पटना में प्रेस वार्ता के दौरान नेहा बोरा ने छात्र आंदोलन से जुड़े मुकदमे वापस लेने और गिरफ्तार छात्रों की रिहाई की मांग की
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना : बिहार में छात्र आंदोलन के बाद दर्ज मुकदमों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है.ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नेहा बोरा ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि आंदोलन के दौरान छात्रों से किए गए वादों का पालन नहीं किया जा रहा है. उनका कहना है कि सरकार ने आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब इसके विपरीत छात्रों, छात्र नेताओं और आंदोलन का समर्थन करने वाले विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई जारी है.
पटना में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान नेहा बोरा ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए सरकार से तत्काल सभी मुकदमे वापस लेने और गिरफ्तार छात्रों की रिहाई सुनिश्चित करने की मांग किया है .
सरकार पर समझौते से पीछे हटने का आरोप
नेहा बोरा ने कहा कि बिहार में पेपर लीक के खिलाफ चला छात्र आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण था.इस आंदोलन में लाखों छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग उठाई.
उनके अनुसार, आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से यह भरोसा दिया गया था कि छात्रों पर दर्ज मुकदमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाएगा. लेकिन अब भी बड़ी संख्या में छात्र और छात्र नेता विभिन्न मामलों का सामना कर रहे हैं.उनका आरोप है कि सरकार अपने ही आश्वासन से पीछे हट रही है.
छात्रों और छात्र नेताओं पर कार्रवाई का मुद्दा
प्रेस वार्ता में नेहा बोरा ने कहा कि आंदोलन के दौरान हजारों छात्रों पर मुकदमे दर्ज किए गए और अनेक छात्रों को गिरफ्तार भी किया गया.उनका दावा है कि कई छात्र अब भी कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और भविष्य प्रभावित हो रहा है.
उन्होंने सरकार से मांग किया कि —
छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे बिना शर्त वापस लिए जाएं.
गिरफ्तार छात्र-छात्राओं और छात्र नेताओं की जल्द रिहाई सुनिश्चित की जाए.
आंदोलन से जुड़े मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर न्यायपूर्ण निर्णय लिया जाए.
भाकपा–माले नेताओं को निशाना बनाने का आरोप
नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि सरकार केवल छात्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि छात्र आंदोलन का समर्थन करने वाले भाकपा–माले नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई कर रही है.
उन्होंने कहा कि सिवान, छपरा और अन्य जिलों में कई नेताओं पर राजनीतिक दुर्भावना के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं. उनके अनुसार, जीरादेई के पूर्व विधायक अमरजीत कुशवाहा सहित कई नेताओं पर गंभीर धाराएं लगाई गई हैं. वहीं पूर्व विधायक दल के नेता महबूब आलम और विधायक जूही महबूबा का नाम भी विभिन्न मामलों में शामिल किया गया है.
नेहा बोरा का कहना है कि लोकतांत्रिक आंदोलन का समर्थन करना अपराध नहीं माना जा सकता और राजनीतिक मतभेदों के आधार पर कार्रवाई उचित नहीं है.

डीजीपी से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात
प्रेस वार्ता के बाद नेहा बोरा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मुलाकात किया .
प्रतिनिधिमंडल ने डीजीपी के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें शामिल हैं,
छात्रों और छात्र नेताओं पर दर्ज मुकदमों को वापस लेना.
गिरफ्तार महिला एक्टिविस्टों की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करना.
आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की समीक्षा करना.
निष्पक्ष जांच के बाद उचित प्रशासनिक कदम उठाना.
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, डीजीपी ने पूरे मामले पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया.
इस प्रतिनिधिमंडल में विधायक अरुण सिंह, अजीत कुमार सिंह, शिवप्रकाश रंजन और कुमार परवेज़ भी मौजूद रहे.
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बेउर जेल में बंद आंदोलनकारियों से मुलाकात
इससे पहले भाकपा–माले विधायक अरुण सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पटना स्थित बेउर केंद्रीय कारा जाकर गिरफ्तार आंदोलनकारियों से मुलाकात किया है.
प्रतिनिधिमंडल ने पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, आइसा राज्य अध्यक्ष धनंजय, राज्य सचिव दीपंकर मिश्रा, उपाध्यक्ष सबा आफरीन, मीडिया प्रभारी दिव्यम, तेजप्रताप यादव तथा शांतनु शेखर सहित अन्य बंद नेताओं और कार्यकर्ताओं का हालचाल जाना.
मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें बताया कि छात्र आंदोलन को समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन मिल रहा है और उनकी रिहाई तक आंदोलन जारी रहेगा.
30 जुलाई को राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस की घोषणा
नेहा बोरा ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और दमनात्मक कार्रवाई रोकने की दिशा में तत्काल कदम नहीं उठाती, तो 30 जुलाई को पूरे बिहार में राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस मनाया जाएगा.
उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में छात्र, युवा, शिक्षक और लोकतांत्रिक अधिकारों में विश्वास रखने वाले नागरिक भाग लेकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे. उनका कहना है कि यह कार्यक्रम लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने का प्रयास होगा.
छात्र आंदोलन और वर्तमान विवाद
बिहार में हाल के छात्र आंदोलनों का मुख्य मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पेपर लीक जैसे मामलों में जवाबदेही तय करना रहा है.
छात्र संगठनों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में सुधार लाना था, जबकि सरकार और प्रशासन का पक्ष यह रहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है. इसी कारण आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे और पुलिस कार्रवाई अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है.
आगे क्या हो सकता है?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है. यदि मुकदमों की वापसी या अन्य मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है, तो 30 जुलाई को प्रस्तावित राज्यव्यापी प्रतिवाद बिहार की राजनीति और छात्र आंदोलन दोनों के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है.
वहीं, यदि सरकार और छात्र संगठनों के बीच संवाद आगे बढ़ता है, तो विवाद का समाधान बातचीत के माध्यम से भी निकल सकता है.
निष्कर्ष
पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नेहा बोरा ने बिहार सरकार पर छात्र आंदोलन के दौरान हुए समझौते का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है.उन्होंने छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, गिरफ्तार आंदोलनकारियों की रिहाई और पुलिस कार्रवाई की समीक्षा की मांग दोहराई. साथ ही 30 जुलाई को राज्यव्यापी प्रतिवाद दिवस आयोजित करने की घोषणा भी की गई है.
फिलहाल यह आरोप और मांगें संबंधित पक्षों के सार्वजनिक बयानों पर आधारित हैं.अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या आधिकारिक निर्णय लेती है और आने वाले दिनों में छात्र आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है.

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