श्रेयसी सिंह लड्डू विवाद: राजद ने भाजपा पर दलित समाज के अपमान का लगाया आरोप, माफी की मांग

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Ajit Kumar

बिहार
श्रेयसी सिंह लड्डू विवाद: राजद ने भाजपा पर दलित समाज के अपमान का लगाया आरोप, माफी की मांग

एजाज अहमद ने इस घटना को दलित सम्मान और संविधान की भावना से जुड़ा मामला बताया

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना : बिहार की राजनीति में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह से जुड़ा एक कथित वीडियो और उस पर उठे विवाद ने नया राजनीतिक रंग ले लिया है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस मुद्दे को दलित सम्मान और संविधान के मूल्यों से जोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाए हैं. राजद के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने मंगलवार (29 जुलाई 2026) को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यदि मंत्री ने वास्तव में दलित समाज की एक बच्ची के हाथों से मिठाई लेने से इनकार किया है, तो यह केवल एक बच्ची की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला नहीं, बल्कि दलित समाज के सम्मान और संवैधानिक भावना का भी अपमान है.

राजद ने इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा से सार्वजनिक माफी की मांग किया है और कहा है कि पार्टी को इस मामले पर अपना स्पष्ट पक्ष रखना चाहिए.

क्या है पूरा मामला?

राजद की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एक कार्यक्रम के दौरान खेल मंत्री श्रेयसी सिंह दलित समाज की बच्चियों को अपने हाथों से मिठाई खिलाती हुई दिखाई दीं.प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि जब उन्हीं बच्चियों में से एक बच्ची ने मंत्री को मिठाई खिलाने का प्रयास किया, तब मंत्री ने मिठाई लेने से या खाने से इनकार कर दिया.

राजद का आरोप है कि इस कथित व्यवहार से बच्ची की भावनाओं को ठेस पहुंची और दलित समाज का अपमान हुआ है .हालांकि, इस संबंध में मंत्री श्रेयसी सिंह या भाजपा की ओर से इस प्रेस विज्ञप्ति के जवाब में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

एजाज अहमद ने क्या कहा?

राजद प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने अपने बयान में कहा कि यदि राजनीतिक कार्यक्रमों में दलित समाज के बीच जाकर केवल प्रतीकात्मक तस्वीरें और आयोजन किए जाते हैं, लेकिन व्यवहार में समानता और सम्मान नहीं दिखाया जाता, तो यह सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है.

उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना से भाजपा की दलित समाज के प्रति सोच उजागर होती है. उनके अनुसार, जिस बच्ची ने सम्मानपूर्वक मंत्री को मिठाई खिलाने की कोशिश की, उसकी भावना का सम्मान नहीं किया गया.

एजाज अहमद ने कहा कि यदि यह घटना सही है, तो भाजपा को दलित समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए.

संविधान और सामाजिक समानता का मुद्दा

राजद ने अपने बयान में इस विवाद को भारतीय संविधान के मूल्यों से भी जोड़ा है. प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि संविधान सभी नागरिकों को समान सम्मान और गरिमा प्रदान करने की बात करता है. ऐसे में यदि किसी सार्वजनिक प्रतिनिधि द्वारा सामाजिक आधार पर भेदभाव जैसा संदेश जाता है, तो यह संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता.

राजद का कहना है कि मंत्री पद की शपथ सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार और न्याय की भावना पर आधारित होती है. इसलिए इस प्रकार की कथित घटना की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए.

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भाजपा से माफी की मांग

राजद ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में भाजपा नेतृत्व से इस पूरे मामले पर हस्तक्षेप करने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि यदि मंत्री का व्यवहार दलित समाज की भावनाओं को आहत करने वाला था, तो भाजपा को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए.

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी आरोप लगाया गया है कि यदि दलित समाज के बीच कार्यक्रम केवल राजनीतिक संदेश देने के लिए आयोजित किए जाते हैं, लेकिन व्यवहार में समानता का पालन नहीं होता, तो इससे सामाजिक विश्वास कमजोर होता है.

राजनीतिक बहस तेज होने के आसार

बिहार में विधानसभा चुनावी माहौल के बीच इस प्रकार के आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं. दलित समुदाय से जुड़े मुद्दे राज्य की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा हैं और ऐसे मामलों पर विभिन्न राजनीतिक दल अक्सर एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं.

इस विवाद के बाद विपक्ष सरकार पर हमलावर है, जबकि भाजपा की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आने का इंतजार किया जा रहा है. यदि सरकार या मंत्री की ओर से कोई स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो इस मामले की राजनीतिक दिशा बदल सकती है.

निष्कर्ष

राजद की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह पर दलित समाज की बच्ची के हाथों से मिठाई लेने से इनकार करने का आरोप लगाया गया है और भाजपा से सार्वजनिक माफी की मांग की गई है.फिलहाल यह आरोप विपक्ष की प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं. मामले में मंत्री श्रेयसी सिंह या भाजपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की व्यापक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी.ऐसे मामलों में सभी पक्षों का दृष्टिकोण सामने आना लोकतांत्रिक विमर्श और निष्पक्ष पत्रकारिता दोनों के लिए आवश्यक है.

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