बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव: राजद ने चुनाव आयोग और जिला प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

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Ajit Kumar

बिहार
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजद ने चुनाव आयोग और जिला प्रशासन पर संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया.

बांकीपुर उपचुनाव में गैर-सरकारी कर्मियों के इस्तेमाल को लेकर राजद ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 27 जुलाई 2026: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने चुनाव आयोग और जिला प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने आरोप लगाया कि उपचुनाव के दौरान संवैधानिक प्रावधानों और चुनाव संबंधी नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, लेकिन चुनाव आयोग इस पूरे मामले में मौन बना हुआ है.

राजद का कहना है कि मतदाता जागरूकता और मतदान प्रतिशत बढ़ाने के नाम पर कुछ ऐसे लोगों की सेवाएं ली जा रही हैं, जिन्हें चुनावी कार्यों में इस प्रकार शामिल नहीं किया जाना चाहिए. पार्टी ने इसे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है.

किन लोगों को चुनावी कार्य में लगाए जाने का आरोप?

राजद प्रवक्ता के अनुसार, एनयूएलएम (NULM) से जुड़े कर्मियों, जीवीका दीदियों तथा आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिकाओं को घर-घर जाकर मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने का दायित्व दिया गया है.

राजद का आरोप है कि यह अभियान केवल मतदाता जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से मतदाताओं को सत्तारूढ़ दल के पक्ष में मतदान के लिए प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. पार्टी ने यह भी दावा किया है कि मतदान के दिन इन कर्मियों को मतदाताओं को उनके घरों से मतदान केंद्र तक लाने की जिम्मेदारी भी दी गई है.

संवैधानिक प्रावधानों का हवाला

चित्तरंजन गगन ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी दिया गया है .साथ ही उन्होंने रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1951 का हवाला देते हुए दावा किया कि गैर-सरकारी व्यक्तियों या एजेंसियों का चुनावी कार्यों में उपयोग नियमों के अनुरूप नहीं है.

राजद का तर्क है कि एनयूएलएम से जुड़े कर्मी, जीवीका दीदी तथा आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाएं नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं हैं. ऐसे में इन्हें चुनाव संबंधी गतिविधियों में शामिल करना गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा करता है.

मतदान केंद्रों के आसपास मौजूदगी पर भी आपत्ति

राजद ने यह भी आरोप लगाया कि इन कर्मियों की मतदान केंद्रों के आसपास मौजूदगी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है. पार्टी का कहना है कि यदि ऐसे मामलों की शिकायत चुनाव आयोग तक पहुंच चुका है, तो उस पर कार्रवाई नहीं होना आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है.

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पिछले विधानसभा चुनाव का भी किया जिक्र

राजद प्रवक्ता ने कहा कि बिहार विधानसभा आम चुनाव के दौरान भी जीवीका दीदियों को मतदाता जागरूकता कार्यक्रम में लगाया गया था. उन्होंने दावा किया कि उस समय भी कुछ स्थानों पर उन्हें मतदान केंद्रों के आसपास सक्रिय देखा गया था.

पार्टी का आरोप है कि अब बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उसी प्रक्रिया को दोहराने की कोशिश की जा रही है. राजद ने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग किया है.

चुनावी निष्पक्षता पर राजनीतिक बहस

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान लगाए गए इन आरोपों के बाद चुनावी निष्पक्षता और प्रशासनिक भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकता है. विपक्ष का कहना है कि यदि चुनाव प्रक्रिया में शामिल विभिन्न संस्थाओं की भूमिका को लेकर संदेह पैदा होता है, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी प्रश्न उठते हैं.

हालांकि, इस विषय पर जिला प्रशासन या चुनाव आयोग की ओर से इस प्रेस विज्ञप्ति के संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. यदि भविष्य में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी होता है, तो उससे स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी.

निष्कर्ष

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजद द्वारा लगाए गए आरोपों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर नई बहस छेड़ दी है. एक ओर विपक्ष चुनाव आयोग और जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार है.ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच, आधिकारिक दस्तावेजों और चुनाव आयोग के रुख के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.

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