छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई का माले ने किया विरोध, 25 जुलाई के बिहार बंद को समर्थन

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Ajit Kumar

बिहार
NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्र आंदोलन और भाकपा (माले) द्वारा 25 जुलाई बिहार बंद को समर्थन से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर,

गिरफ्तार छात्रों की रिहाई की मांग, शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने की अपील

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 24 जुलाई 2026: बिहार में NEET पेपर लीक को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच भाकपा (माले) ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है. पार्टी के राज्य सचिव कुणाल ने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न जिलों में आंदोलनरत छात्रों पर लाठीचार्ज, गिरफ्तारी और अन्य दमनात्मक कार्रवाइयाँ लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन हैं. उन्होंने 25 जुलाई को प्रस्तावित बिहार बंद को पार्टी का नैतिक समर्थन देने की घोषणा करते हुए सरकार से गिरफ्तार छात्रों और नेताओं की तत्काल रिहाई तथा दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है .

बिहार के कई जिलों में छात्र आंदोलन पर कार्रवाई का आरोप

भाकपा (माले) के अनुसार, NEET पेपर लीक के विरोध में बिहार के विभिन्न जिलों में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. पार्टी का दावा है कि अब तक राज्य के 18 जिलों में आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया गया है. पार्टी का कहना है कि सरकार छात्रों की मांगों पर जवाब देने के बजाय आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है.

माले का आरोप है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ कठोर कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है.

आइसा नेताओं की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि पटना में आइसा के राज्य सचिव दीपंकर मिश्र और राज्य उपाध्यक्ष सबा आफरीन को पुलिस ने हिरासत में लिया है.पार्टी ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के बाद उनके ठिकाने की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे कानूनी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों को लेकर सवाल खड़े होते हैं.

भाकपा (माले) ने मांग किया कि पुलिस तत्काल गिरफ्तारी से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करे और दोनों नेताओं सहित सभी गिरफ्तार छात्र-छात्राओं को बिना शर्त रिहा किया जाए.

फर्जी मुकदमों का आरोप, न्यायिक जांच की मांग

पार्टी ने आरोप लगाया कि विधान परिषद सदस्य शशि यादव, विधायक संदीप सौरभ और आइसा के कई अन्य नेताओं के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं. माले का कहना है कि लोकतांत्रिक विरोध को अपराध के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है.

पार्टी ने सरकार से मांग किया है कि आंदोलनकारियों पर दर्ज कथित फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं तथा पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके.

NEET पेपर लीक पर छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता

भाकपा (माले) ने कहा कि NEET पेपर लीक जैसे मामलों का सबसे अधिक असर उन लाखों छात्रों पर पड़ता है जो लंबे समय तक कठिन मेहनत और आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के बाद परीक्षा देते हैं.ऐसे मामलों से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं और छात्रों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है.

पार्टी का कहना है कि छात्रों द्वारा निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में आती है और इस आवाज़ को बल प्रयोग से दबाने की बजाय गंभीरता से सुना जाना चाहिए.

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सरकार से उठाए कई सवाल

प्रेस बयान में राज्य सरकार से पूछा गया कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों के पीछे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है.पार्टी ने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार, लापरवाही और कथित पेपर माफिया पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी तो भविष्य में भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति की आशंका बनी रहेगी.

माले ने कहा कि वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई किए बिना केवल आंदोलनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करना समस्या का समाधान नहीं माना जा सकता.

25 जुलाई के बिहार बंद को नैतिक समर्थन

भाकपा (माले) ने 25 जुलाई को प्रस्तावित बिहार बंद को नैतिक समर्थन देने की घोषणा की है.पार्टी ने छात्रों, युवाओं, अभिभावकों और आम नागरिकों से इस बंद के समर्थन की अपील की है.

साथ ही पार्टी ने छात्र संगठनों से भी आग्रह किया कि वे अपने आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और कानून के दायरे में रखते हुए आगे बढ़ाएं, ताकि उनकी मांगें प्रभावी ढंग से समाज और सरकार तक पहुंच सकें.

प्रमुख मांगें

भाकपा (माले) ने अपने बयान में सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं —

सभी गिरफ्तार छात्रों और नेताओं को तत्काल रिहा किया जाए.
आंदोलनकारियों पर दर्ज कथित फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं.
पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए.
NEET पेपर लीक मामले के जिम्मेदार लोगों पर कठोर और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग पर भी पार्टी ने अपना पक्ष दोहराया.

निष्कर्ष

NEET पेपर लीक को लेकर बिहार में छात्र आंदोलन लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है. इस बीच भाकपा (माले) ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं और सरकार से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है. दूसरी ओर, पेपर लीक जैसे मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना छात्रों और अभिभावकों की प्रमुख अपेक्षा बनी हुई है. आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के रुख पर इस पूरे मामले की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी.

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