बिहार में गूँजी Gen-Z की आवाज़, शिक्षा-रोजगार पर छात्र लामबंद

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Ajit Kumar

बिहार
पटना में AISA-RYA के Gen-Z कार्यक्रम में छात्र-युवा शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर चर्चा करते हुए

पटना में AISA-RYA कार्यक्रम में छात्र-युवाओं ने शिक्षा, रोजगार, परीक्षा और अधिकारों के सवाल उठाए

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना : 6 सितंबर को पटना के एस.के. मेमोरियल हॉल में AISA-RYA के आह्वान पर बिहार में गूँजेगी Gen-Z की आवाज़ कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें बिहार के विभिन्न हिस्सों से आए छात्र-युवा, Gen-Z और Gen-Alpha के प्रतिनिधि तथा अलग-अलग आंदोलनों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता, पुलिस-प्रशासनिक दमन और छात्र-युवा अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई.

कार्यक्रम को तीन सत्रों में विभाजित किया गया, जिनमें छात्र-युवा आंदोलनों के अनुभवों से लेकर भविष्य की आंदोलनकारी दिशा तक पर वक्ताओं ने अपनी बात रखी.

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दमन और संघर्ष के अनुभवों को मिला मंच

पहले सत्र , ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है, में उन छात्र-युवा आवाजों को मंच दिया गया, जिन्होंने हाल के आंदोलनों में संघर्ष और दमन का सामना किया है.

पुलिस कार्रवाई का सामना कर चुके विशाल ने अपने अनुभव साझा किए.पटना विश्वविद्यालय आंदोलन में जेल गईं छात्रा सबा आफरीन ने छात्र आंदोलनों के दमन और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए.

नोट्रे डेम एकेडमी, पटना की छात्रा भव्या ने आंदोलन और महिलाओं के ऑनलाइन उत्पीड़न के मुद्दे पर बात रखी और आंदोलन को तेज करने की जरूरत बताई. वहीं जहानाबाद में NEET से जुड़े मामले की पीड़ित परिवार की ओर से नवीन ने न्याय और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए.

पारा-मेडिकल आंदोलन के नेता भारत भूषण ने स्वास्थ्य शिक्षा और छात्रों के संघर्ष की स्थिति सामने रखी. नवादा की स्कूली छात्राओं रूपा कुमारी और उन्नति ने स्कूली शिक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए. प्रियतम ने BPSC आंदोलन के अनुभव साझा किए, जबकि सरून ने बिहार दारोगा भर्ती से जुड़े छात्रों के सवालों को सामने रखा.

विश्वविद्यालय और रोजगार के सवाल पर चर्चा

दूसरे सत्र आंदोलन की आवाज़ में विश्वविद्यालय, शिक्षा, रोजगार और छात्र-युवा आंदोलनों से जुड़े व्यापक राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई.

प्राध्यापक एवं विश्वविद्यालय एक्ट 1976 आंदोलन की नेता चिंटू कुमारी ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर अपनी बात रखी. पालीगंज के विधायक संदीप सौरभ ने छात्र-युवाओं के सवालों को विधानसभा और व्यापक राजनीतिक मंचों तक ले जाने की प्रतिबद्धता जताई.

RYA के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने रोजगार और नौजवानों के अधिकारों को लेकर आंदोलन को मजबूत करने की बात कही. JPSC आंदोलन की प्रमुख आवाज हबीबा ने झारखंड के छात्र-युवा आंदोलनों के अनुभव साझा किए.

जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े इरफान ने देशभर में उभर रहे छात्र-युवा आंदोलनों और उनके बीच एकजुटता की जरूरत पर चर्चा की.

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नेहा बोरा ने उठाए प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दे

तीसरे सत्र , जो दरिया झूम के उठे हैं, तिनकों से न टाले जाएँगे, में छात्र-युवा आंदोलनों की आगे की दिशा पर चर्चा हुई.

AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने छात्र आंदोलनों को व्यापक सामाजिक संघर्षों से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया.उन्होंने 70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने, दरोगा परीक्षा में कथित धांधली, BSSC की भर्तियों, प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों को OMR कॉपी उपलब्ध कराने और परीक्षा कैलेंडर जारी करने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया.

नेहा ने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत 7.5 CGPA की मांग को लेकर भी सवाल उठाया. इसके साथ ही उन्होंने सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सामने रखा.

कार्यक्रम में प्राध्यापक एवं व्यंग्यकार डॉ. मेड्यूसा ने शिक्षा और समाज से जुड़े सवालों पर अपनी बात रखी तथा सोशल मीडिया के माध्यम से आवाज उठाने की आवश्यकता बताई.

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दीपांकर भट्टाचार्य बोले- युवा आवाज को दबाया नहीं जा सकता

भाकपा-माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि देश और बिहार में शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर उठ रही युवा आवाज को दबाया नहीं जा सकता. उन्होंने छात्र-युवा आंदोलन की तर्ज पर किसान आंदोलन को भी तेज करने की बात कही.

कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह संदेश देने की कोशिश की कि Gen-Z को केवल सोशल मीडिया पर सक्रिय पीढ़ी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक यह ऐसी पीढ़ी है जो अपने भविष्य, शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर सवाल उठा रही है.

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शिक्षा और रोजगार के सवाल पर संघर्ष का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान बिहार के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति, प्रतियोगी परीक्षाओं की अनियमितता, रोजगार के संकट और छात्रों की आवाज पर कथित दमन जैसे मुद्दों को लेकर आगे संघर्ष करने का संकल्प लिया गया.

AISA-RYA के इस कार्यक्रम ने छात्र-युवा राजनीति में शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों को केंद्र में रखते हुए आंदोलन को व्यापक बनाने का संदेश दिया. अब देखना होगा कि कार्यक्रम में उठाए गए सवाल आने वाले दिनों में बिहार के छात्र-युवा आंदोलनों की दिशा को किस तरह प्रभावित करते हैं.

निष्कर्ष

पटना में आयोजित ,बिहार में गूँजेगी Gen-Z की आवाज़ कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि छात्र-युवा केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं. कार्यक्रम में उठे सवाल बिहार की शिक्षा और रोजगार व्यवस्था को लेकर युवाओं की बढ़ती बेचैनी को सामने लाते हैं. अब इन मांगों और आंदोलनों का असर सरकार, प्रशासन और आगामी छात्र-युवा राजनीति पर कितना पड़ता है, यह आने वाला समय तय करेगा.

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