बिहार में कई जिलों में विरोध प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर सरकार पर निशाना
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना 4 जुलाई 2026: बिहार में कथित मॉब लिंचिंग, फर्जी मुठभेड़ों, बुलडोजर कार्रवाई, पुलिस दमन और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमलों के विरोध में भाकपा (माले) ने शनिवार को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। पार्टी के अनुसार जहानाबाद, गया, दरभंगा, सिवान, नवादा, आरा, बेगूसराय, छपरा सहित कई जिलों में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई.
भाकपा (माले) के राज्य सचिव कॉमरेड कुणाल ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून व्यवस्था के नाम पर दमनकारी कार्रवाइयों को बढ़ावा दिया जा रहा है और सरकार न्यायिक प्रक्रिया के बजाय बुलडोजर तथा कथित एनकाउंटर की नीति अपना रही है. हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर इस प्रेस विज्ञप्ति में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
राज्यव्यापी विरोध दिवस के तहत कई जिलों में प्रदर्शन
भाकपा (माले) की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्यव्यापी विरोध दिवस के तहत बिहार के विभिन्न जिलों में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर मॉब लिंचिंग, पुलिस दमन, कथित फर्जी मुठभेड़ों और बुलडोजर कार्रवाई का विरोध किया.
पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और कानून के शासन को मजबूत बनाए रखने के लिए जनता की आवाज उठाना आवश्यक है. इसी उद्देश्य से राज्यभर में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए.
भाकपा माले ने बुलडोजर और एनकाउंटर नीति पर उठाए सवाल
भाकपा (माले) के राज्य सचिव कॉमरेड कुणाल ने कहा कि पार्टी बिहार की जनता की आवाज बनकर इन मुद्दों को उठा रही है.उनके अनुसार, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बुलडोजर कार्रवाई और एनकाउंटर कानून का विकल्प नहीं हो सकते.
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में बुलडोजर और पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक विरोध की आवाजों को दबाने का माध्यम बनते जा रहे हैं. उनका कहना था कि बिहार में भी गरीबों को उजाड़ने और विरोध करने वालों पर कार्रवाई करने की घटनाएं चिंता का विषय हैं.
नगरनौसा और भरत तिवारी मामले का भी किया उल्लेख
प्रेस विज्ञप्ति में नगरनौसा में डिग्री कॉलेज की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों पर पुलिस कार्रवाई का भी जिक्र किया गया। भाकपा (माले) ने आरोप लगाया कि इस घटना ने पुलिस के रवैये को उजागर किया है.
इसके अलावा पार्टी ने भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि ऐसी घटनाएं बिहार को पुलिस स्टेट बनाने की दिशा में ले जाने का प्रयास हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस लेख में उपलब्ध नहीं है और संबंधित मामलों पर प्रशासन का पक्ष भी सामने आना बाकी है.
ये भी पढ़े :ग्रामीण क्षेत्रों में नए टैक्स का विरोध: भाकपा-माले ने सरकार पर लगाया गरीबों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का आरोप
ये भी पढ़े :राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: कांग्रेस ने RSS से पूछे तीखे सवाल, FIR नहीं होने पर उठाए सवाल
सरकार की नीतियों पर विपक्षी दलों का लगातार हमला
हाल के समय में बिहार में कानून व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक फैसलों को लेकर विपक्षी दल लगातार सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. विभिन्न राजनीतिक दल समय-समय पर राज्य में कानून व्यवस्था, नागरिक अधिकारों और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं.
भाकपा (माले) का यह राज्यव्यापी आंदोलन भी इसी क्रम का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें पार्टी ने सरकार से लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने और न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की मांग की है.
सरकार का पक्ष आना बाकी
इस प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए आरोप भाकपा (माले) के हैं। समाचार लिखे जाने तक राज्य सरकार या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी थी. यदि सरकार की ओर से कोई बयान जारी किया जाता है तो समाचार को उसके अनुसार अपडेट किया जा सकता है.
निष्कर्ष
भाकपा (माले) द्वारा आयोजित राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन ने बिहार में कानून व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है. पार्टी ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि इन आरोपों पर सरकार का पक्ष सामने आना अभी बाकी है.आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और बयानबाजी तेज होने की संभावना है.

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.


















