तेजस्वी यादव का बड़ा दावा: महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर सियासत तेज

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Ajit Kumar

बिहार
तेजस्वी यादव का बड़ा दावा: महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर सियासत तेज

तेजस्वी यादव का BJP-JDU पर हमला: महिला विरोधी राजनीति का सच सामने लाओ

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना 19 अप्रैल 2026: बिहार की राजनीति में एक बार फिर महिला प्रतिनिधित्व को लेकर बयानबाजी तेज हो गया है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता Tejashwi Yadav ने अपने X (पूर्व ट्विटर) पोस्ट के जरिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) पर तीखा हमला बोला है.उन्होंने आरोप लगाया है कि विरोधी दल खुद को महिला सशक्तिकरण का समर्थक बताते हैं, लेकिन उनके आंकड़े और इतिहास कुछ और ही कहानी कहता हैं.

तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में दावा किया है कि उनकी पार्टी ने लगातार चुनावों में महिलाओं को सबसे ज्यादा अवसर दिया है. उनके अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में RJD ने बिहार में 29% टिकट महिलाओं को दिया, जो अन्य दलों से अधिक है. इतना ही नहीं, RJD के 25% लोकसभा सांसद महिलाएं हैं, जो पार्टी के भीतर महिला भागीदारी को दर्शाता है.

विधानसभा और परिषद में भी RJD आगे?

तेजस्वी यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी RJD ने 17% महिलाओं को टिकट देकर अन्य दलों को पीछे छोड़ दिया है. इसके अलावा बिहार विधान परिषद में भी RJD का महिला प्रतिनिधित्व 21.4% बताया गया है, जो कि अन्य दलों की तुलना में अधिक है.

इन आंकड़ों के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि RJD सिर्फ बातें नहीं करती, बल्कि जमीन पर महिलाओं को राजनीतिक अवसर देने का काम करती है.

महिला मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री का मुद्दा

तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में एक और महत्वपूर्ण बात उठाई। उन्होंने कहा कि बिहार के इतिहास में अब तक पहली और आखिरी महिला मुख्यमंत्री RJD से ही रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले 30 वर्षों में बिहार से भारत सरकार में जो अंतिम महिला केंद्रीय मंत्री बनीं, वह भी RJD से ही थीं।

हालांकि, उन्होंने सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन यह संकेत Rabri Devi की ओर जाता है, जो बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं.

BJP-JDU-NDA पर सीधा हमला

तेजस्वी यादव ने BJP, JDU और NDA गठबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन दलों ने 75 वर्षों में बिहार से एक भी महिला को मुख्यमंत्री या केंद्रीय मंत्री नहीं बनाया. उन्होंने इन दलों को पाखंडी और महिला विरोधी करार दिया है.

यह बयान सीधे तौर पर सत्ताधारी गठबंधन की नीतियों और उनके दावों पर सवाल खड़ा करता है.तेजस्वी का कहना है कि जो दल महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, उन्हें पहले अपने रिकॉर्ड को जनता के सामने रखना चाहिए.

सियासी रणनीति या जमीनी हकीकत?

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह बयान सिर्फ एक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है.बिहार में महिला वोटर्स की संख्या काफी अधिक है और उनका प्रभाव चुनाव परिणामों पर साफ दिखता है.

ऐसे में महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाकर RJD खुद को महिलाओं के हितैषी दल के रूप में पेश करना चाहती है. वहीं BJP और JDU भी लगातार महिला सशक्तिकरण की योजनाओं और नीतियों का हवाला देती रही हैं.

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क्या कहते हैं आंकड़े?

हालांकि तेजस्वी यादव के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है, लेकिन यह साफ है कि राजनीतिक दल अब महिला भागीदारी को लेकर गंभीर दिखना चाहते हैं. चाहे वह टिकट वितरण हो या सत्ता में भागीदारी, महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है.

भारत में महिला आरक्षण बिल को लेकर भी लंबे समय से चर्चा चल रही है, और हाल ही में इसे लेकर संसद में भी सहमति बनी थी. ऐसे में राज्यों में महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.

निष्कर्ष: चुनावी मुद्दा बनेगा महिला प्रतिनिधित्व?

तेजस्वी यादव का यह बयान आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है. जहां एक ओर RJD अपने आंकड़ों के दम पर खुद को महिलाओं का सबसे बड़ा समर्थक बता रही है, वहीं दूसरी ओर BJP-JDU गठबंधन भी अपने विकास और योजनाओं के जरिए जवाब देने की कोशिश करेगा.

अब देखने वाली बात यह होगी कि जनता किसके दावों पर भरोसा करती है और कौन सा दल वास्तव में महिलाओं को ज्यादा अवसर देने में सफल होता है.

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