आइसा ने की हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई की मांग
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना: बिहार की राजधानी पटना में आज 7.5 CGPA की अनिवार्यता और नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विरोध में आयोजित छात्र मार्च के दौरान तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली है.ऑल इंडिया स्टूडेंट्स’ एसोसिएशन (आइसा) के नेतृत्व में गांधी मैदान से राजभवन तक निकाले गए इस मार्च को पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया. आइसा ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, कई छात्र घायल हुए और नौ छात्र नेताओं एवं छात्रों को हिरासत में लिया गया .
यह जानकारी आइसा, बिहार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है. पुलिस की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है.

7.5 CGPA अनिवार्यता और NEP 2020 के विरोध में निकाला गया छात्र मार्च
आइसा के अनुसार, छात्र संगठन ने 7.5 CGPA की अनिवार्यता को वापस लेने तथा नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के छात्र-विरोधी प्रावधानों को समाप्त करने की मांग को लेकर गांधी मैदान से राजभवन तक विशाल छात्र मार्च आयोजित किया.
संगठन का दावा है कि इस प्रदर्शन में पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, जयप्रकाश विश्वविद्यालय सहित बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नई व्यवस्था से बड़ी संख्या में छात्रों के अवसर प्रभावित हो रहे हैं और सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए.
छात्र नेताओं ने किया मार्च का नेतृत्व
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मार्च का नेतृत्व आइसा बिहार के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड धनंजय, राज्य सचिव कॉमरेड दीपांकर, राज्य उपाध्यक्ष कॉमरेड मनीषा, पटना विश्वविद्यालय इकाई की सचिव कॉमरेड सबा, अध्यक्ष कॉमरेड नीतीश, संयुक्त सचिव कॉमरेड अदिति तथा कॉमरेड दीपक यदुवंशी ने किया.
इसके अलावा आशीष, विवेक आनंद सुंदर, विकास, रणवीर, मोनू सहित कई छात्र कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल रहे.
राजभवन मार्च के दौरान लाठीचार्ज का आरोप
आइसा का आरोप है कि जब छात्र शांतिपूर्ण तरीके से राजभवन की ओर बढ़ रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया. संगठन के अनुसार, बिना किसी उकसावे के छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, जिससे कई छात्र घायल हो गए.
प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि छात्र आशीष के सिर और कान में गंभीर चोट लगी, जबकि छात्र नेता नीतीश के हाथ में गहरी चोट आई. इसके अलावा कई अन्य छात्रों के साथ कथित रूप से मारपीट की गई और उन्हें जबरन पुलिस वाहनों में बैठाया गया.
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
सड़क पर बैठकर छात्रों ने दर्ज कराया विरोध
आइसा के मुताबिक, लाठीचार्ज के बाद भी छात्रों ने हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया और शांतिपूर्ण तरीके से सड़क पर बैठकर अपना विरोध दर्ज कराया.
संगठन का आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने आंदोलन को समाप्त कराने के लिए बल प्रयोग जारी रखा और कई छात्र नेताओं को हिरासत में ले लिया.
किन छात्र नेताओं को हिरासत में लेने का दावा?
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि गांधी मैदान थाना पुलिस ने आइसा के राज्य अध्यक्ष धनंजय, राज्य सचिव दीपांकर, छात्र नेता नीतीश, विवेक और विकास को हिरासत में लिया.
इसके अतिरिक्त आम छात्रों में ऋषु और अमर यादव को भी पुलिस द्वारा डिटेन किए जाने का दावा किया गया है. संगठन का कहना है कि कुल नौ छात्र नेताओं एवं छात्रों को हिरासत में लिया गया.
पुलिस प्रशासन की ओर से हिरासत में लिए गए लोगों की आधिकारिक सूची या विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है.
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आइसा ने सरकार और पुलिस कार्रवाई की आलोचना की
आइसा, बिहार ने प्रेस विज्ञप्ति में पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज़ को लाठी और गिरफ्तारी के जरिए दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है.
संगठन का कहना है कि शिक्षा के अधिकार और समान अवसर की मांग करने वाले छात्रों की बात सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग करना उचित नहीं है.आइसा ने सरकार से छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है.
आइसा की प्रमुख मांगें
प्रेस विज्ञप्ति में संगठन ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं—
हिरासत में लिए गए सभी छात्र नेताओं एवं छात्रों को तत्काल और बिना शर्त रिहा किया जाए.
कथित लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.
घायल छात्रों के समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.
7.5 CGPA की अनिवार्यता को तत्काल वापस लिया जाए।
नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के छात्र-विरोधी प्रावधानों को समाप्त किया जाए.
छात्र आंदोलन जारी रखने का ऐलान
आइसा ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारियों और प्रशासनिक कार्रवाई से छात्र आंदोलन को रोका नहीं जा सकता.संगठन का कहना है कि शिक्षा के लोकतांत्रिक अधिकार, समान अवसर और छात्र हितों की रक्षा के लिए उसका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा.
संगठन का दावा है कि यदि सरकार छात्रों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
निष्कर्ष
पटना में 7.5 CGPA अनिवार्यता और नई शिक्षा नीति के विरोध में निकाला गया छात्र मार्च अब राजनीतिक और शैक्षणिक चर्चा का विषय बन गया है. एक ओर आइसा ने पुलिस पर लाठीचार्ज और छात्रों के दमन का आरोप लगाया है, वहीं पुलिस प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है. ऐसे में पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर प्रशासनिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी. फिलहाल छात्र संगठन अपनी मांगों पर कायम है और आंदोलन जारी रखने की बात कह रहा है.

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