बर्न मरीजों के बेहतर इलाज के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत स्किन बैंकिंग व्यवस्था की मांग
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना : राज्यसभा सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने संसद के उच्च सदन में त्वचा दान (Skin Donation) और स्किन बैंकिंग (Skin Banking) जैसे महत्वपूर्ण विषय को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि देश में हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग आग, दुर्घटनाओं, रासायनिक हादसों और अन्य कारणों से गंभीर रूप से झुलस जाते हैं. ऐसे मरीजों के जीवन को बचाने और उनके उपचार को प्रभावी बनाने में दान की गई त्वचा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रतिरोपण संगठन (NOTTO) के तहत त्वचा दान और स्किन बैंकिंग के लिए एक समन्वित राष्ट्रीय व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके
बर्न मरीजों के लिए क्यों जरूरी है त्वचा दान?
गंभीर रूप से जलने वाले मरीजों में शरीर की बाहरी त्वचा नष्ट हो जाती है.ऐसे मामलों में संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ जाता है और शरीर से अत्यधिक तरल पदार्थ (Fluid Loss) निकलने लगता है. इससे मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है.
विनोद तावड़े ने राज्यसभा में बताया कि दान की गई त्वचा अस्थायी जैविक आवरण (Biological Dressing) का कार्य करती है.इससे कई महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं,
संक्रमण का खतरा कम होता है.
शरीर से तरल पदार्थ का अत्यधिक नुकसान रुकता है.
घाव को सुरक्षित वातावरण मिलता है.
मरीज को दर्द में राहत मिलती है.
आगे की पुनर्निर्माण (Reconstructive Surgery) प्रक्रिया आसान हो जाती है.
उन्होंने कहा कि समय पर उपलब्ध त्वचा कई गंभीर मरीजों के जीवन को बचाने में सहायक सिद्ध हो सकती है.
मानव अंग एवं ऊतक प्रतिरोपण अधिनियम के तहत है प्रावधान
विनोद तावड़े ने सदन को बताया कि भारत में त्वचा दान का कानूनी प्रावधान मानव अंग एवं ऊतक प्रतिरोपण अधिनियम, 1994 के अंतर्गत उपलब्ध है.इसी कानूनी ढांचे के तहत अंगों और ऊतकों के दान एवं प्रतिरोपण की व्यवस्था संचालित की जाती है.
उन्होंने सरकार द्वारा राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रतिरोपण संगठन (NOTTO) के माध्यम से किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस दिशा में अभी और व्यापक स्तर पर काम करने की आवश्यकता है.
उनका मानना है कि यदि पूरे देश में एक समान और समन्वित व्यवस्था विकसित की जाए तो त्वचा दान की उपलब्धता और उपयोग दोनों में उल्लेखनीय सुधार संभव है.
मृत्यु के छह घंटे के भीतर हो सकता है त्वचा दान
राज्यसभा में अपने वक्तव्य के दौरान विनोद तावड़े ने त्वचा दान की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के छह घंटे के भीतर त्वचा दान किया जा सकता है.यह प्रक्रिया प्रशिक्षित चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा पूरी सावधानी के साथ की जाती है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि,
त्वचा दान के लिए रक्त समूह (Blood Group) का मिलान आवश्यक नहीं होता.
ऊतक (Tissue Matching) की आवश्यकता भी नहीं पड़ती.
केवल त्वचा की सबसे बाहरी परत निकाली जाती है.
इस प्रक्रिया से मृतक के शरीर की सामान्य संरचना या स्वरूप पर कोई विकृति नहीं आती.
इन तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि त्वचा दान वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी प्रक्रिया है.
पांच वर्षों तक सुरक्षित रखी जा सकती है दान की गई त्वचा
विनोद तावड़े ने यह भी जानकारी दी कि वैज्ञानिक तकनीकों की सहायता से दान की गई त्वचा को लगभग पांच वर्षों तक सुरक्षित संरक्षित किया जा सकता है.
इसका अर्थ है कि यदि देश में पर्याप्त संख्या में आधुनिक स्किन बैंक स्थापित हों तो आपातकालीन परिस्थितियों में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है.
यही कारण है कि उन्होंने स्किन बैंकिंग अवसंरचना के विस्तार पर विशेष बल दिया.
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जन-जागरूकता बढ़ाने पर दिया जोर
सांसद विनोद तावड़े ने कहा कि केवल अस्पतालों में सुविधाएं विकसित करना पर्याप्त नहीं होगा. इसके साथ-साथ समाज में त्वचा दान के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी आवश्यक है.
उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग त्वचा दान की प्रक्रिया और उसके महत्व से परिचित नहीं हैं.यदि लोगों को सही जानकारी मिले तो अधिक से अधिक परिवार मृत्यु के बाद त्वचा दान के लिए आगे आ सकते हैं.
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जन-जागरूकता अभियान, चिकित्सा संस्थानों की क्षमता वृद्धि और आधुनिक स्किन बैंकिंग नेटवर्क को प्राथमिकता दी जाए.
एनओटीटीओ के तहत एकीकृत राष्ट्रीय व्यवस्था की मांग
विनोद तावड़े ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रतिरोपण संगठन (NOTTO) के अंतर्गत त्वचा दान, संग्रहण, संरक्षण और वितरण के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की एकीकृत प्रणाली विकसित की जानी चाहिए.
ऐसी व्यवस्था से विभिन्न राज्यों के अस्पतालों, स्किन बैंकों और बर्न उपचार केंद्रों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा. इससे जरूरत के समय मरीजों तक दान की गई त्वचा शीघ्र पहुंचाई जा सकेगी और उपचार की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा.
निष्कर्ष
राज्यसभा में विनोद तावड़े द्वारा उठाया गया त्वचा दान और स्किन बैंकिंग का मुद्दा केवल स्वास्थ्य व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि जन-जागरूकता और सामाजिक भागीदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय भी है.गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के उपचार में दान की गई त्वचा जीवनरक्षक साबित हो सकती है.
यदि देश में स्किन बैंकिंग नेटवर्क को मजबूत किया जाए, एनओटीटीओ के तहत एकीकृत व्यवस्था विकसित हो, चिकित्सा अवसंरचना का विस्तार किया जाए और लोगों को त्वचा दान के लिए जागरूक बनाया जाए, तो हजारों मरीजों को बेहतर एवं समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है. इसी उद्देश्य से राज्यसभा में विनोद तावड़े ने सरकार का ध्यान इस महत्वपूर्ण विषय की ओर आकर्षित किया.

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