुख बदलना पड़ा.

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जम्मू-कश्मीर और असम का उदाहरण

कांग्रेस ने अपने आरोपों को मजबूत करने के लिए जम्मू-कश्मीर और असम के परिसीमन का उदाहरण भी दिया.पार्टी का कहना है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया, जो इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है.

निष्कर्ष

महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर सियासी खींचतान ने इसे और जटिल बना दिया है. एक तरफ कांग्रेस इसे तुरंत लागू करने की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़कर आगे बढ़ाना चाहती है.

कुल मिलाकर, यह विवाद सिर्फ एक विधेयक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए राजनीतिक मंशा, संवैधानिक प्रक्रियाओं और महिला सशक्तिकरण जैसे बड़े मुद्दे सामने आ रहे हैं. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर किस तरह का रास्ता निकालते हैं और क्या वास्तव में महिलाओं को इसका लाभ समय पर मिल पाता है या नहीं.

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