अरुण यादव बोले- सरकार की संवेदनहीनता का उदाहरण
तीसरा पक्ष ब्यूरो खरीक, भागलपुर (बिहार) :भागलपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) खरीक और नारायणपुर में फार्मासिस्ट की नियुक्ति नहीं होने को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बिहार सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं. राजद के प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार यादव ने आरोप लगाया कि जिले के अन्य सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्टों की नियुक्ति की गई, लेकिन खरीक और नारायणपुर को इस प्रक्रिया से बाहर रखना स्थानीय मरीजों के साथ अन्याय है.
उन्होंने कहा कि दवा वितरण, मरीजों को आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और अस्पताल की दैनिक स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में फार्मासिस्ट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में इन दोनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्ट की नियुक्ति नहीं होना स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है.
भागलपुर के 11 अस्पतालों में नियुक्ति, लेकिन खरीक और नारायणपुर बाहर
अरुण कुमार यादव ने कहा कि भागलपुर जिले के 11 सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्टों की नियुक्ति की गई है, लेकिन खरीक और नारायणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को इस सूची में शामिल नहीं किया गया. उनके अनुसार यह निर्णय स्थानीय जनता की स्वास्थ्य आवश्यकताओं की अनदेखी को दर्शाता है.
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किन मानकों के आधार पर इन दोनों महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्रों को नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर रखा गया. उनका कहना था कि सरकार को इस संबंध में स्पष्ट जवाब देना चाहिए.
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी उठाए सवाल
राजद प्रवक्ता ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए है. उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार कमजोर बनी हुई है तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जनता के हित में सरकार से जवाब मांगना चाहिए.
उनके अनुसार स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी चिंताजनक है और इससे क्षेत्र की जनता में निराशा बढ़ रही है.
बिहपुर विधानसभा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता
अरुण कुमार यादव ने कहा कि बिहपुर विधानसभा क्षेत्र की बड़ी आबादी सरकारी अस्पतालों पर निर्भर है. ऐसे में खरीक और नारायणपुर जैसे प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त स्वास्थ्य संसाधनों का उपलब्ध नहीं होना गंभीर विषय है.
उन्होंने दावा किया कि इन स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्ट के साथ-साथ डॉक्टरों की भी कमी है और मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं हैं.उनका आरोप है कि यह स्थिति बिहार सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति उदासीनता को दर्शाती है.
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फार्मासिस्ट की नियुक्ति क्यों है महत्वपूर्ण?
किसी भी सरकारी अस्पताल या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फार्मासिस्ट की भूमिका केवल दवा वितरण तक सीमित नहीं होती.उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं—
मरीजों को डॉक्टर के पर्चे के अनुसार सही दवा उपलब्ध कराना.
दवाओं के सुरक्षित भंडारण और रिकॉर्ड का रखरखाव.
दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करना.
मरीजों को दवा सेवन से संबंधित आवश्यक जानकारी देना.
अस्पताल की औषधि व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना.
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी स्वास्थ्य केंद्र में फार्मासिस्ट उपलब्ध नहीं होते हैं तो दवा वितरण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और मरीजों को समय पर उपचार मिलने में कठिनाई हो सकती है.
RJD की प्रमुख मांगें
राजद ने बिहार सरकार से मांग की है कि—
खरीक और नारायणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शीघ्र फार्मासिस्ट की नियुक्ति की जाए.
डॉक्टरों और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य कर्मियों के रिक्त पदों को भरा जाए.
बिहपुर विधानसभा क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए विशेष योजना बनाई जाए.
नियुक्ति प्रक्रिया में अपनाए गए मानकों को सार्वजनिक किया जाए.
निष्कर्ष
भागलपुर जिले के खरीक और नारायणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्ट की नियुक्ति नहीं होने का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है. राजद ने इसे स्वास्थ्य सेवाओं की अनदेखी बताते हुए सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठाए हैं. वहीं इस मामले पर सरकार या स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि इन स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक स्वास्थ्य कर्मियों की जल्द नियुक्ति कर चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ बनाया जाए.

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