पटना संवाददाता सम्मेलन में राजद का बड़ा राजनीतिक प्रहार, सुल्तानगंज घटना को बताया एनडीए के भीतर वर्चस्व की लड़ाई
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 29 अप्रैल 2026: बिहार की राजनीति में अपराध, सत्ता संरक्षण और कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर तीखी सियासी बहस छिड़ गई है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने पटना स्थित प्रदेश कार्यालय के कर्पूरी सभागार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान भाजपा और जदयू पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार में इस समय सत्ता संपोषित गुंडों का राज कायम है और राज्य भय के माहौल से गुजर रहा है.
राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं एजाज अहमद, अरुण कुमार यादव, प्रमोद कुमार सिन्हा, महेंद्र प्रसाद विद्यार्थी और उपेंद्र चंद्रवंशी के साथ संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में अपराध को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है और सत्ता पक्ष अपराध से जुड़े मामलों को भटकाने की कोशिश कर रहा है.

बिहार की कानून व्यवस्था पर राजद के गंभीर सवाल
राजद नेताओं ने आरोप लगाया कि बिहार में पिछले दो दशकों में जातीय विभाजन की राजनीति को बढ़ावा देकर सामाजिक तनाव पैदा किया गया.शक्ति सिंह यादव ने कहा कि अपराधी का कोई जाति धर्म नहीं होता, लेकिन सत्ता में बैठे लोगों ने जातीय समीकरणों के आधार पर समाज में विभाजन पैदा कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की है.
उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय जनता दल हमेशा बिहार को अपराध मुक्त बनाने के पक्ष में रही है और यदि सरकार निष्पक्ष कार्रवाई करे तो राजद हर सकारात्मक कदम में सहयोग देने को तैयार है.
राजद ने यह भी कहा कि राज्य में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय उन्हें सत्ता का संरक्षण मिल रहा है, जिससे आम नागरिकों के बीच डर और असुरक्षा की भावना बढ़ी है.
सुल्तानगंज घटना को बताया भाजपा-जदयू के बीच शक्ति संघर्ष
भागलपुर के सुल्तानगंज में हुई हालिया घटना को लेकर राजद ने बड़ा हमला बोला, पार्टी का कहना है कि यह सामान्य आपराधिक घटना नहीं बल्कि भाजपा और जदयू समर्थित समूहों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम है.
शक्ति सिंह यादव ने वर्ष 2023 की एक पुरानी घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि रामाधीन यादव और राजकुमार के बीच संघर्ष पहले भी सत्ता संरक्षित नेटवर्क की ओर संकेत करता था.अब सुल्तानगंज की घटना ने यह साफ कर दिया है कि एनडीए के भीतर राजनीतिक और आपराधिक गठजोड़ किस स्तर तक पहुंच चुका है.
राजद नेताओं के मुताबिक, सत्ता पक्ष के कई बड़े नेताओं के साथ कथित अपराधियों की तस्वीरें इस बात का संकेत देती हैं कि अपराध और राजनीति के बीच की दूरी लगातार कम हो रही है.
सत्ता और अपराध के गठजोड़ पर फोटो राजनीति
संवाददाता सम्मेलन में राजद ने कथित रूप से कुछ तस्वीरों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा, जदयू और सहयोगी दलों के कई नेताओं की अपराध से जुड़े लोगों के साथ नजदीकियां रही हैं.
राजद ने सवाल उठाया कि यदि सरकार अपराध के खिलाफ सख्त है तो फिर ऐसे तत्व सत्ता के गलियारों तक कैसे पहुंच रहे हैं? पार्टी ने इसे बिहार की प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि जब अपराधियों में शासन का भय समाप्त हो जाता है, तब लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होने लगती है.
राजद ने यह भी कहा कि बिहार की जनता अब समझ रही है कि राज्य में राजनीतिक संरक्षण किस प्रकार अपराधियों का मनोबल बढ़ा रहा है.
एके-47 संस्कृति’ पर सीधा हमला
राजद प्रवक्ताओं ने बिहार के कुछ क्षेत्रों में हथियारबंद अपराधियों और कथित बाहुबलियों के प्रभाव का मुद्दा भी उठाया, शक्ति सिंह यादव ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में कानून का राज स्थापित करना चाहती है तो उसे सिर्फ बयानबाजी नहीं बल्कि निष्पक्ष कार्रवाई करनी होगी
उन्होंने चुनौतीपूर्ण अंदाज में कहा कि सत्ता पक्ष को यह साबित करना चाहिए कि वह अपराधियों के खिलाफ बिना राजनीतिक पक्षपात के कार्रवाई कर सकता है.
यह बयान स्पष्ट रूप से बिहार की मौजूदा कानून व्यवस्था को चुनावी और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
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बिहार की राजनीति में बढ़ेगा अपराध बनाम शासन का मुद्दा?
राजद का यह हमला ऐसे समय आया है जब बिहार में आगामी राजनीतिक समीकरणों और जनमत को लेकर माहौल लगातार गर्म हो रहा है. अपराध, जातीय राजनीति, सत्ता संरक्षण और प्रशासनिक निष्पक्षता जैसे मुद्दे आने वाले समय में और अधिक प्रमुख हो सकते हैं.
विशेषज्ञ मानते हैं कि विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच सरकार की छवि पर सवाल खड़े करने के लिए इस्तेमाल करेगा, जबकि सत्ता पक्ष के लिए कानून व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी.
राजद ने अपने संवाददाता सम्मेलन के जरिए यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि बिहार में अपराध केवल कानून व्यवस्था का प्रश्न नहीं बल्कि राजनीतिक जवाबदेही का भी बड़ा विषय बन चुका है.
निष्कर्ष
पटना में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बिहार की राजनीति में अपराध और सत्ता संरक्षण के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है. राजद ने भाजपा-जदयू गठबंधन पर तीखे आरोप लगाकर राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
अब देखने वाली बात होगी कि सत्ता पक्ष इन आरोपों का किस तरह जवाब देता है और क्या बिहार की जनता इस बहस को आगामी राजनीतिक दिशा तय करने वाले मुद्दे के रूप में देखती है. फिलहाल इतना तय है कि बिहार में अपराध और राजनीतिक संरक्षण का सवाल आने वाले दिनों में और अधिक तीखा होने वाला है.

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