पेपर लीक आंदोलन: सरकार के आदेश के बावजूद कई प्रदर्शनकारी जेल में, भाकपा माले ने उठाए सवाल

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Ajit Kumar

बिहार
पेपर लीक आंदोलन को लेकर भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने सरकार से सभी प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई और आदेश के समान क्रियान्वयन की मांग की.

सरकार के फैसले के समान क्रियान्वयन और सभी गिरफ्तार छात्रों-युवाओं की तत्काल रिहाई की मांग उठी

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना : बिहार में पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र-युवा आंदोलन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने राज्य सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा मुकदमे वापस लेने के आदेश के बावजूद कई जिलों में आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों को अब तक जेल से रिहा नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार के निर्णय को पूरे राज्य में समान और निष्पक्ष तरीके से लागू किया जाना चाहिए.

सरकार के आदेश के क्रियान्वयन पर उठाए सवाल

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कुणाल ने कहा कि बिहार सरकार ने 26 जुलाई की शाम 6 बजे तक पेपर लीक आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने का आदेश जारी किया है.इसके बावजूद कई जिलों में गिरफ्तार छात्रों और युवाओं को जेल में रखा गया है, जबकि कुछ स्थानों पर केवल जमानत (बेल) के आधार पर रिहाई की जा रही है.

उनका कहना है कि यदि सरकार ने मुकदमे वापस लेने का निर्णय लिया है, तो संबंधित मामलों में सभी प्रदर्शनकारियों को बिना किसी भेदभाव के सीधे रिहा किया जाना चाहिए. केवल बेल के माध्यम से रिहाई सरकार के घोषित निर्णय की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता है.

विभिन्न जिलों का हवाला

भाकपा माले ने प्रेस विज्ञप्ति में कई जिलों की स्थिति का उल्लेख करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं.

बेगूसराय में गिरफ्तार 5 लोगों को अब तक रिहा नहीं किए जाने का दावा किया गया है.
भागलपुर में गिरफ्तार 41 लोगों में से 18 नाबालिगों को रिहा कर दिया गया, जबकि 7 लोगों को बेल मिली है. इसके बावजूद 16 लोग अभी भी जेल में बंद बताया गया है.
जमुई में 8 लोगों को बेल पर छोड़ा गया है, लेकिन संगठन का आरोप है कि सरकार की अधिसूचना में जमुई जिले का नाम शामिल ही नहीं किया गया. यहां अब भी दो लोगों के जेल में होने का दावा किया गया है.
औरंगाबाद जिले में गिरफ्तार 3 लोगों को भी अब तक रिहा नहीं किए जाने की बात कही गई है.

कुणाल ने कहा कि इन मामलों में प्रशासन से कई बार बातचीत की गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है .

प्रशासनिक रवैये पर भाकपा माले की टिप्पणी

भाकपा माले के राज्य सचिव ने आरोप लगाया है कि सरकार के स्पष्ट आदेश के बाद भी छात्रों और युवाओं को जेल में रखना प्रशासन के दमनात्मक रवैये को दर्शाता है. उनका कहना है कि आंदोलन के दौरान भी पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे थे और अब आदेश जारी होने के बाद भी प्रशासन उसी तरीके से काम कर रहा है.

उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने मुकदमे वापस लेने का फैसला लिया है, तो उसका लाभ सभी पात्र प्रदर्शनकारियों को समान रूप से मिलना चाहिए. किसी भी जिले में अलग-अलग तरीके से आदेश लागू होना उचित नहीं है.

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सरकार से क्या मांग की गई?

प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से भाकपा माले ने राज्य सरकार से मांग किया है कि 26 जुलाई की शाम 6 बजे तक दर्ज पेपर लीक आंदोलन से जुड़े सभी मामलों में मुकदमे वापस लेने के आदेश को पूरे बिहार में एक समान लागू कराया जाए.साथ ही, आंदोलन से जुड़े सभी प्रदर्शनकारियों को बिना किसी भेदभाव के तत्काल रिहा किया जाए.

संगठन का कहना है कि यदि किसी जिले में आदेश का पालन नहीं हो रहा है, तो सरकार को प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप कर निर्णय के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना चाहिए.

फिलहाल सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं

इस प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए आरोपों पर समाचार लिखे जाने तक बिहार सरकार या संबंधित जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.यदि सरकार या प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो समाचार को उसके अनुसार अद्यतन किया जा सकता है.

स्रोत: भाकपा माले द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति। के आधार पर

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