पटना में 65% आरक्षण को लेकर उबाल, कॉलेजियम खत्म करने की मांग पर प्रदर्शन

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Ajit Kumar

बिहार
पटना में 65% आरक्षण को लेकर उबाल, कॉलेजियम खत्म करने की मांग पर प्रदर्शन

पटना में गांधी मैदान से उठा आरक्षण का मुद्दा, निजी संस्थानों और न्यायपालिका में भी आरक्षण की मांग को लेकर पटना में हजारों युवा सड़कों पर, आंदोलन जारी रखने का ऐलान

तीसरा पक्ष ब्यूरो | पटना, 8 सितंबर 2026: बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को आरक्षण और सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ. अलग-अलग दलित संगठनों और आरक्षण समर्थक समूहों से जुड़े प्रदर्शनकारी गांधी मैदान से लोक भवन की ओर मार्च करने के लिए जुटे.

प्रदर्शनकारियों ने SC, ST, EBC और OBC वर्गों के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने, निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने और न्यायपालिका में भी आरक्षण की व्यवस्था किए जाने की मांग उठाई. इसके साथ ही न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम व्यवस्था समाप्त करने की मांग भी प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा रही.

गांधी मैदान से शुरू हुआ विरोध मार्च

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प्रदर्शनकारी गांधी मैदान में एकत्र हुए और वहां से लोक भवन की तरफ बढ़े. आंदोलन को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के लिए रास्ते में बैरिकेड लगाए.

मार्च जब जेपी गोलंबर के पास पहुंचा तो पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया. इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके चलते पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई.

65% आरक्षण की मांग सबसे प्रमुख

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग बिहार में SC, ST, EBC और OBC वर्गों के लिए आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 65 प्रतिशत करना है.

आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से वंचित वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाना जरूरी है. इससे पहले भी बिहार में आरक्षण का दायरा बढ़ाने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस होती रही है.

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निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की मांग

प्रदर्शन में सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों के अलावा निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू करने की मांग उठाई गई.

आंदोलनकारियों का तर्क है कि रोजगार के अवसरों का एक बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र में है, इसलिए सामाजिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था वहां भी सुनिश्चित की जानी चाहिए.

कॉलेजियम सिस्टम खत्म करने की मांग

प्रदर्शन में न्यायपालिका से जुड़ा मुद्दा भी प्रमुख रहा। प्रदर्शनकारियों ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में मौजूदा कॉलेजियम सिस्टम को समाप्त करने की मांग की.

उनकी मांगों में न्यायपालिका में आरक्षण लागू करना भी शामिल है. इसके अलावा आरक्षण से संबंधित कानूनों को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कर उन्हें न्यायिक समीक्षा से संरक्षण देने की मांग भी उठाई गई.

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

पटना में हुए इस प्रदर्शन के बाद अब सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। खास तौर पर 65% आरक्षण, निजी क्षेत्र में आरक्षण और न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति और सामाजिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।

क्या हैं प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें?

  • SC, ST, EBC और OBC के लिए 65% आरक्षण
  • निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करना
  • न्यायपालिका में आरक्षण की व्यवस्था
  • कॉलेजियम सिस्टम समाप्त करना
  • आरक्षण संबंधी कानूनों को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करना
  • सामाजिक रूप से वंचित वर्गों को अधिक प्रतिनिधित्व देना

पटना में मंगलवार को हुआ प्रदर्शन केवल आरक्षण की सीमा बढ़ाने की मांग तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी रोजगार, निजी क्षेत्र और न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व से जुड़े कई मुद्दों को एक साथ उठाया.

अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और प्रदर्शनकारी आगे आंदोलन को किस रूप में बढ़ाते हैं.

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