मानगढ़ धाम विवाद: कांग्रेस ने केंद्र पर आदिवासी उपेक्षा का लगाया आरोप

| BY

Ajit Kumar

भारत
मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग पर केंद्र सरकार के खिलाफ कांग्रेस का विरोध

टीका राम जुली ने राष्ट्रीय स्मारक, भाजपा के वादों और आदिवासी सम्मान पर उठाए सवाल

तीसरा पक्ष ब्यूरो ; राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीका राम जुली ने केंद्र सरकार पर आदिवासी समाज की भावनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है. उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि केंद्र सरकार ने संसद में यह कहा है कि मानगढ़ धाम राष्ट्रीय स्मारक बनने के योग्य नहीं है. इस बयान के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर आदिवासी इतिहास और बलिदान के सम्मान की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है.

टीका राम जुली ने कहा कि मानगढ़ धाम केवल एक धार्मिक या ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के स्वतंत्रता संग्राम और बलिदान का प्रतीक है.उन्होंने केंद्र सरकार से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की है.

क्या है मानगढ़ धाम का ऐतिहासिक महत्व?

मानगढ़ धाम राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमा के निकट स्थित एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है. यह स्थान आदिवासी समुदाय के लिए विशेष आस्था और गौरव का केंद्र माना जाता है.

इतिहास के अनुसार, 17 नवंबर 1913 को गोविंद गुरु के नेतृत्व में बड़ी संख्या में आदिवासी यहां एकत्र हुए थे. उस समय ब्रिटिश शासन ने इस सभा पर गोलीबारी की थी, जिसमें सैकड़ों आदिवासियों के मारे जाने का दावा किया जाता है. इसी कारण कई लोग मानगढ़ धाम को आदिवासियों का जलियांवाला बाग भी कहते हैं.

हालांकि, विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे मिलते हैं. इसलिए इस विषय पर आधिकारिक और ऐतिहासिक अभिलेखों में मतभेद भी मौजूद हैं.

टीका राम जुली ने क्या आरोप लगाए?

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में टीका राम जुली ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूर्व में मानगढ़ धाम के विकास और आदिवासी सम्मान से जुड़े कई वादे किए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में भी इसे एक भव्य ट्राइबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने का वादा किया था.

लेकिन अब, उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने संसद में यह कह दिया कि यह स्थल राष्ट्रीय स्मारक बनने की पात्रता नहीं रखता.

कांग्रेस नेता ने इसे आदिवासी समाज के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात बताते हुए कहा कि चुनाव के समय आदिवासी समाज को याद किया जाता है, लेकिन नीतिगत निर्णयों में उनकी भावनाओं को महत्व नहीं दिया जाता है.

राष्ट्रीय स्मारक की सिफारिश का भी किया जिक्र

टीका राम जुली ने अपने पोस्ट में यह भी दावा किया कि वर्ष 2022 में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के तत्कालीन अध्यक्ष तरुण विजय ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की सिफारिश की थी.

उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को सौंपी गई थी. ऐसे में कांग्रेस का सवाल है कि यदि संबंधित प्राधिकरण की ओर से सिफारिश की गई थी, तो उसके बाद भी इस विषय पर सकारात्मक निर्णय क्यों नहीं लिया गया.

हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस दावे पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

पर्यटन मंत्रालय को लेकर भी उठाए सवाल

टीका राम जुली ने यह भी कहा कि सबसे बड़ा प्रश्न उस पर्यटन मंत्रालय पर उठता है, जिसके मंत्री स्वयं राजस्थान से आने वाले गजेंद्र सिंह शेखावत हैं.

उन्होंने पूछा कि यदि राजस्थान के केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद आदिवासी समाज के सम्मान के प्रति गंभीर हैं, तो उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के सामने प्रभावी ढंग से अपनी बात क्यों नहीं रखी.

कांग्रेस ने पूछे तीन बड़े सवाल

टीका राम जुली ने भाजपा और केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख सवाल रखे हैं,

आदिवासी समाज की भावनाओं के समर्थन में केंद्र सरकार के भीतर आवाज क्यों नहीं उठाई गई?
यदि राष्ट्रीय स्मारक की सिफारिश पहले ही की जा चुकी थी, तो फाइल वर्षों तक लंबित क्यों रही?
भाजपा के संकल्प पत्र में मानगढ़ धाम को ट्राइबल डेस्टिनेशन बनाने का जो वादा किया गया था, वह कब पूरा होगा?

कांग्रेस का कहना है कि इन सवालों का स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए.

ये भी पढ़े :बांकीपुर हार पर अखिलेश यादव का तंज: बोले- बीजेपी को 12 साल का मिला रिटर्न गिफ्ट, जानिए पूरा मामला
ये भी पढ़े :बिहार में सफाई मजदूरों की हड़ताल को मिला भाकपा-माले का समर्थन

राजनीतिक महत्व भी बढ़ा

राजस्थान में आदिवासी समुदाय कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है. ऐसे में मानगढ़ धाम का मुद्दा केवल ऐतिहासिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक महत्व भी काफी बढ़ गया है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि आदिवासी अस्मिता, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक सम्मान से जुड़े मुद्दे चुनावी राजनीति में भी प्रभाव डालते हैं. इसलिए इस विषय पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है.

केंद्र सरकार का पक्ष

टीका राम जुली का दावा है कि संसद में केंद्र सरकार ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किए जाने की पात्रता से संबंधित जवाब दिया है.

हालांकि, इस विषय पर केंद्र सरकार की विस्तृत आधिकारिक व्याख्या या निर्णय के पीछे के कारण सार्वजनिक रूप से सामने आने के बाद ही पूरे विवाद की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी.

यदि सरकार इस मुद्दे पर कोई स्पष्टीकरण जारी करती है या नीति में बदलाव करती है, तो उसका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव व्यापक हो सकता है.

निष्कर्ष

मानगढ़ धाम का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है.कांग्रेस ने इसे आदिवासी समाज के सम्मान और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा प्रश्न बताते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.दूसरी ओर, इस विषय पर अंतिम निष्कर्ष केंद्र सरकार की आधिकारिक स्थिति और भविष्य के निर्णयों पर निर्भर करेगा.

फिलहाल यह स्पष्ट है कि मानगढ़ धाम केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, स्वतंत्रता संग्राम की स्मृति और राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है.आने वाले समय में इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित निर्णय पर सभी की नजर रहेगी.

Trending news

Leave a Comment