छात्रों ने पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार, NTA की जवाबदेही और शिक्षा सुधार की मांग उठाई
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना : दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन की गूंज अब बिहार की राजधानी पटना तक पहुंच गई है. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स’ एसोसिएशन (आइसा) की ओर से आयोजित छात्र-युवा आक्रोश दिवस के माध्यम से बड़ी संख्या में छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक की घटनाओं पर रोक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग उठाई,यह कार्यक्रम पटना विश्वविद्यालय परिसर स्थित पटना कॉलेज कैंटीन के सामने आयोजित किया गया, जहां विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्र-युवा एकत्र हुए.
कार्यक्रम का उद्देश्य दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त करना और शिक्षा से जुड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करना था.
फोटो प्रदर्शनी से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत कल दोपहर 12:30 बजे फोटो प्रदर्शनी के साथ हुई. प्रदर्शनी में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं को चित्रों और पोस्टरों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया. आयोजकों के अनुसार, प्रदर्शनी में उन छात्रों की तस्वीरें भी प्रदर्शित की गईं जिनकी मौत को शिक्षा व्यवस्था से जुड़े संस्थागत दबावों का परिणाम बताया गया. इसके अलावा जंतर-मंतर आंदोलन की झलकियां, आंदोलन से जुड़े छात्र नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की तस्वीरें तथा छात्रों द्वारा तैयार किए गए रचनात्मक पोस्टर भी आकर्षण का केंद्र रहे.
आयोजकों का कहना था कि प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल घटनाओं को दिखाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में मौजूद चुनौतियों पर समाज का ध्यान आकर्षित करना था.

ओपन माइक में छात्रों ने साझा किए अपने अनुभव
फोटो प्रदर्शनी के बाद आयोजित ओपन माइक कार्यक्रम में विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों ने अपने विचार रखे.वक्ताओं ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की.
इस दौरान कई छात्रों ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार गड़बड़ियों से लाखों अभ्यर्थियों का समय, मेहनत और भविष्य प्रभावित होता है.छात्रों ने निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया.
कार्यक्रम में भाग लेने वाली छात्रा दिशा ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर आधारित अपनी लिखी कविता प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित छात्रों ने सराहा.
नेताओं ने उठाए शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे
सभा को संबोधित करते हुए आइसा के विभिन्न पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है.उनके अनुसार लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल तथा शिक्षा के बढ़ते निजीकरण ने छात्रों की चिंताओं को बढ़ाया है.
वक्ताओं ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन केवल एक परीक्षा या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और समान अवसर सुनिश्चित करने की व्यापक मांग से जुड़ा हुआ है. उनका दावा था कि देशभर के विभिन्न राज्यों से छात्रों का समर्थन इस आंदोलन को मिल रहा है.

कई छात्र नेताओं ने निभाई सक्रिय भूमिका
कार्यक्रम का संचालन आइसा पटना विश्वविद्यालय सचिव कॉमरेड सबा ने किया. आयोजन में आइसा बिहार राज्य सचिव कॉमरेड दीपांकर, राज्य उपाध्यक्ष कॉमरेड मनीषा, पटना विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष कॉमरेड आशीष, कॉमरेड विश्वजीत, कॉमरेड वीर आदित्य, भाकपा (माले) कार्यकर्ता कॉमरेड राजन सहित कई छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया.
सभा के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी कार्यक्रम को अलग पहचान दी. जनप्रतिरोधी गीतों के माध्यम से छात्रों को संबोधित करते हुए कॉमरेड राजन ने शिक्षा के सवालों पर एकजुट रहने का संदेश दिया.
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जंतर-मंतर आंदोलन के समर्थन में लगाए गए नारे
कार्यक्रम के समापन पर छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर नारे लगाए. प्रदर्शन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो, NTA की जवाबदेही तय करो, पेपर लीक बंद करो, शिक्षा बचाओ, भविष्य बचाओ और भाजपा सरकार जवाब दो जैसे नारे लगाए गए.
इन नारों के माध्यम से छात्रों ने केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.
आगे भी जारी रहेगा आंदोलन का समर्थन
आयोजकों ने घोषणा की कि जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और शिक्षा बचाओ अभियान के समर्थन में भविष्य में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.उनका कहना था कि जब तक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, शिक्षा में समान अवसर और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक छात्र अपनी लोकतांत्रिक आवाज उठाते रहेंगे.
शिक्षा सुधार पर राष्ट्रीय बहस तेज
पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवाद, पेपर लीक की घटनाएं और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठे सवाल देशभर में चर्चा का विषय बने हैं.ऐसे में विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रम शिक्षा सुधार की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस का हिस्सा बना रहे हैं.
हालांकि इन मांगों और आरोपों पर केंद्र सरकार तथा संबंधित संस्थाओं की ओर से समय-समय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आती रही हैं. ऐसे मुद्दों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच, सरकारी निर्णय और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही तय होते हैं.
निष्कर्ष
पटना विश्वविद्यालय में आयोजित छात्र-युवा आक्रोश दिवस ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों को सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है. जंतर-मंतर आंदोलन के समर्थन में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों ने अपनी लोकतांत्रिक भागीदारी दर्ज कराते हुए शिक्षा में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग दोहराई.आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन मांगों पर सरकार और संबंधित संस्थाएं किस प्रकार प्रतिक्रिया देती हैं तथा शिक्षा व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.
समाचार स्रोत: आइसा (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स’ एसोसिएशन) की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति, पटना, 20 जुलाई 2026 के आधार पर।

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