पटना में AISA-RYA के कार्यक्रम में छात्र-युवाओं ने परीक्षा, शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल उठाए
तीसरा पक्ष ब्यूरो : पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में 6 सितंबर 2026 को AISA और RYA के संयुक्त तत्वावधान में GENZ Rising कार्यक्रम आयोजित किया गया.कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-युवा, Gen-Z और Gen-Alpha के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न आंदोलनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया. कार्यक्रम का केंद्र शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता, लोकतांत्रिक अधिकार, पुलिस दमन और छात्र-युवा आंदोलनों से जुड़े सवाल रहे.
कार्यक्रम को भाकपा-माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने मुख्य रूप से संबोधित किया.बिहार में चर्चित Gen-Alpha युवा आदित्य कुमार समेत कई छात्र-युवा वक्ताओं ने भी अपनी बात रखी.
चार सत्रों में हुई छात्र-युवा मुद्दों पर चर्चा
GENZ Rising कार्यक्रम को चार सत्रों में आयोजित किया गया. पहले सत्र ,जुल्म फिर जुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है, में पुलिस दमन और आंदोलनों से जुड़े अनुभव साझा किए गए.
इस दौरान विशाल ने पुलिस कार्रवाई से जुड़े अपने अनुभव बताए.सिवान में पुलिसिया गोलीबारी के शिकार हुए आरिफ ने भी अपनी बात रखी. पटना विश्वविद्यालय की छात्र नेता सबा ने आंदोलन के दौरान जेल जाने और जेल में बिताए अनुभवों को साझा किया.
जहानाबाद में NEET परीक्षा से जुड़े मामले में पीड़िता के पिता नवीन ने शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को सामने रखा.नवादा के स्कूली छात्रों सहित Gen-Z और Gen-Alpha के युवाओं ने भी सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़े सवाल उठाए.

छात्र आंदोलनों और शिक्षा व्यवस्था पर बहस
दूसरे सत्र आंदोलन की आवाज़ में छात्र-युवा आंदोलनों और उनके संघर्षों पर चर्चा हुई. इसमें प्राध्यापक एवं विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 आंदोलन की नेता चिंटू कुमारी, पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, RYA के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा, झारखंड JPSC आंदोलन की नेता हबीबा और जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े इरफान ने संबोधित किया.
चिंटू कुमारी ने विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 के आंदोलन का उल्लेख करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और नए विश्वविद्यालय अधिनियम को निरस्त करने की मांग रखी.
पालीगंज विधायक संदीप सौरभ ने बिहार की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में शिक्षा के बुनियादी ढांचे, विद्यालय भवन और बच्चों की पढ़ाई से जुड़े गंभीर प्रश्न हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सवाल उठाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है.
JPSC आंदोलन की नेता हबीबा ने झारखंड के छात्र आंदोलनों का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों से आने वाले छात्र वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा के समय पेपर लीक जैसी समस्याएं उनके भविष्य को प्रभावित करती हैं।
RYA अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने आरोप लगाया कि बिहार के छात्र-युवा लगातार अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर सुनवाई करने के बजाय दमन का रास्ता अपना रही है.

नेहा बोरा ने उठाए BPSC और दरोगा भर्ती के सवाल
कार्यक्रम में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने बिहार के लोगों को जंतर-मंतर आंदोलन को समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि बिहार की जनता और छात्र-युवाओं ने आंदोलन को मजबूती दी.
नेहा ने BPSC 70वीं परीक्षा में कथित धांधली और दरोगा भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से जवाब मांगने की बात कही. उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाब देना होगा.
उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों और उनके परिवारों पर कथित दमन का मुद्दा भी उठाया. उनके संबोधन में सबा आफरीन समेत आंदोलन से जुड़े छात्रों के साथ कथित कार्रवाई और उत्पीड़न के आरोपों का उल्लेख किया गया.
नेहा ने कहा कि छात्र-युवा शिक्षा, रोजगार, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के सवालों पर एकजुट हों. उन्होंने बिहार के छात्र आंदोलन को व्यापक जनआंदोलन में बदलने की अपील की.
उन्होंने SIR प्रक्रिया से जुड़े मताधिकार और नागरिकता संबंधी सवालों पर पैदा हुई चिंताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि इन मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए.

दीपंकर भट्टाचार्य ने शिक्षा को जनआंदोलन बनाने की अपील की
भाकपा-माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि Gen-Z केवल एक पीढ़ी का नाम नहीं है, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष और अपने अधिकारों की लड़ाई की अभिव्यक्ति है. उन्होंने शिक्षा, रोजगार, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और सम्मान को युवाओं के प्रमुख सवालों के रूप में सामने रखा.
उन्होंने स्कूल ठीक करो आंदोलन को बिहार में व्यापक जनआंदोलन बनाने की जरूरत बताई. साथ ही ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के साथ वन नेशन, वन एजुकेशन सिस्टम और कॉमन स्कूल सिस्टम पर भी सवाल उठाया.
दीपंकर भट्टाचार्य ने बिहार की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताते हुए विद्यालयों की आधारभूत संरचना, शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता को प्रमुख मुद्दा बताया. उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल छात्र और शिक्षक का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे बिहार के भविष्य का सवाल बनाना होगा.
उन्होंने सोशल मीडिया पर युवाओं और महिलाओं को निशाना बनाए जाने की घटनाओं का भी उल्लेख किया तथा आंदोलनकारी युवाओं को बदनाम करने की राजनीति की आलोचना की.
आंदोलन के मुकदमों को लेकर भी उठी मांग
अपने संबोधन में दीपंकर भट्टाचार्य ने जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े मुकदमों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि इन मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया हो सकती है, तो किसान आंदोलन और शाहीन बाग आंदोलन से जुड़े मुकदमों को भी वापस लिया जाना चाहिए.
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में व्यंग्यकार एवं प्रोफेसर डॉ. मेडुसा ने भी संबोधित किया। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया पर सही सूचनाओं को प्रसारित करने और आंदोलनों को आगे बढ़ाने की अपील की.
ये भी पढ़े :बिहार में बाढ़ से 13 जिले प्रभावित, भाकपा माले ने मांगा मुआवजा
ये भी पढ़े :Please Save My Future — नन्हीं आँखों में छिपा भविष्य का डर
Gen-Z के सवाल अब राजनीतिक विमर्श के केंद्र में
GENZ Rising कार्यक्रम में सामने आए मुद्दों से स्पष्ट है कि बिहार के छात्र-युवाओं के बीच शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बड़े सवाल बन चुके हैं. कार्यक्रम में वक्ताओं ने इन मुद्दों को लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक न्याय के सवालों से जोड़ने की कोशिश की.
AISA-RYA का यह कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित हुआ जब प्रतियोगी परीक्षाओं, शिक्षा व्यवस्था और युवा रोजगार को लेकर राजनीतिक बहस जारी है. कार्यक्रम में छात्र-युवा आंदोलनों को व्यापक सामाजिक आंदोलन से जोड़ने और सरकार से विभिन्न मुद्दों पर जवाब मांगने का आह्वान किया गया.
निष्कर्ष
GENZ Rising’ के जरिए AISA-RYA ने बिहार के छात्र-युवा सवालों को एक साझा मंच पर लाने की कोशिश की। शिक्षा, रोजगार, परीक्षा में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर उठी आवाज अब आगे किस रूप में आंदोलन का रूप लेती है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा.

I am a blogger and social media influencer. I have about 5 years experience in digital media and news blogging.


















