आरएसएस नेता के बयान पर राजद का हमला, छात्र आंदोलन को विदेशी ताकतों से जोड़ने पर उठाए सवाल

| BY

Ajit Kumar

बिहार
राजद प्रवक्ता अरुण कुमार यादव छात्र आंदोलन पर आरएसएस के बयान की आलोचना करते हुए.

अरुण कुमार यादव ने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसमें कथित तौर पर छात्र-युवा आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होने की बात कही ग. राजद के प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार यादव ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान की भावना के खिलाफ बताया है.

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी वर्ग को अपनी समस्याओं और मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से उठाने का अधिकार है. ऐसे आंदोलनों को विदेशी ताकतों, राष्ट्रविरोधी तत्वों या अन्य आरोपों से जोड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान नहीं, बल्कि उन्हें कमजोर करने का प्रयास माना जाएगा.

राजद ने बयान पर जताई आपत्ति

जारी प्रेस विज्ञप्ति में अरुण कुमार यादव ने कहा कि जब भी छात्र, युवा, किसान, मजदूर या आम नागरिक अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराते हैं, तब भाजपा और आरएसएस से जुड़े नेताओं द्वारा आंदोलनकारियों पर विभिन्न प्रकार के आरोप लगाए जाते हैं.

उनका कहना है कि कभी आंदोलनकारियों को देशद्रोही, कभी आतंकवादी, कभी बाहरी तत्व और अब विदेशी ताकतों का समर्थक बताने जैसी टिप्पणियां की जा रही हैं. राजद के अनुसार इस तरह के बयान लोकतांत्रिक विमर्श को प्रभावित करता हैं और असहमति की आवाज़ को संदेह के दायरे में खड़ा करता हैं.

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

राजद प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि जब किसी मुद्दे पर जनआंदोलन तेज होता है और सरकार पर सवाल उठता हैं, तब वास्तविक मुद्दों पर जवाब देने के बजाय आंदोलन की मंशा पर सवाल खड़ किया जाता है .

उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की मांगों पर विचार करने के बजाय आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जाती है. राजद का दावा है कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है और इससे जनसंवाद कमजोर होता है.

ये भी पढ़े :रामकृपाल यादव के बयान पर RJD का पलटवार, चित्तरंजन गगन बोले- छात्रों को आतंकवादी कहना दुर्भाग्यपूर्ण
ये भी पढ़े :जंतर-मंतर से संसद तक: युवाओं की आवाज़ और लोकतंत्र के सामने खड़े सवाल

लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा पर जोर

अरुण कुमार यादव ने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है. उनके अनुसार असहमति लोकतंत्र की एक स्वाभाविक और आवश्यक प्रक्रिया है, जिसे राष्ट्रविरोध या विदेशी प्रभाव से जोड़ना उचित नहीं माना जा सकता.

उन्होंने कहा कि सरकार और उससे जुड़े संगठनों को आंदोलनों के पीछे की वास्तविक समस्याओं को समझने का प्रयास करना चाहिए, ताकि संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जा सके.

राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी बहस

हाल के दिनों में छात्र आंदोलनों और विभिन्न विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है. विपक्षी दल लगातार सरकार से छात्रों और युवाओं की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाने की मांग कर रहे हैं, जबकि सत्तापक्ष की ओर से आंदोलनों के स्वरूप और उनके पीछे की ताकतों को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए हैं.

ऐसे में राजद की यह प्रतिक्रिया भी राजनीतिक बहस को और तेज करने वाली मानी जा रही है.

निष्कर्ष

राजद ने आरएसएस नेता के बयान को लोकतांत्रिक अधिकारों के सम्मान से जोड़ते हुए सरकार और उसके वैचारिक संगठनों से आंदोलनकारी छात्रों और युवाओं के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील की है. वहीं, इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. आने वाले दिनों में इस विषय पर अन्य दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं.

Trending news

Leave a Comment